CBI : 5 महीनों में सेनाओं के चार वरिष्ठ अधिकारी जांच के दायरे में

नई दिल्ली। भारतीय सशस्त्र बलों में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई ने पिछले कुछ महीनों में तेज़ी पकड़ी है। ताज़ा मामले में रामिंदर सिंह वधवा के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो ने आय से अधिक संपत्ति रखने का मामला दर्ज किया है। एजेंसी का आरोप है कि 2010 से 2020 के बीच उन्होंने अपनी ज्ञात आय के स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की।
सीबीआई की एफआईआर के अनुसार, इस अवधि में वधवा परिवार की कुल संपत्ति लगभग ₹2.31 करोड़ से बढ़कर ₹6.90 करोड़ तक पहुंच गई। जांच एजेंसी का कहना है कि पत्नी और दो बेटों सहित परिवार की आय-व्यय का विश्लेषण करने के बाद करीब ₹3.18 करोड़ की संपत्ति का संतोषजनक हिसाब नहीं दिया जा सका। इसी आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

कार्यकाल में उन्होंने कई संवेदनशील पदों पर काम किया, जिनमें रणनीतिक बल कमान (SFC), राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और पनडुब्बी डिजाइन समूह जैसे विभाग शामिल रहे।
इसी क्रम में हाल ही में हिमांशु बाली को भी सीबीआई ने गिरफ्तार किया। उन पर रक्षा खरीद में हेराफेरी और ₹50 लाख रिश्वत मांगने का आरोप है। जांच के मुताबिक, Eastern Global Limited के अधिकारियों के साथ मिलकर उन्होंने कथित तौर पर रक्षा निविदाओं को प्रभावित किया, घटिया सामग्री को मंजूरी दी और फर्जी बिल पास किए।
एफआईआर में अक्षत अग्रवाल, उनके पिता मयंक अग्रवाल और अन्य सहयोगियों के नाम भी शामिल हैं। सीबीआई का आरोप है कि रिश्वत की रकम हवाला चैनलों के जरिए दिल्ली-एनसीआर में पहुंचाई जानी थी। मामले की जांच नई दिल्ली, कोलकाता, कानपुर और गुरुग्राम तक फैली हुई है।

इससे पहले दिसंबर 2025 में सीबीआई ने एक अन्य बड़े रक्षा भ्रष्टाचार मामले में दीपक कुमार शर्मा और उनकी पत्नी काजल बाली को गिरफ्तार किया था। तलाशी के दौरान जांच एजेंसी ने दिल्ली और राजस्थान स्थित उनके घरों से कुल ₹2.33 करोड़ नकद बरामद किए थे।
इन कार्रवाइयों को रक्षा खरीद और सैन्य प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में बड़े अभियान के रूप में देखा जा रहा है। लगातार सामने आ रहे मामलों ने यह संकेत दिया है कि जांच एजेंसियां अब रक्षा प्रतिष्ठान के भीतर वित्तीय अनियमितताओं और कथित रिश्वतखोरी पर अधिक आक्रामक रुख अपना रही हैं।

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