Raghav Chaddha : मेरी खामोशी को हार मत समझ लेना…राघव चड्ढा ने एक्शन पर तोड़ी चुप्पी, AAP को सीधा जवाब

नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने चुप्पी तोड़ दी है. राज्यसभा के उपनेता पद से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है. उन्होंने सीधे-सीधे आम आदमी पार्टी का नाम लेकर जवाब दिया है कि उन्हें खामोश कराया गया है, मगर वह हारे नहीं हैं. राघव चड्ढा का कहना है कि उन्हें जनता के मुद्दे उठाने की वजह से आम आदमी पार्टी से झटका लगा है. उन्होंने कहा, ‘मैं जनता के मुद्दे उठाता हूं. क्या जनता के मुद्दे उठाना अपराध है? राघव चड्ढा ने वीडियो संदेश जारी कर अपना पक्ष रखा और कहा, ‘मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना, मैं वो दरिया हूं जो वक्त आने पर सैलाब बनता है.’

राज्यसभा में उपनेता पद से आप की ओर से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा की यह पहली प्रतिक्रिया है. गुरुवार को आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर राघव चड्ढा को सदन में पार्टी के उपनेता पद से हटाने का आग्रह किया था. इतना ही नहीं, राघव चड्ढा के राज्यसभा में बोलने पर पाबंदी लगा दी गई थी. उनके स्थान पर पंजाब के सांसद अशोक मित्तल का नाम प्रस्तावित किया. पत्र में कहा गया कि राघव चड्ढा को सदन में बोलने के लिए ‘आप’ के निर्धारित कोटे से समय आवंटित नहीं किया जाना चाहिए.

इस पर राघव चड्ढा ने अपनी पहली प्रतिक्रिया में कहा, ‘ मुझे जब-जब पार्लियामेंट में बोलने का मौका मिलता है, मैं जनता के मुद्दे उठाता हूं. शायद ऐसे टॉपिक उठाता हूं, जिसे आम तौर पर संसद में नहीं उठाया जाता. मगर क्या जनता के मुद्दे उठाना अपराध है क्या, क्या मैंने कोई गुनाह कर दिया. ये सवाल मैं इसलिए पूछ रहा हूं क्योंकि आप ने राज्यसभा के सक्रेटेरियट को कहा है कि राघव चड्ढा को पार्लियामेंट में बोलने का मौका न दिया जाए. अब भला मेरे बोलने पर कोई रोक क्यों लगाना चाहेगा. मैं तो हमेशा देश के आम आदमी की बात करता हूं. मेरे मुद्दों से देश के आम आदमी का तो फायदा हुआ, लेकिन आम आदमी पार्टी का क्या नुकसान हुआ. आप हमेशा मेरा हौसला बढ़ाते हैं. आप मेरा हाथ थामे रेखिएगा. मैं आपसे हूं और आपके लिए हूं. जिन लोगों ने मुझे खामोश किया, उन्हें कहना चाहता हूं, मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना, मैं वो दरिया हूं जो वक्त आने पर सैलाब बनता है.’

कल भी एक वीडियो से दिया था संदेश
इससे पहले आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने गुरुवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया था. इसमें उन्होंने सदन में पार्टी के उपनेता के रूप में उठाए गए मुद्दों पर प्रकाश डाला था. राज्यसभा सदस्य ने यह वीडियो उन्हें पद से हटाए जाने के कुछ घंटों बाद पोस्ट किया. उस वीडियो में मध्यम वर्ग पर कर का बोझ, डेटा की समय सीमा समाप्त होने की समस्या, भारत में पितृत्व अवकाश का अधिकार और हवाई अड्डों पर अतिरिक्त सामान के शुल्क जैसे मुद्दों का जिक्र किया गया था।

राघव चड्ढा और आप में दुश्मनी?
दरअसल, राघव चड्ढा पंजाब से राज्यसभा सदस्य हैं. राघव चड्ढा एक समय में ‘आप’ संयोजक अरविंद केजरीवाल के करीबी विश्वासपात्र माने जाते थे. मगर बीते कुछ समय से राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी के बीच तलवारें खिंच गई हैं. कारण कि राघव चड्ढा को AAP ने राज्यसभा में डिप्टी लीडर पद से हटाया तो राघव चड्ढा ने भी आप से दुश्मनी के संकेत वीडियो के जरिए दे दिए. इतना ही नहीं, आम आदमी पार्टी का मानना है कि राघव चड्ढा पार्टी का स्टैंड नहीं रख पाते हैं.

कैसे ‘आप’ और राघव में बढ़ती गई दूरी?

दरअसल, यह कदम ‘आप’ से जुड़े मामलों पर राघव चड्ढा की लंबे समय से चली आ रही चुप्पी और पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल के कई सार्वजनिक कार्यक्रमों से उनकी अनुपस्थिति के बीच उठाया गया है. कभी केजरीवाल के करीबी विश्वासपात्र और देश के सबसे युवा सांसदों में से एक माने जाने वाले चड्ढा ने पार्टी के कार्यों में अहम भूमिका निभाई थी. इसमें खासकर पंजाब और दिल्ली में ‘आप’ के कार्यकाल के दौरान उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही. हालांकि, हाल के महीनों में हालात बदल गए हैं.
आबकारी नीति मामले से जुड़े होने के आरोप में मार्च 2024 में दिल्ली के तत्कालीन मुख्यमंत्री केजरीवाल की गिरफ्तारी के समय चड्ढा मेडिकल कारणों से विदेश में थे. अरविंद केजरीवाल की लगभग छह महीने की कैद के दौरान चड्ढा देश से बाहर ही रहे और 13 सितंबर 2024 को उनकी रिहाई के कुछ ही दिनों बाद उनसे मिले.

दिल्ली की एक अदालत द्वारा आबकारी मामले में केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और ‘आप’ के अन्य नेताओं को पिछले महीने बरी किए जाने पर चड्ढा ने चुप्पी साधे रखी। अदालत से राहत मिलने के बाद केजरीवाल की पत्रकार वार्ता और जंतर-मंतर पर हुई रैली में भी वह शामिल नहीं हुए.
पार्टी नेताओं ने दावा किया कि चड्ढा को अन्य राज्यों में पार्टी के चुनाव प्रचार अभियानों और संगठनात्मक कामों से धीरे-धीरे अलग किया जा रहा है. हालांकि वह संसद के भीतर और बाहर मुखर रहे हैं तथा हवाई किराए में बढ़ोतरी और गिग वर्कर्स की स्थिति जैसे मुद्दे उठाते रहे हैं.

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