MS Dhoni मानहानि केस: 100 करोड़ के मामले में बयान देंगे माही, हाईकोर्ट ने दिया बड़ा आदेश, सुधीर चौधरी भी है आरोपी

चेन्नई। भारतीय टीम के कैप्टन कूल और चेन्नई सुपर किंग्स के थाला के नाम से मशहूर क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी ने 11 साल पहले चर्चित पत्रकार सुधीर चौधरी समेत कुछ और लोगों पर 100 करोड़ रुपए का मानहानि केस किया था.जो अब फिर से चर्चा में हैं. 11 साल बाद ऐसा क्या हुआ कि ये दोबारा सुर्खियों में हैं.आखिर धोनी ने ये मानहानि का केस क्यों लगाया था. क्या सुधीर चौधरी समेत अन्य को 100 करोड़ रुपए का जुर्माना भरना पड़ेगा?

असल में, मद्रास हाईकोर्ट ने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान एमएस धोनी की ओर से आईपीएल सट्टेबाजी घोटाले में उनका नाम घसीटने के लिए दायर 100 करोड़ रुपये के मानहानि के मुकदमे की सुनवाई शुरू करने का आदेश दिया है और साक्ष्यों की रिकॉर्डिंग के लिए एडवोकेट कमिश्नर की नियुक्ति की है। धोनी के वकील द्वारा दायर हलफनामे को रिकॉर्ड पर लेते हुए सोमवार को न्यायमूर्ति सी.वी. कार्तिकेयन ने 20 अक्टूबर से 10 दिसंबर, 2025 के बीच चेन्नई में क्रिकेटर के साक्ष्य दर्ज करने के लिए एक एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किया है, जिनका चयन अदालत के पास उपलब्ध सूची में से किया जाएगा। उन्होंने मामले की सुनवाई शुरू करने का भी आदेश दिया।

धोनी ने 2014 में जी मीडिया कॉर्पोरेशन, पत्रकार सुधीर चौधरी, सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी जी. संपत कुमार और न्यूज नेशन नेटवर्क के खिलाफ आईपीएल सट्टेबाजी घोटाले में उनका नाम घसीटने के आरोप में मानहानि का मुकदमा दायर किया था। न्यायमूर्ति कार्तिकेयन ने एडवोकेट कमिश्नर की नियुक्त करते हुए उन्हें निर्देश दिया कि वे चेन्नई में सभी संबंधित पक्षों और उनके वकीलों के समक्ष सुविधा के अनुसार धोनी के साक्ष्य दर्ज करें।

एडवोकेट कमिश्नर की नियुक्ति इसलिए की गई क्योंकि मुख्य जांच और जिरह के लिए श्री धोनी की व्यक्तिगत उपस्थिति से अराजकता उत्पन्न हो सकती थी क्योंकि वह एक सेलिब्रिटी हैं। वरिष्ठ वकील पी.आर. रमन के माध्यम से धोनी द्वारा शपथ पत्र प्रस्तुत किए जाने के बाद यह आदेश पारित किया गया जिसमें उन्होंने 2014 से लंबित मानहानि के मुकदमे को आगे बढ़ाने की इच्छा व्यक्त की थी।

हलफनामे में धोनी ने कहा कि वह 20 अक्टूबर 2025 से 10 दिसंबर 2025 के बीच जांच और जिरह के लिए उपलब्ध रहेंगे तथा स्थान एवं तिथियां आपसी सुविधा के आधार पर तय की जा सकती हैं। साथ ही उन्होंने मुकदमे एवं साक्ष्यों की रिकॉर्डिंग के संबंध में अदालत के निर्देशों का पालन करने और पूर्ण सहयोग देने का वादा किया।हलफनामे को रिकार्ड पर लेने और एडवोकेट कमिश्नर की नियुक्ति के बाद न्यायालय ने साक्ष्यों की रिकॉर्डिंग पूरा होने के बाद मामले को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

Related Articles