Report: IAS के देश भर में 1300 पद खाली, कैसे चलेगा प्रशासनि‍क स‍िस्टम? यूपी में सबसे ज्यादा संकट

नई दिल्ली। देश में प्रशासन चलाने वाले शीर्ष अधिकारियों की कमी साफ दिख रही है. IAS कैडर में इस समय कुल 1,300 पद खाली हैं. सबसे ज्यादा कमी उत्तर प्रदेश में 81 अधिकारियों की है. छोटे राज्यों में भी हाल गंभीर है. केरल में 72 अफसरों की कमी है. यह स्थिति केंद्र और राज्यों की प्रशासनिक क्षमता पर असर डाल रही है.

राज्यसभा की संसदीय समिति ने इस पर चिंता जताई है. समिति का कहना है कि IAS कैडर की 25% रिक्तियां तुरंत भरी जाएं. केंद्र शासित प्रदेशों और दिल्ली में प्रशासनिक जिम्मेदारियां ज्यादा हैं. छोटे कैडर वाले राज्यों के लिए अलग भर्ती रणनीति बने. पूर्वोत्तर राज्यों जैसे नागालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा और सिक्किम में स्थिति और असंतुलित बताई गई है.

कुल पद और भर्ती की स्थिति

कुल पद: 6,877
भरे हुए पद: 5,577
सीधी भर्ती के पद: 4,059
पदोन्नति के पद: 1,518

राज्यों में IAS पदों की स्थिति (चयनित आंकड़े)

AGMUT: 542 पद, कमी 136 (25.09%)
बिहार: 359 पद, कमी 56 (15.60%)
गुजरात: 313 पद, कमी 58 (18.53%)
हरियाणा: 215 पद, कमी 43 (20.00%)
झारखंड: 224 पद, कमी 47 (20.98%)
केरल: 231 पद, कमी 74 (32.03%)
महाराष्ट्र: 435 पद, कमी 76 (17.47%)
ओडिशा: 248 पद, कमी 63 (25.40%)
राजस्थान: 332 पद, कमी 64 (19.28%)
तमिलनाडु: 394 पद, कमी 51 (12.94%)
उत्तर प्रदेश: 652 पद, कमी 81 (12.42%)
पश्चिम बंगाल: 378 पद, कमी 75 (19.84%)

भर्ती को लेकर क्या सुझाव

समिति ने कहा है कि भर्ती प्रक्रिया डेटा आधारित हो. सेवानिवृत्ति और जरूरत को ध्यान में रखा जाए और वार्षिक भर्ती योजना साफ हो. साथ ही चंद्रमोली समिति की सिफारिशों को लागू करने की बात भी कही गई है. आईएएस अफसरों के लिए वेलफेयर प्लान की जरूरत है. रिपोर्ट में अफसरों के काम के दबाव पर भी चिंता जताई गई है. सुझाव दिए गए हैं कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए काउंसलिंग सिस्टम बने. लंबे समय तक अतिरिक्त जिम्मेदारी पर नजर रखी जाए और बार-बार ट्रांसफर से होने वाले तनाव को कम किया जाए.

रिपोर्ट में ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत तनाव प्रबंधन मॉड्यूल जोड़ने की भी बात कही गई है. इसके अलावा, प्रशासन में AI के इस्तेमाल को लेकर सुरक्षित और जवाबदेह सिस्टम बनाने की जरूरत बताई गई है. कुल मिलाकर, देश में IAS अफसरों की कमी अब एक बड़ा प्रशासनिक मुद्दा बनती जा रही है. समिति चाहती है कि सरकार इस पर जल्दी और ठोस कदम उठाए.

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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