E20 पेट्रोल  पर फिर छिड़ी बहस: 2021 की नीति आयोग रिपोर्ट में SIAM ने क्यों की थी E10 जारी रखने की मांग?

नई दिल्ली: इथेनॉल मिश्रित E20 पेट्रोल को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में सरकार ने E20 से बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने के दावों को खारिज किया है। इसी बीच नीति आयोग की वर्ष 2021 की रिपोर्ट “Roadmap for Ethanol Blending in India: 2020-25” दोबारा चर्चा में आ गई है। रिपोर्ट के एनेक्सचर-डी से पता चलता है कि सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने E20 लागू होने के बाद भी पुराने वाहनों के लिए E10 पेट्रोल को “प्रोटेक्शन ग्रेड फ्यूल” के रूप में उपलब्ध रखने की मांग की थी।
क्या था SIAM का तर्क?
जनवरी 2021 में विशेषज्ञ समिति के साथ हुई बैठक में SIAM ने कहा था कि देश में पहले से चल रहे लाखों वाहन E10 के अनुरूप बनाए गए हैं। ऐसे में E10 को अचानक बंद करने से वाहन मालिकों को परेशानी हो सकती है। संगठन का सुझाव था कि संक्रमण काल (Transition Period) के दौरान E10 और E20 दोनों की आपूर्ति जारी रखी जाए।
पुरानी गाड़ियों को लेकर जताई थीं चिंताएं
SIAM ने कहा था कि मौजूदा वाहनों में E20 के अनुरूप रेट्रो-फिटमेंट करना व्यावहारिक नहीं होगा। देश में बड़ी संख्या में अलग-अलग मॉडल और फ्यूल सिस्टम वाले वाहन हैं, जिनमें बदलाव करना बेहद कठिन और महंगा साबित हो सकता है।
संगठन ने यह भी आशंका जताई थी कि यदि E10 पूरी तरह हटा दिया गया तो कुछ पुराने वाहनों में ईंधन रिसाव, ड्राइवेबिलिटी की समस्या और माइलेज में कमी जैसी दिक्कतें सामने आ सकती हैं।
माइलेज घटने की आशंका
रिपोर्ट में SIAM ने इथेनॉल की कम कैलोरीफिक वैल्यू का हवाला देते हुए E20 से लगभग 6% तक माइलेज घटने की आशंका जताई थी। हालांकि संगठन ने यह भी कहा था कि भविष्य में E20-अनुकूल इंजन और बेहतर कैलिब्रेशन के जरिए इस कमी की भरपाई की जा सकती है।
E12 और E15 के खिलाफ भी दी थी सलाह
SIAM ने E12 और E15 जैसे मध्यवर्ती इथेनॉल मिश्रणों को लागू करने के खिलाफ भी राय दी थी। उसका कहना था कि उस समय बाजार में उपलब्ध अधिकांश वाहन केवल E10 तक के लिए डिजाइन किए गए थे।
संयुक्त परीक्षण में क्या सामने आया?
रिपोर्ट में ARAI, इंडियन ऑयल (IOC) और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोलियम (IIP) के संयुक्त अध्ययन का भी उल्लेख है। परीक्षण में पाया गया कि E20 के इस्तेमाल से कुछ वाहनों में माइलेज 3% से 7% तक कम हो सकता है, लेकिन इंजन के अचानक फेल होने, असामान्य घिसावट या इंजन ऑयल पर किसी गंभीर तकनीकी प्रभाव के प्रमाण नहीं मिले।
किन संस्थाओं ने तैयार किया था रोडमैप?
यह रोडमैप नीति आयोग की अगुवाई में तैयार किया गया था। इसमें पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, इंडियन ऑयल, ARAI, SIAM और अन्य संबंधित हितधारकों ने भाग लिया था।
सरकार का मौजूदा रुख
सरकार का कहना है कि E20 ईंधन को व्यापक वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद लागू किया गया है। अब तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है जिससे यह साबित हो कि E20 पेट्रोल बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने का कारण बन रहा है।
हालांकि, 2021 की नीति आयोग रिपोर्ट यह भी दर्शाती है कि E20 की ओर संक्रमण के दौरान ऑटोमोबाइल उद्योग ने पुराने वाहनों की सुरक्षा और उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए E10 पेट्रोल की उपलब्धता जारी रखने की सिफारिश की थी।

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