नई दिल्ली। लोकसभा में राहुल गांधी की स्पीच पर लगातार दूसरे दिन हंगामा हुआ। राहुल ने मंगलवार दोपहर 2 बजे पूर्व आर्मी चीफ की अनपब्लिश्ड बुक के आर्टिकल को सदन में पेश किया। कहा- मुझे बोलने दिया जाए। उनके यह कहते ही एनडीए के सांसदों ने टोकना शुरू कर दिया। आज वे 14 मिनट तक बोलने की कोशिश करते रहे। इस बीच हंगामा तेज होता गया। राहुल ने सोमवार को भी 46 मिनट तक अपनी बात कहने की कोशिश की थी।
आज हंगामा बढ़ने पर स्पीकर कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने राहुल को रोका और दूसरी पार्टियों के सांसदों को बोलने को कहा, लेकिन राहुल के समर्थन में सपा सांसद नरेश उत्तम पटेल, TMC सांसद शताब्दी रॉय और DMK सांसद डी एम कातिर आनंद ने बोलने से इनकार कर दिया।
विपक्षी सांसद नारेबाजी करते वेल में पहुंच गए। स्पीकर पीठासीन कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी की चेयर की तरफ विपक्षी सांसदों ने पेपर उछाले। इसके बाद कार्यवाही स्थगित कर दी गई। इसके बाद पीठासीन दिलीप सैकिया ने 8 सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया।
8 सांसदों पर रूल 374 के तहत ही कार्रवाई
विपक्ष के सांसदों पर रूल 374 के तहत ही कार्रवाई की गई है। सदन की कार्यवाही में बाधा पहुंचाना: लोकसभा स्पीकर उस सांसद के नाम का ऐलान कर सकते हैं, जिसने आसन की मर्यादा तोड़ी हो या नियमों का उल्लंघन किया हो और जानबूझकर सदन की कार्यवाही में बाधा पहुंचाई हो।जब स्पीकर ऐसे सांसदों के नाम का ऐलान करते हैं, तो वह सदन के पटल पर एक प्रस्ताव रखते हैं। प्रस्ताव में हंगामा करने वाले सांसद का नाम लेते हुए उसे सस्पेंड करने की बात कही जाती है।इसमें सस्पेंशन की अवधि का जिक्र होता है। यह अवधि अधिकतम सत्र के खत्म होने तक हो सकती है। सदन चाहे तो वह किसी भी समय इस प्रस्ताव को रद्द करने का आग्रह भी कर सकता है।
अब जानते हैं कि नियम 374ए क्या कहता है: 5 दिसंबर 2001 को रूल बुक में एक और नियम जोड़ा गया है। इसे ही रूल 374ए कहा जाता है। यदि कोई सांसद स्पीकर के आसन के निकट आकर या सभा में नारे लगाकर या अन्य प्रकार से कार्यवाही में बाधा डालकर जानबूझकर नियमों का उल्लंघन करता है तो उस पर इस नियम के तहत कार्रवाई की जाती है।
सस्पेंशन के दौरान सांसदों को सैलरी मिलती है: सदन में व्यवधान पैदा करने के लिए सस्पेंड किए गए सांसद को पूरा वेतन मिलता है। केंद्र में लगातार सरकारों द्वारा ‘काम नहीं, वेतन नहीं’ की नीति दशकों से विचाराधीन है। हालांकि इसे अभी तक पेश नहीं किया गया है।
