IAS: झारखंड का वह अधिकारी, जिसने साली, ससूर और सरहज को कर दिया मालामाल, रोज हो रहे हैं नए-नए खुलासे

रांची। झारखंड के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे की मुश्किलें एक बार फिर से बढ़ने वाली हैं. पंचायती राज विभाग के मुख्य सचिव रहे चौबे शराब घोटाला में गिरफ्तार हो चुके हैं. चौबे पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो का शिकंजा हर दिन कसता ही जा रहा है. मंगलवार को ही विनय कुमार चौबे की सरहज के क्लिनिक पर छापा मारा है. चौबे जो कभी झारखंड के ताकतवर आईएएस अधिकारी हुआ करते थे, अब उनको लेकर एक के बाद एक खुलासे हो रहे हैं. कभी झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के मुख्य सचिव और आबकारी विभाग के सचिव भी रह चुके हैं. लेकिन उन पर साल 2022 की आबकारी नीति के तहत शराब सिंडीकेट को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप है.

झारखंड की राजनीति और नौकरशाही के गलियारों में कभी ‘सुपर सीएम’ के तौर पर पहचाने जाने वाले 1999 बैच के निलंबित आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे के खिलाफ एसीबी का शिकंजा और कसता जा रहा है. मंगलवार को एसीबी की टीम ने रांची के अरगोड़ा थाना क्षेत्र के पॉश इलाके अशोक नगर में स्थित उनकी सरहज प्रियंका त्रिवेदी के होमियोपैथिक क्लिनिक ‘प्रीहोम’ में अचानक छापेमारी की. प्रियंका त्रिवेदी, विनय चौबे के साले शिपिज त्रिवेदी की पत्नी हैं.

एसीबी जांच में खुलासा हुआ है कि आईएएस विनय कुमार चौबे ने भ्रष्टाचार के जरिए जो बेहिसाब संपत्ति अर्जित की है, उसे उनके करीबियों और रिश्तेदारों के माध्यम से निवेश किया गया है. यह क्लिनिक कहने को तो एक चिकित्सा केंद्र है, लेकिन एसीबी को संदेह है कि इसके वित्तीय लेन-देन में भारी गड़बड़ी है और इसे शेल कंपनी के तौर पर इस्तेमाल किया गया होगा. छापेमारी के दौरान एसीबी के अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण फाइलें, बैंक पासबुक और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं.

विनय कुमार चौबे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बेहद करीबी माने जाते थे और लंबे समय तक उनके मुख्य सचिव के रूप में कार्य कर चुके हैं. उनके पास उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग का भी अतिरिक्त प्रभार था. उन पर मुख्य रूप से तीन बड़े आरोप हैं.

1. झारखंड शराब घोटाला: आरोप है कि 2022 में शराब नीति बदलकर छत्तीसगढ़ के शराब सिंडिकेट को फायदा पहुंचाया गया, जिससे राज्य के खजाने को करीब 129 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ.
2. हजारीबाग जमीन घोटाला: हजारीबाग के डीसी रहने के दौरान उन्होंने वन भूमि और सरकारी जमीन के फर्जी दस्तावेजों के जरिए निजी हाथों में बंदरबांट करने में मदद की.

3. आय से अधिक संपत्ति (DA Case): एसीबी की जांच में सामने आया है कि उनकी और उनके परिजनों की चल-अचल संपत्ति उनकी वैध आय से लगभग 53% अधिक है. उनकी आय करीब 2.20 करोड़ रुपये आंकी गई थी, जबकि लेन-देन 3.47 करोड़ से अधिक पाया गया.
छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु तक क्यों पहुंचा जांच का दायरा?
झारखंड शराब घोटाले के तार अंतरराज्यीय स्तर पर जुड़े हुए हैं. इस मामले में जांच का दायरा मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ इसलिए पहुंचा क्योंकि झारखंड की नई आबकारी नीति हुबहू छत्तीसगढ़ के मॉडल पर आधारित थी. छत्तीसगढ़ के कथित शराब घोटाले के मास्टरमाइंड अनवर ढेबर, रिटायर्ड आईएएस अनिल टुटेजा और अरुणपति त्रिपाठी ने रांची आकर विनय चौबे और अन्य अधिकारियों के साथ गुप्त बैठकें की थीं. छत्तीसगढ़ की प्लेसमेंट एजेंसियों को झारखंड में ठेके दिए गए थे.

तमिलनाडु क्यों पहुंची जांच?
वहीं, तमिलनाडु का कनेक्शन इस घोटाले में परामर्शदाता और सप्लाई चेन से जुड़ा बताया जा रहा है. झारखंड सरकार ने आबकारी नीति बनाने के लिए जिस विशेषज्ञ एजेंसी की मदद ली थी, उसके तार दक्षिण भारतीय राज्यों के शराब मॉडल से जुड़े थे. इसके अलावा, जांच एजेंसियों को शक है कि घोटाले की बड़ी रकम शेल कंपनियों के जरिए तमिलनाडु और अन्य दक्षिण भारतीय राज्यों के रियल एस्टेट सेक्टर में खपाई गई है. हाल ही में दिल्ली के रियल एस्टेट कारोबारी सरदार सुरेंद्र सिंह की गिरफ्तारी ने भी इस बात की पुष्टि की है कि काले धन का निवेश झारखंड से बाहर बड़े स्तर पर किया गया है.

चौबे किस जेल में बंद हैं?

निलंबित आईएएस विनय चौबे वर्तमान में रांची के होटवार जेल यानी बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार में बंद हैं. उन्हें हाल ही में शराब घोटाले में डिफॉल्ट बेल तो मिल गई थी, लेकिन जमीन घोटाले और आय से अधिक संपत्ति के मामले में वे अब भी सलाखों के पीछे हैं. ऐसे में अब उन पर कई तरह से फिर से शिकंजा कसा जा सकता है. एसीबी ने चौबे की सरहज प्रियंका त्रिवेदी, साले शिपिज त्रिवेदी, पत्नी स्वप्ना संचिता को भी आरोपी बनाया है. अगर क्लिनिक से बरामद दस्तावेजों में मनी ट्रेल साबित होता है, तो उनकी गिरफ्तारी संभव है.

चूंकि यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग से भी जुड़ा है, इसलिए प्रवर्तन निदेशालय जल्द ही इस संपत्ति को कुर्क करने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है. चौबे की अशोक नगर और लालपुर स्थित फ्लैटों सहित उन तमाम संपत्तियों की सूची तैयार की जा रही है जो पिछले 5 वर्षों में चौबे के करीबियों के नाम पर खरीदी गई हैं. चौबे बीटेक के बाद यूपीएससी क्रैक कर आईएएस बने थे. पिछले साल आईएएस विनय कुमार चौबे गिरफ्तार हुए थे.

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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