Civil Services: आईएएस और आईपीएस पदों पर कितने प्रतिशत इंजीनियर? देखिये पिछले 10 साल की रिपोर्ट…

नई दिल्ली। यूपीएससी सिविल सर्विस में एक ऐसा समय था जब आईएएस और आईपीएस पदों के लिए चयनित छात्रों में आर्ट्स के स्टूडेंट्स का बोलबाला हुआ करता था लेकिन पिछले एक दशक में यह स्थिति तेजी से बदली है और तकनीकी बैकग्राउंड वाले उम्मीवार, खासकर इंजीनियरों का दबदबा अब सिविल सेवाओं में बढ़ता चला जा रहा है। कुछ समय पहले पेश की गई संसदीय समिति की एक रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है।
सिविल सर्विस के बारे में संसदीय रिपोर्ट के आंकड़े:
2011 से 2020 के बीच:
इंजीनियर उम्मीदवारों की हिस्सेदारी 46% से बढ़कर 65% हुई।
मेडिकल उम्मीदवारों की हिस्सेदारी 14% से घटकर 4% रह गई।
आर्ट्स या ह्यूमैनिटीज उम्मीदवारों की हिस्सेदारी 27% से कम होकर 23% हुई।
साल 2017 से 2021 के बीच का डेटा भी संकेत करता है कि लगभग 76% सफल उम्मीदवार तकनीकी और विज्ञान-संबंधी क्षेत्र से आए, जबकि सिर्फ 23.6% ह्यूमैनिटीज से दिखे। इसके अलावा 2009 से 2019 के बीच सिविल सेवा परिणाम में इंजीनियरों की भागीदारी 31% से बढ़कर 63% हो गई जबकि आर्ट्स का हिस्सा 44% से घटकर 24% तक आ गया। अगर मेडिकल और इंजीनयिरिंग फील्ड को साथ जोड़ें तो हाल के सालों में इन उम्मीदवारों का आंकड़ा 70% से भी ज्यादा है।
साल 2011 में CSAT लागू होने के बाद का असर:
इस बदलाव में 2011 में लागू हुई CSAT (Civil Services Aptitude Test) का बड़ा हाथ माना जाता है। इसने गणितीय तर्क और अंग्रेजी कमप्रेहेंशन पर जोर बढ़ा दिया, जो तकनीकी विधाओं यानी इंजीनियरिंग बैकग्राउंड के छात्रों के पक्ष में जाकर आर्ट्स के अभ्यर्थियों को कठिन स्थिति में लाकर खड़ा करता है।
संसदीय समिति की रिपोर्ट भी सिविल सर्विस में चयनित उम्मीदवारों के प्रतिशत में विविधता के क्षरण की चेतावनी देती है कि तकनीकी अधिकारियों की ओर से भरे प्रशासनिक पदों में सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोणों की कमी हो सकती है।





