महायुति में जाने की अटकलों पर सुप्रिया सुले का तंज, जयंत पाटिल से मुलाकात पर दी सफाई

मुंबई। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने उनकी पार्टी के महायुति में शामिल होने की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि नियमित राजनीतिक और संसदीय मुलाकातों को गठबंधन की अटकलों से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नेताओं के बीच होने वाली बैठकों को राजनीतिक संकेत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
जयंत पाटिल से मुलाकात पर क्या बोलीं?
मीडिया ने जब भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े और एनसीपी (शरद पवार) के नेता जयंत पाटिल के बीच कथित बातचीत का जिक्र करते हुए सवाल पूछा, तो सुप्रिया सुले ने हल्के-फुल्के अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि ऐसी कोई विशेष मुलाकात हुई भी थी या नहीं।
सुले ने बताया कि वह और जयंत पाटिल एक ही संसदीय समिति के सदस्य हैं और इसी वजह से अक्सर मिलते रहते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने में ही उनकी और जयंत पाटिल की करीब 21 बार मुलाकात हुई है। समिति में भाजपा सहित कई दलों के सांसद भी शामिल हैं, इसलिए इस तरह की बैठकों को सामान्य संसदीय प्रक्रिया के तौर पर देखा जाना चाहिए, न कि किसी राजनीतिक समीकरण के संकेत के रूप में।
सत्ता में आने के सवाल पर क्या कहा?
जब उनसे पूछा गया कि क्या उनकी पार्टी जल्द सत्ता में शामिल हो सकती है, तो सुले ने कहा कि उनकी प्राथमिकता जनता की सेवा करना है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों से इस तरह की अटकलें लगती रही हैं।
उन्होंने कहा कि यदि मौजूदा सरकार का कामकाज इसी तरह चलता रहा, तो एनसीपी (शरद पवार) और उसके सहयोगी मजबूती से चुनाव लड़ेंगे और सत्ता हासिल करने का प्रयास करेंगे। साथ ही उन्होंने टिप्पणी की कि आगे सरकार क्या करेगी, यह “भगवान ही जानता है।”
राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर सरकार पर निशाना
सुप्रिया सुले ने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े विवाद पर भी भाजपा सरकार की आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि कुछ वीडियो सामने आए हैं, जिनमें मंदिर से नकदी और चांदी हटाने के आरोप दिखाई दे रहे हैं। उनके अनुसार, इन वीडियो को भाजपा समर्थक मीडिया मंचों ने भी प्रसारित किया है।
सुले ने कहा कि राम मंदिर देशभर के लोगों की आस्था और योगदान का प्रतीक है। ऐसे में यदि वहां वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आते हैं, तो यह गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि राम मंदिर से जुड़े आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से अलग-अलग दावे किए गए हैं और मामले की जांच जारी है। ऐसे आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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