नई दिल्ली। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के कई रैंकों में पदोन्नति को लेकर ठहराव दिखाई पड़ रहा है। यूपीएससी से सीधी भर्ती के जरिए सीएपीएफ में बतौर सहायक कमांडेंट नियुक्ति पाने वाले अफसरों को 15 साल में भी पहली पदोन्नति नहीं मिल रही। इन बलों में इंस्पेक्टरों की भी यही स्थिति है, लगभग डेढ़ दशक में इन्हें सहायक कमांडेंट का पद नहीं मिल सका। जिन इंस्पेक्टरों का 4800 रुपये का ‘ग्रेड पे’ है और वे उसमें चार साल की सेवा पूरी कर चुके हैं, उन्हें 5400 रुपये का ‘ग्रेड पे’ मिलेगा। इस नियम का पालन नहीं हो रहा। ये मामले शीर्ष अदालत में पहुंचे हैं। इस बीच सीआईएसएफ डीजी ने ‘पदोन्नति में ठहराव’ का तोड़ निकाला है। डीजी प्रवीर रंजन ने अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए 176 इंस्पेक्टरों (एग्जीक्यूटिव) को ‘लोकल रैंक’ देकर ‘सहायक कमांडेंट’ (एग्जीक्यूटिव) बना दिया है।
सूत्रों के मुताबिक, ‘नियम-5’ ऑफ सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स रूल्स, 2001, के तहत सीआईएसएफ डीजी को यह पावर दी गई है कि वे फोर्स की बेहतरी के लिए कमांडेंट स्तर तक ‘लोकल रैंक’ प्रदान कर सकते हैं। हालांकि इसके लिए डीजी को केंद्र सरकार की मंजूरी लेनी होती है। अगर सरकार से लोकल रैंक वाली फाइल को मंजूरी नहीं मिलती तो फिर पदोन्नति का मामला आगे नहीं बढ़ता। खास बात है कि सीआईएसएफ डीजी प्रवीर रंजन ने जिन 176 इंस्पेक्टरों (एग्जीक्यूटिव) को ‘लोकल रैंक’ देकर ‘सहायक कमांडेंट’ (एग्जीक्यूटिव) बनाया है, उनके पास रैंक के हिसाब से पूरे अधिकार रहेंगे। वे एसी पद की सभी शक्तियां इस्तेमाल करेंगे। बता दें कि यह रैंक उसी वक्त तक है, जब तक डीजी चाहेंगे। वे चाहें तो कभी भी उक्त रैंक को वापस भी ले सकते हैं।
वेतन भत्ते और वरिष्ठता का फायदा नहीं मिलेगा
‘लोकल रैंक’ के जरिए ‘सहायक कमांडेंट’ (एग्जीक्यूटिव) बनाए गए सभी अधिकारियों को ‘एसी’ की वर्दी मिलेगी। कामकाज भी एसी वाला ही करेंगे। मुख्य बात है कि इन्हें ‘एसी’ रैंक में अतिरिक्त वेतन भत्ते नहीं मिलेंगे। इतना ही नहीं, ‘लोकल रैंक’ से ‘सहायक कमांडेंट’ बने अफसरों को वरिष्ठता का फायदा नहीं मिलेगा। सूत्रों का कहना है कि सीएपीएफ के इंस्पेक्टरों को 5400 का ‘ग्रेड पे’ दिए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट में है। वे जीत भी चुके हैं। हालांकि अभी तक सभी इंस्पेक्टरों को यह फायदा नहीं मिल सका है। सीआईएसएफ डीजी ने पदोन्नति में आए ठहराव के मद्देनजर ही ‘लोकल रैंक’ देने का निर्णय लिया है।
सीआरपीएफ’ के सैंकड़ों इंस्पेक्टरों को मिली जीत
पिछले दिनों, लंबे समय से अदालत में अपने हितों की लड़ाई सीआरपीएफ इंस्पेक्टरों को दोहरी जीत मिली है। इंस्पेक्टर गजेंद्र सिंह, सुरेश कुमार यादव व अन्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सीआरपीएफ/सरकार की एसएलपी खारिज कर दी है। दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि जिन इंस्पेक्टरों का 4800 रुपये का ‘ग्रेड पे’ है और वे उसमें चार साल की सेवा पूरी कर चुके हैं, उन्हें 5400 रुपये का ‘ग्रेड पे’ मिलेगा। बता दें कि यह ग्रेड ‘पे’ सहायक कमांडेंट का होता है। इसके खिलाफ सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई थी। दूसरा, सीआरपीएफ इंस्पेक्टर सुरेश यादव व अन्य 71 इंस्पेक्टरों ने दिल्ली हाईकोर्ट में अवमानना याचिका लगाई थी। इसमें कहा गया था कि सीआरपीएफ, हाईकोर्ट के फैसले को लागू नहीं कर रही है। इस केस में हाईकोर्ट ने सीआरपीएफ/सरकार को नोटिस जारी कर दिया है। केस की अगली सुनवाई 18 मई को होगी है।
