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MP: सीधी में इस बार बीजेपी के लिए टेढ़ी राह, नाराज केदार शुक्ला 2 अक्टूबर को छोड़ सकते हैं पार्टी

सीधी।  मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव के लिए जारी बीजेपी की दूसरी सूची भी कई जगह असंतोष पैदा कर रही है। सीधी में वर्तमान विधायक केदारनाथ शुक्ला का टिकट कटने से वो बेहद नाराज हैं. उनका टिकट सांसद रीति पाठक को दे दिया गया है। उनकी नाराजगी इस कदर है कि वे पार्टी छोड़ सकते हैं। वो अब लगातार अपने कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर और रायशुमारी कर रहे हैं. वो 2 अक्टूबर को बड़ा फैसला ले सकते हैं।

सीधी विधायक केदारनाथ शुक्ला का टिकट काट सीधी सांसद रीति पाठक को प्रत्याशी बना दिए जाने से विधायक केदारनाथ शुक्ला नाराज हैं. वो सीधे सीधे पार्टी नेतृत्व के फैसले में खोट बता रहे हैं. केदारनाथ का कहना है मेरा टिकट काटना एक षड्यंत्र की सफलता है।

सीधी की राह टेढ़ी मेढ़ी 

सीधी विधानसभा सीट का नाम सीधी जरूर है लेकिन यह विधानसभा सीट राजनीतिक दलों और नेताओं लिए हमेशा टेढ़ी-मेढ़ी रही है. 2008 से लगातार BJP से विधायक रहे केदारनाथ शुक्ला का इस दफा टिकट कट गया है. उनकी जगह सीधी सांसद रीति पाठक को इस विधानसभा सीट से BJP ने प्रत्याशी बनाया है. जबकि रीति पाठक सिहावल विधानसभा से तालुका रखती हैं. यह पहला मौका है जब इस विधानसभा सीट से महिला सांसद को विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी बनाया गया है।

केदारनाथ की नाराजगी हार जीत की चाभी?

1990 में निर्दलीय चुनाव जीतने के बाद केदारनाथ शुक्ला ने सीधी विधानसभा क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाई थी. इस विधानसभा सीट के मतदाता राजनीतिक दलों को छोड़ निर्दलीय प्रत्याशी पर इसके पहले भी भी अपना भरोसा जता चुके हैं. ऐसे में केदारनाथ शुक्ला की यह नाराजगी सीधी विधानसभा सीट की हार जीत की चाभी मानी जा रही है. यही वजह है कि सांसद रीती पाठक भी अपने आप को छोटा और सीधी विधायक केदारनाथ शुक्ला को बड़े बुजुर्ग और पिता तुल्य का दर्जा दे रही हैं. मान रही है कि उनके आशीर्वाद से ही सीधी विधानसभा सीट में विजयी होंगी।

षडयंत्र का आरोप

केदारनाथ शुक्ला ने अपनी पीड़ा जाहिर करते हुए कहा सीधी विधानसभा सीट पर एक बड़े षड्यंत्र के जरिए मेरा टिकट काटा गया. अन्य जगह की परिस्थितियों अलग हैं. लोग अपने तौर तरीके से जीत का प्रयास कर रहे हैं लेकिन सीधी में तो बीजेपी स्वयं दूसरों को वॉकओवर दे रही है. पार्टी नेतृत्व ने सीधी में जिस तरीके से टिकट दिया है उसका नतीजा क्या होगा वो भली भांति सभी जानते हैं. पार्टी की इस व्यवस्था में खोट है।

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