Mahakumbh: ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर पद से हटाया गया, सिर न मुंडाने पर ऐक्शन

प्रयागराज।  महाकुंभ में किन्नर अखाड़े ने बड़ा ऐक्शन लिया है। किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास ने ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर पद से हटा दिया है। बताया जा रहा है कि सिर न मुंडाने पर ऐक्शन लिया गया है। अजय दास ने खुद को किन्नर अखाड़े का संस्थापक बताया। उन्होंने अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को भी निकाल दिया। वह दो बजे प्रेसवार्ता करेंगे। अजय दास ने कहा कि नए सिरे से अखाड़े का पुनर्गठन होगा। उन्होंने महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी को भी किन्नर अखाड़े से निष्कासित कर दिया है, क्योंकि उन्होंने देशद्रोह की आरोपी ममता कुलकर्णी को अखाड़े में शामिल किया था और उनकी जानकारी के बिना उन्हें महामंडलेश्वर बना दिया था। उधर, लक्ष्मी खुद को संस्थापक बता रहीं। लक्ष्मी ने कहा कि अजय को 2017 में अखाड़े से निकाल दिया था। दरअसल, अभिनेत्री ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर बनाए जाने के बाद से विवाद बढ़ा है।

अजय दास ने कहा कि ममता का बिना किसी धार्मिक व अखाड़े की परंपरा को मानते हुए वैराग्य की दिशा के बजाय सीधे महामंडलेश्वर की उपाधि व पट्टा अभिषेक कर दिया। जिस कारण से मुझे आज बेमन में मजबूर होकर देश हित सनातन एवं समाज हित में इन्हें पद मुक्त करना पड़ रहा है। किन्नर अखाड़े के सभी प्रतीक चिन्हों को भी क्षत-विक्षत किया गया है। ये लोग ना तो जूना अखाड़े के सिद्धांतों को के अनुसार चल रहे हैं, ना किन्नर अखाड़े के सिद्धांतों के। उदाहरण के लिए किन्नर अखाडे के गठन के साथ ही वैजन्ती माला गले में धारण कराई गई थी, जो की श्रृंगार की प्रतीकात्मक है परंतु इन्होंने उसे त्याग कर रुद्राक्ष की माला धारण कर ली। जो कि संन्यास का प्रतीक है और सन्यास बिना मुंडन संस्कार के मान्य नहीं होता। इस प्रकार यह सनातन धर्म प्रेमी व समाज के साथ एक प्रकार का छलावा कर रहे हैं। अतः आज मेरे द्वारा प्रेस वार्ता के माध्यम से यह सब जानकारी जनहित में व धर्महित में देना आवश्यक है।

आपको बता दें कि ममता को किन्नर अखाड़े का महामंडलेश्वर बनाए जाने के बाद से ही विवाद जारी शुरू हो गया था। संत भी नाराज थे। कई तरह के सवाल किए जा रहे थे। अभिनेत्री ममता कुलकर्णी कुछ दिन पहले महामंडलेश्वर बनी। महाकुंभ में संगम स्नान और पिंड दान के बाद किन्नर अखाड़े की आचार्य डॉक्टर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने ममता का पट्टाभिषेक करते हुए उन्हें नया नाम भी दिया। वह महाकुंभ थी उसके बाद भी विवाद जारी था। सवाल उठाए जा रहे थे। आचार्य लक्ष्मी नारायण ने इस दौरान कहा था कि वह हम लोगों से करीब डेढ़ साल से संपर्क में थीं। इससे पहले भी वह जूना अखाड़े में महामंडलेश्वर के साथ थीं। उनके गुरु के ब्रह्मलीन होने के बाद उन्हें दिशा नहीं मिल रही थी।

इस पर हमने उनके सामने इसके लिए कुछ शर्त रखी। उनसे कहा गया कि इसके लिए उन्हें संन्यास लेना होगा। पूरी दुनिया छोड़कर हमारी दुनिया में रहना होगा। वहीं ममता ने कहा था कि महामंडलेश्वर बनने से पहले उन्होंने इसके लिए जरूरी परीक्षा भी पास की है। कहा कि 23 साल में मैंने क्या ध्यान और साधन की, इस बारे में मुझसे काफी सवाल किए गए। जो-जो पूछा गया, मैंने सबकुछ बताया।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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