Sahara ग्रुप के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर सहित 2 गिरफ्तार, गुपचुप प्रॉपर्टी बेचने और नकदी विदेश भेजने का आरोप, मध्य प्रदेश में भी की रजिस्ट्री

नई दिल्ली। सहारा ग्रुप के चेयरमैन कोर मैनेजमेंट ऑफिस के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर अनिल वैलापरम्पिल अब्राहम और लंबे समय से जुड़े सहयोगी और प्रॉपर्टी डीलर जितेन्द्र प्रसाद वर्मा को प्रवर्तन निदेशालय ने गिरफ्तार कर लिया है. यह गिरफ्तारी PMLA के तहत की गई है. ED की जांच में सामने आया है कि सहारा ग्रुप की कई प्रॉपर्टी डील्स में बड़ी मात्रा में कैश का लेन-देन हुआ था, जिसे छुपाकर बाहर भेजा गया. अनिल अब्राहम इन डील्स को कोऑर्डिनेट और फाइनेंस करने में अहम भूमिका निभा रहा था, जबकि जितेन्द्र वर्मा इन प्रॉपर्टी सौदों को अंजाम देने और कैश रूटिंग में सक्रिय थे.
ईडी ने छापेमारी के दौरान कई अहम डिजिटल और दस्तावेजी सबूत जुटाए हैं, जिनसे ये साबित होता है कि सहारा ग्रुप की प्रॉपर्टी को गुपचुप तरीके से एक-एक करके बेचा जा रहा था और इस बिक्री से आने वाली रकम को विदेश में बैठे ग्रुप प्रमोटर्स तक पहुंचाया जा रहा था.
कोर्ट ने ईडी की हिरासत में भेजा
गिरफ्तार दोनों आरोपियों को 12 जुलाई को कोलकाता की थर्ड चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 जुलाई तक ईडी की हिरासत में भेज दिया गया है. ईडी ने यह जांच ओडिशा, बिहार और राजस्थान पुलिस द्वारा दर्ज की गई तीन एफआईआर के आधार पर शुरू की थी. इन मामलों में आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 120B (षड्यंत्र) के तहत मामला दर्ज हुआ था.
मध्य प्रदेश में भी इस सम्बन्ध में eow ने मामले दर्ज किये हैँ। बताया जाता है कि बीजेपी विधायक संजय पाठक के मामले में अब्राहम ने ही रजिस्ट्री कराई थी।
सहारा ग्रुप से जुड़ी 500 एफआईआर
अब तक सहारा ग्रुप से जुड़ी 500 से ज्यादा एफआईआर दर्ज हो चुकी हैं, जिनमें 300 से ज्यादा मामले PMLA के तहत दर्ज हैं. ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि सहारा ग्रुप की कंपनियां – हमारा इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, स्टार्स मल्टीपर्पस कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, सहारा यूनिवर्सल मल्टीपर्पज सोसाइटी लिमिटेड आदि एक तरह से पोंजी स्कीम चला रही थीं.






