नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों की रक्षा के लिए गुरुवार को अहम टिप्पणी की। शीर्ष अदालत ने जोर देकर कहा इन पहाड़ियों में हर तरह की माइनिंग गतिविधियां बंद होनी चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि जब तक केंद्र सरकार और पर्यावरण विशेषज्ञ इकोलॉजिकली सेंसिटिव जोन की टोपोग्राफिकल सीमाओं पर पूरी सहमति नहीं बना लेते, तब तक मौजूदा स्थिति बरकरार रखी जाए।
यह रेंज जैव विविधता को संरक्षित रखता है, भूजल को रिचार्ज करता है और पूरे उत्तरी भारत के मौसम को कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभाता है।
मामले की सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने पहले से दी गई अनुमतियों पर कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा, ‘सभी अनुमतियां अनुमति नहीं होतीं हम कहते हैं अरावली में खनन बंद करो और आप बंद कर दो!’
सीनियर वकील मुकुल रोहतगी, जो एक खननकर्ता की ओर से पेश हुए थे, ने दावा किया कि उनका कम उस क्षेत्र में नहीं आता जो भौगोलिक रूप से अरावली पहाड़ियों का हिस्सा माना जाता है।
इसके जवाब में चीफ जस्टिस ने कहा, ‘अगर आप इतिहास देखें, तो सुप्रीम कोर्ट भी अरावली पहाड़ियों में है। पूरा जयपुर शहर इन्हीं पहाड़ियों में है जो उत्तर-पश्चिम भारत में 700km तक फैली हुई हैं।’
स्टेटस क्वो बनाए रखने के सख्त आदेश
कोर्ट ने आगे साफ किया, ‘हमें पता है कि सभी एक्टिविटी और खासकर माइनिंग, जिसके लिए लाइसेंस दिए गए थे, रुक गई हैं। हालांकि, अभी के लिए ऐसा ही स्टेटस को बनाए रखना होगा। कम से कम तब तक जब तक कुछ शुरुआती मुद्दों का जवाब धीरे-धीरे नहीं मिल जाता।’
अवैध खनन पर कार्रवाई के निर्देश
इससे पहले जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के कई इलाकों में गैर-कानूनी माइनिंग पर गंभीर चिंता जताई थी। भाजपा शासित राज्य सरकार को सख्त हिदायत दी गई थी कि कोई भी अवैध माइनिंग न होने दिया जाए।
