भोपाल। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अपने शताब्दी वर्ष में संगठनात्मक ढांचे में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। इस बदलाव के तहत मध्य प्रदेश में अभी मौजूद मालवा, महाकौशल और मध्यभारत जैसे तीन प्रांतों को खत्म किया जाएगा और उनकी जगह करीब छह नए संभाग बनाए जाएंगे।
संघ की हाल ही में हुई प्रतिनिधि सभा की बैठक में यह फैसला लिया गया। नए सिस्टम के तहत पूरे प्रदेश की जिम्मेदारी एक प्रचारक और कार्यकारिणी संभालेगी, जबकि देशभर में करीब 80 नए संभाग गठित किए जाएंगे। इससे जिला और विभाग स्तर के कार्यकर्ता सीधे संभागीय प्रचारकों से जुड़ सकेंगे।
संघ का मानना है कि इस बदलाव से संगठन में कामकाज तेज होगा, फैसले जल्दी लिए जा सकेंगे और युवा कार्यकर्ताओं को ज्यादा जिम्मेदारी मिलेगी। इस बारे में इंदौर में मालवा प्रांत के संघचालक डॉ. प्रकाश शास्त्री आज विस्तार से जानकारी देंगे।
जल्द पूरे देश में लागू होगी व्यवस्था
मध्य प्रदेश में अब तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का काम तीन प्रांत- मालवा, महाकौशल और मध्यभारत में बंटा हुआ था। नई व्यवस्था में पूरे प्रदेश की जिम्मेदारी एक ही प्रचारक संभालेगा, जबकि अलग-अलग संभागों में अलग प्रचारक नियुक्त किए जाएंगे।
इस बदलाव से जिला और संभाग स्तर पर काम ज्यादा प्रभावी होगा। खासतौर पर युवा कार्यकर्ताओं को अधिक मौके मिलेंगे और उन्हें सक्रिय करने में मदद मिलेगी। इससे संघ का नेटवर्क भी और मजबूत होगा।
संघ के पदाधिकारियों के अनुसार, शताब्दी वर्ष को “युवा संघर्ष और संघर्ष का युवा वर्ष” के रूप में मनाया जा रहा है। यह नई व्यवस्था उसी दिशा में उठाया गया एक अहम कदम है। संघ की यह नई व्यवस्था केवल मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसे जल्द ही पूरे देश में लागू किया जाएगा।
विभाग प्रचारक अब संभाग प्रचारक होंगे
मध्यप्रदेश में तीन प्रांतों की व्यवस्था खत्म होने के साथ ही प्रांतीय प्रचारक और उनकी कार्यकारिणी भी खत्म हो जाएगी। अब पूरे राज्य के लिए एक राज्य प्रचारक नियुक्त किया जाएगा, जो संगठन की जिम्मेदारी संभालेगा।
नई व्यवस्था में हर संभाग में एक प्रचारक के साथ पूरी कार्यकारिणी बनाई जाएगी। एक संभागीय टीम में करीब 30 तक पदाधिकारी हो सकते हैं, जिससे कामकाज को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सकेगा।
अभी जो जिम्मेदारी विभाग प्रचारकों के पास है, वह अब संभागीय प्रचारकों को दी जाएगी, यानी उनकी भूमिका सीधे तौर पर नए ढांचे में शामिल हो जाएगी। जो विभाग प्रचारक नई व्यवस्था में संभागीय प्रचारक की भूमिका में फिट नहीं बैठेंगे, उन्हें संगठन में दूसरी अहम जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी।
अभी तीन प्रांत प्रचारक संभाल रहे जिम्मेदारी
मध्य प्रदेश में अभी संघ के तीन प्रांत प्रचारक हैं। मालवा की जिम्मेदारी राजमोहन के पास है, मध्यभारत की कमान विमल गुप्ता संभाल रहे हैं, जबकि महाकौशल का दायित्व ब्रजकांत चतुर्वेदी के पास है।
एक को मिलेगी प्रदेश प्रचारक की जिम्मेदारी
संघ सूत्रों के अनुसार, नई व्यवस्था लागू होने पर इन तीनों में से किसी एक प्रांत प्रचारक को प्रदेश प्रचारक बनाया जाएगा, जो पूरे मध्य प्रदेश का काम संभालेगा।
बाकी दो को मिल सकती है बड़ी भूमिका
बाकी दो प्रांत प्रचारकों को अखिल भारतीय स्तर पर जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके अलावा उन्हें संघ के अन्य अनुषांगिक संगठनों में भी अहम पद सौंपे जा सकते हैं।
ये 9 शहर बनेंगे संघ के संभागीय केंद्र
प्रदेश में इंदौर, ग्वालियर, भोपाल, उज्जैन, जबलपुर, रीवा, सागर, खंडवा और नर्मदापुरम जैसे शहर संभागीय व्यवस्था के मुख्य केंद्र होंगे। यहीं से संबंधित क्षेत्रों का संचालन किया जाएगा।
