भोपाल। मध्य प्रदेश के धार में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इस स्थल की वीडियोग्राफी को लेकर संबंधित पक्षों द्वारा उठाई गई आपत्तियों पर अंतिम निर्णय मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ही करेगा।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि उन्हें इस बात पर कोई संदेह नहीं है कि हाई कोर्ट प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के तहत वीडियोग्राफी का परीक्षण कर सभी आपत्तियों पर विचार करेगा।
दरअसल, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा कराई गई वीडियोग्राफी के फुटेज उपलब्ध न कराए जाने पर मुस्लिम पक्ष ने आपत्ति दर्ज कराते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। मुस्लिम पक्ष ने अपने आवेदन में था कि हाई कोर्ट में 11 मार्च को उनके द्वारा प्रस्तुत आवेदन पर 16 मार्च को सुनवाई नहीं की गई। उनके आवेदन में मुख्य रूप से मांग की गई थी कि भोजशाला में किए गए सर्वेक्षण की वीडियोग्राफी के फुटेज उपलब्ध कराए जाएं।
आवेदन में ये भी मांग की गई थी कि इंदौर खंडपीठ में दो अप्रैल को प्रस्तावित सुनवाई से पहले उनकी बात सुनी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई से इंकार करते हुए मुस्लिम पक्ष से वापस हाईकोर्ट जाने के लिए कहा।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि उसने इस मामले के मेरिट पर कोई राय व्यक्त नहीं की है और सभी मुद्दे हाई कोर्ट में अंतिम सुनवाई के दौरान खुले रहेंगे।
कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट वीडियोग्राफी देखने के बाद सभी आपत्तियों पर निष्पक्षता से विचार करेगा और उसी आधार पर आगे का फैसला लिया जाएगा।
