Bihar: अंततः नीतीश कुमार की रवानगी… राज्यसभा के लिए किया नामांकन, अमित शाह भी मौजूद

पटना। बिहार की राजनीति में एक बड़े युग का समापन होने जा रहा है। महज 105 दिन पहले 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नीतीश कुमार का बिहार की सत्ता छोड़ना राज्य में पीढ़ीगत बदलाव का अंतिम चरण है। उनके इस फैसले ने न केवल जदयू के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि एनडीए की सबसे बड़ी पार्टी- भाजपा के लिए बिहार की राजनीति के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है।नीतीश कुमार राज्यसभा चुनाव के लिए आज नामांकन दाखिल कर दिया है. सीएम नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा है कि पिछले दो दशक से ज्यादा समय से राज्यसभा जाना चाह रहा हूं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि जो नई सरकार बनेगी, उसे पूरा मार्गदर्शन रहेगा.
इन सबके बीच पटना में भारी बवाल की स्थिति बन गई है. मुख्यमंत्री आवास के बाहर बड़ी संख्या में जेडीयू के कार्यकर्ता जमा हो गए हैं. जेडीयू कार्यकर्ताओं के विरोध का सामना अपनी पार्टी के नेताओं को भी करना पड़ रहा है. जेडीयू एमएलसी संजय गांधी को वहां से भागना पड़ा. वहीं, बीजेपी कोटे से मंत्री सुरेंद्र मेहता की गाड़ी जेडीयू समर्थकों ने रोक दी.

बिहार की सत्ता की बागडोर संभाल सकती है भाजपा
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा के नामांकन की बात कहने के साथ ही यह तय हो गया है कि राज्य में सत्ता परिवर्तन होने जा रहा है। बीते नवंबर राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए को प्रचंड बहुमत के साथ जीत मिली थी। 89 सीटें जीतकर भाजपा विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। इसके बाद भी चुनाव पूर्व किए वादे के मुताबिक, राज्य की बागडोर 85 सीटें जीतने वाले जदयू के नीतीश कुमार के हाथ में आई। नीतीश के सत्ता संभालने के महज 105 दिन बाद यह तय हो गया है कि बिहार में नीतीश राज का अंत होने जा रहा है। इसके साथ ही इस बात की भी संभावना जताई जा रही है कि राज्य में पहली बार भाजपा अपना मुख्यमंत्री बना सकती है। 

हिंदी हार्टलैंड का आखिरी किला फतह करेगी भाजपा
1980 में अपने जन्म के साथ ही भाजपा को हिंदी भाषी राज्यों की पार्टी के रूप में पहचना मिली। बीते साढ़े चार दशक में पार्टी दो लोकसभा सीट से 300 से अधिक सीटें जीतने वाली पार्टी बन चुकी है। एक समय देश के 21 राज्यों में भाजपा और उसके सहयोगियों की सरकार रही। अभी भी पार्टी 20 राज्यों की सत्ता में हिस्सेदार है। इन सबके बावजूद हिंदी हार्टलैंड की पार्टी कही जाने वाली भाजपा देश के दूसरे सबसे बड़े हिंदी भाषी राज्य में अब तक अपना मुख्यमंत्री नहीं बना सकी है। इसके अलावा अन्य हिंदी भाषी राज्यों की बात करें तो यूपी, हरियाणा, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश की सत्ता में भाजपा दो या दो से ज्यादा बार से सत्ता में है। छत्तीसगढ़ और राजस्थान में पार्टी ने पांच साल बाद फिर से सत्ता में वापसी की है। राजधानी दिल्ली में भी 27 साल बाद पार्टी ने सत्ता में वापसी की है। वहीं, हिमाचल प्रदेश, झारखंड में भी पार्टी अपना मुख्यमंत्री बना चुकी है।  बिहार इकलौता हिंदी भाषी राज्य है जहां भाजपा अब तक अपना मुख्यमंत्री बनने का इंतजार कर रही है।

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