Crude Prices: क्या कच्चे तेल में उबाल के बावजूद महंगाई नहीं बढ़ेगी? वित्त मंत्री लोकसभा में क्या बोलीं…

नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच छिड़े सैन्य संघर्ष के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेज उछाल आया है। लेकिन, आम जनता और निवेशकों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को लोकसभा बताया कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई इस तेजी का भारत की महंगाई दर पर फिलहाल कोई असर पड़ेगा, इसकी आशंका नहीं है।

वित्त मंत्री ने बताया कि भारत की महंगाई दर इस समय अपने ‘निचले स्तर’ के बेहद करीब है, जिस वजह से कच्चे तेल के महंगे होने का तुरंत कोई बड़ा झटका नहीं लगेगा।
लगातार गिरती महंगाई: उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) द्वारा मापी गई औसत खुदरा महंगाई दर 2023-24 के 5.4% से घटकर 2024-25 में 4.6% और 2025-26 (अप्रैल-जनवरी) में महज 1.8% पर आ गई है।
आरबीआई के लक्ष्य के करीब: जनवरी 2026 में हेडलाइन महंगाई दर 2.75% थी, जो रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 4% से 2% के टॉलरेंस बैंड के सबसे निचले स्तर के पास है।
ब्याज दरों में राहत: महंगाई को नियंत्रित रखने के लिए आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने फरवरी 2025 से अब तक पॉलिसी रेट में कुल 125 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की है।

सरकार के कदम
सरकार ने महंगाई को काबू में रखने और आम नागरिकों को राहत देने के लिए कई मोर्चों पर काम किया है:
टैक्स में बड़ी छूट: मिडिल क्लास के हाथ में ज्यादा पैसा बचाने के लिए 12 लाख रुपये तक की सालाना आय को इनकम टैक्स से मुक्त कर दिया गया है (नौकरीपेशा लोगों के लिए यह सीमा 12.75 लाख रुपये है)।
सस्ता सामान: वस्तुओं और सेवाओं को उपभोक्ताओं के लिए सस्ता बनाने के लिए वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों में व्यापक कटौती की गई है।
खाद्य सुरक्षा: खाने-पीने की जरूरी चीजों का बफर स्टॉक बढ़ाया गया है, खुले बाजार में अनाज की बिक्री की जा रही है और कमी के दौरान आयात को आसान बनाने व निर्यात पर रोक लगाने जैसे कदम उठाए गए हैं।

अब आगे क्या?
अक्तूबर 2025 की आरबीआई की मौद्रिक नीति रिपोर्ट के अनुसार, अगर कच्चे तेल की कीमतों में अनुमान से 10% की वृद्धि होती है और इसका पूरा बोझ घरेलू बाजार पर डाला जाता है, तो भी महंगाई दर में केवल 30 बेसिस पॉइंट्स (0.30%) की ही बढ़ोतरी होगी। हालांकि, मध्यम अवधि में महंगाई पर पड़ने वाला असली असर एक्सचेंज रेट (रुपये की चाल), वैश्विक मांग-आपूर्ति और मौद्रिक नीतियों जैसे कई अहम कारकों पर निर्भर करेगा। कुल मिलाकर, मजबूत आर्थिक नीतियों के बफर के कारण भारत फिलहाल इस ग्लोबल क्राइसिस से सुरक्षित नजर आ रहा है।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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