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MP: शिवराज के तेवर और फिर उपमुख्यमंत्री का फार्मूला…! बड़े नामों को एडजस्ट करने का होगा प्रयास…

भोपाल। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार का नाम हाई कमान द्वारा तय किया जा चुका है, लेकिन वर्तमान सीएम शिवराज के तेवरों को देखते हुए उप मुख्यमंत्री का फार्मूला निकाला जा रहा है। माना जा रहा है कि जो भी नाम होगा वह पर्यवेक्षक बताएंगे और उस पर सहमति होना तय है। हालांकि ये पहला प्रयोग नहीं होगा। इसके पहले भी ये प्रयोग अपनाया जा चुका है।

प्रदेश के चुनाव में प्रचंड विजय और जनता के समर्थन ने भाजपा को आगामी चुनाव के लिए उत्साहित कर दिया है। आगामी लोकसभा चुनावों को देखते हुए आलाकमान मुख्यमंत्री पद के लिए ऐसे नाम पर सहमत होंगे जो जातिगत समीकरण के साथ जाना पहचाना चेहरा हो। इस बीच शिवराज लगातार एमपी में ही बैठकर हाई कमान को चुनौती देते नजर आ रहे हैं अभिनय वो दिल्ली जाकर पीएम मोदी या अमित शाह, नड्डा, किसी से नही मिले और अपनी नाराजगी भी जाहिर करते आ रहे हैं।

पद के लिए चयन में देरी से जाहिर है की प्रदेश को ढाई दशक बाद उपमुख्यमंत्री मिले। विधानसभा चुनाव में विजयी सांसद और केंद्र में मंत्री रहे नरेंद्र सिंह तोमर, प्रह्लाद पटेल, रीति पाठक और उदयप्रताप सिंह से इस्तीफा ले लिया गया है। अब निश्चय ही उन्हें प्रदेश में कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाएगी। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय भी इंदौर से चुने गए हैं, इन सभी नेताओं के नाम मुख्यमंत्री की दौड़ में हैं।

वीरेंद्र कुमार सकलेचा थे पहले उप मुख्यमंत्री

आलाकमान को इन सभी प्रमुख नेताओं को जिम्मेदारी देना है। माना जा रहा है कि सत्ता संतुलन के लिए इस बार प्रदेश में डिप्टी मुख्यमंत्री के फार्मूले को अपनाया जा सकता है। मध्य प्रदेश गठन के बाद 1957 से राजनीतिक परिदृश्य को देखें तो पता चलता है कि समय-समय पर संतुलन बैठाने के यह प्रयोग प्रदेश में किया गया है। 1967 में प्रदेश में पहली गैरकांग्रेसी संविद सरकार का गठन हुआ, गोविंद नारायण सिंह मुख्यमंत्री बने थे। उस सरकार में सबसे बड़ा सहयोगी दल जनसंघ था। इस सरकार गठन के पूर्व बैठक में जनसंघ के वरिष्ठ नेता दीनदयाल उपाध्याय भोपाल आए थे। जावद से निर्वाचित वीरेंद्र कुमार सकलेचा को उप-मुख्यमंत्री चुना गया था।

1980 में जाति समीकरण साधने किया प्रयोग

1980 में प्रदेश में अर्जुन सिंह मुख्यमंत्री बनाए गए तब यह मांग उठी थी कि आदिवासी नेता को मुख्यमंत्री बनाया जाए। तब मनावर-धार से निर्वाचित शिवभानुसिह सोलंकी का नाम भी मुख्यमंत्री पद के लिए चर्चा में रहा था, परन्तु उन्हें उप-मुख्यमंत्री बनाया गया था। 1993 में दिग्विजय सिंह प्रदेश के मुखिया बने तब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कसरावद, खरगोन से निर्वाचित सुभाष यादव को उप-मुख्यमंत्री बनाया गया था।

1980 में जाति समीकरण साधने किया प्रयोग

1980 में प्रदेश में अर्जुन सिंह मुख्यमंत्री बनाए गए तब यह मांग उठी थी कि आदिवासी नेता को मुख्यमंत्री बनाया जाए। तब मनावर-धार से निर्वाचित शिवभानुसिह सोलंकी का नाम भी मुख्यमंत्री पद के लिए चर्चा में रहा था, परन्तु उन्हें उप-मुख्यमंत्री बनाया गया था। 1993 में दिग्विजय सिंह प्रदेश के मुखिया बने तब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कसरावद, खरगोन से निर्वाचित सुभाष यादव को उप-मुख्यमंत्री बनाया गया था। उनके साथ ही छत्तीसगढ़ से आदिवासी चेहरे के तौर पर प्यारेलाल कंवर को भी उप-मुख्यमंत्री बनाया गया था।

देश की पहली महिला उप मुख्यमंत्री मप्र से

1998 में जब दिग्विजय सिंह की दूसरी पारी आरंभ की तब कुक्षी-धार से निर्वाचित जमुना देवी को उप मुख्यमंत्री बनाया गया था। जमुनादेवी देश की पहली महिला उप-मुख्यमंत्री थीं। मुख्यमंत्री बनने का सौभाग्य 1963 में उत्तरप्रदेश की सुचेता कृपलानी के नाम है। जमुनादेवी को उप-मुख्यमंत्री बनाने के पीछे आदिवासी चेहरे को सामने लाना था।

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