नई दिल्ली। लंबी बहस और मतभेदों के बीच शुक्रवार को संविधान का 31वां संशोधन बिल लोकसभा में गिर गया। यह बिल महिला आरक्षण कानून में संशोधन लाने के लिए लाया गया था। हालांकि, बिल को पास करने के लिए दो-तिहाई वोट की आवश्यकता होती है। लोकसभा में चर्चा के बाद हुई वोटिंग के दौरान विधेयक के पक्ष में 298 वोट और विरोध में 230 वोट पड़े। ऐसे में आंकड़ा दो तिहाई मतों से बहुत कम रहा।
कुल मिलाकर महिला आरक्षण कानून पास नहीं हो पाया। इसे लेकर राजनीतिक घमासान तेज है। संसद में इस जीत से उत्साहित विपक्ष एक और अहम फैसला लेने की तैयारी कर रहा है। विपक्षी दल CEC के खिलाफ फिर से महाभियोग प्रस्ताव लाने की योजना बना रहे हैं।
कांग्रेस , टीएमसी समेत विपक्षी पार्टियां संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए एक और नोटिस लाने पर विचार कर रही हैं। यह कदम उनके पिछले प्रस्ताव को लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति की ओर से खारिज किए जाने के कुछ ही दिनों बाद उठाया जा रहा है। सूत्रों ने बताया कि INDIA गठबंधन की प्रमुख पार्टियां इस मामले में चर्चा कर रही हैं। माना जा रहा कि एक संभावित मसौदा तैयार करने पर काम भी कर रही हैं।
विपक्ष की ओर से इस मुद्दे को फिर से उठाने का फैसला इस बात पर आधारित है क्योंकि दोनों सदनों के पीठासीन अधिकारियों ओम बिरला और सी.पी. राधाकृष्णन ने अपने आदेशों में स्पष्ट कारण बताए थे कि नोटिस क्यों खारिज किए जा रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि दोनों पीठासीन अधिकारियों की ओर से बताई गई कमियों को दूर करके नोटिस फिर से जमा किए जा सकते हैं। सूत्रों ने बताया कि बातचीत अभी शुरुआती चरण में है और इसे अंतिम रूप लेने में कुछ समय लगेगा।
