AI का प्रहार: आईटी की 60 लाख नौकरियां खतरे में

भारत का 18 लाख करोड़ रुपये से अधिक (करीब 200 अरब डॉलर) का आईटी सेवाओं का निर्यात बदलाव के बड़े दौर से गुजर रहा है। एक तरफ जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी के कारण 60 लाख कोडिंग नौकरियों पर संकट मंडरा रहा है, वहीं दूसरी ओर टीसीएस जैसी देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी ने राजस्व की परवाह किए बिना एआई अपनाने का कड़ा फैसला लिया है। भारत के आईटी सेक्टर में अभी सबसे बड़ा बदलाव क्या देखने को मिल रहा है?
पिछले 25 वर्षों से सॉफ्टवेयर सर्विस भारत की वैश्विक पहचान रही है, लेकिन अब आने वाला दशक ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टोकन’ का होने वाला है। दरअसल, रूटीन कोडिंग अब एक कमोडिटी बन चुकी है और एआई एल्गोरिदम खुद अपनी प्रोग्रामिंग करने में सक्षम हो गए हैं। अब वैश्विक क्लाइंट्स केवल सिंटैक्स लिखने के लिए प्रोग्रामर्स को पैसे नहीं देंगे, बल्कि वे ‘इंटेलिजेंस ऑडिट’ करने वालों को अधिक महत्व देंगे।
टीसीएस जैसी बड़ी आईटी कंपनी अपने कर्मचारियों को एआई इस्तेमाल करने के लिए क्यों कह रही है?
टीसीएस के सीईओ के. कृतिवासन ने कर्मचारियों से कहा है कि वे काम को तेज और सस्ता बनाने के लिए एआई टूल्स का इस्तेमाल करें, भले ही इससे कंपनी के मौजूदा राजस्व का ही नुकसान क्यों न हो। कंपनी का मानना है कि इस बदलाव का विरोध करने के बजाय इसका फायदा उठाना चाहिए। छोटी प्रतिद्वंद्वी कंपनी विप्रो का भी यही मानना है कि एआई अपनाने से रोजगार कम होने के बजाय नए अवसर पैदा होंगे।
इस एआई क्रांति का शेयर बाजार पर क्या असर पड़ा है?
बाजार में निवेशकों को यह डर सता रहा है कि एआई भारतीय आईटी सेक्टर के पारंपरिक ‘लेबर-हैवी’ (अधिक कर्मचारियों वाले) मॉडल को खत्म कर देगा। इस डर के कारण फरवरी में भारतीय आईटी सेक्टर की मार्केट वैल्यू (बाजार पूंजीकरण) में लगभग 68.6 अरब डॉलर की भारी गिरावट आई है। इतना ही नहीं, निफ्टी आईटी इंडेक्स 21% गिर गया है, जो पिछले 23 वर्षों में इसका सबसे खराब मासिक प्रदर्शन है।

क्या इस बदलाव से भारत की 60 लाख आईटी नौकरियों पर खतरा है?
जवाब: हां, एआई के बढ़ते स्वरूप से कोडिंग से जुड़ी मौजूदा 60 लाख नौकरियों में कमी आना तय है। टीसीएस और इंफोसिस जैसी कंपनियां एआई अपनाकर अपना मुनाफा तो बचा लेंगी, लेकिन वे भविष्य में पहले की तरह बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने वाली नहीं रहेंगी। इससे देश के 37.5 करोड़ युवाओं के भविष्य को लेकर नीति निर्माताओं के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
एआई टोकन हब क्या है और इसमें 19 अरब डॉलर की कमाई कैसे होगी?
जवाब: केंद्र सरकार विदेशी कंपनियों को भारत में एआई इन्फरेंस हब या टोकन कारखाने लगाने के लिए 20 साल की टैक्स छूट दे रही है। पश्चिमी देशों की दिग्गज टेक कंपनियां चीनी विकल्पों से मुकाबले के लिए भारत की सस्ती सौर ऊर्जा का उपयोग कर रही हैं, जिससे भारत एक आकर्षक वर्चुअल बैटरी बन गया है। उदाहरण के लिए, आंध्र प्रदेश ने 15 अरब डॉलर के डेटा-सेंटर के लिए गूगल को 2.4 अरब डॉलर का इंसेंटिव ऑफर किया है। एक अनुमान के मुताबिक, 2030 तक भारत सालाना 12 क्वाड्रिलियन टोकन का उत्पादन करेगा, जिसका 80 प्रतिशत हिस्सा निर्यात करके डेटा सेंटर्स 19 अरब डॉलर (रुपये में करीब 1.74 लाख यानी दो लाख करोड़ रुपये ) का भारी राजस्व प्राप्त कर सकते हैं।

आईटी क्षेत्र पर एआई के असर पर बाजार क्या कह रहा?
जानकारों का कहना है कि कृत्रित बुद्धिमत्ता (एआई) की वजह से आईटी शेयरों में बिकवाली तेजी से बढ़ रही है। अकेले फरवरी के महीने में निफ्टी आईटी शेयरों में 19.13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। जिसकी वजह से आईटी इंडेक्स का मार्केट कैप 6.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक घट गया है। फरवरी का महीना आईटी कंपनियों के लिए सबसे खराब महीने में से एक रहा, क्योंकि नए और अधिक उन्नत एआई उपकरणों, एंथ्रोपिक जैसे स्टार्टअप से आने वाले नए उपकरणों के वजह आईटी कंपनियों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है। जिसकी वजह से निवेशकों ने आईटी शेयरों में बिकवाली करना शुरू कर दिया है। ब्रोकरेज फर्मस के विशेषज्ञों के अनुसार एआई व्यवधान की आंशकाओं के चलते निफ्टी में आईटी शेयरों में 19 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई है। इसी महीने अब निफ्टी में अब तक आईटी इंडेक्स का मार्केट कैप 6.4 लाख करोड़ रुपये से अधिक घट गया है।
आईटी विशेषज्ञों को कौन सी चिंता परेशान कर रही?
बाजार और निवेशकों में यह चिंता पैदा हो गई है कि यदि एआई नई तकनीकों के साथ भारत के लगभग 300 अरब डॉलर के आईटी सेवा उद्योग को परेशानी में डाल सकता है, जो कि श्रम प्रधान है। आईटी विशेषज्ञों का कहना है यदि एआई एप्लीकेशन सेवाओं से होने वाली आय को प्रभावित करना शुरू करता है , जो सामान्य रूप से आईटी कंपनियों के कुल राजस्व का 40 से 70 प्रतिशत हिस्सा है, तो भारतीय आईअी क्षेत्र को और अधिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
एंथ्रोपिक का नया उत्पाद परेशानी कैसे बढ़ा रहा?
सिटिनी रिसर्च की एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी टैरिफ समस्याएं और एच1बी वीजा जैसी समस्याओं को झेलने के बाद आईटी शेयर ने एक बार फिर से नई तरह से बाजार में शुरुआत की थी, लेकिन एंथ्रोपिक के तहत क्लाउड कोवर्क एजेंट के आने और इसके नए उत्पाद पेश होन के बाद आईटी शेयरों में दबाब बढ़ने लगा और यह बिकवाली में बदल गया। जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव के प्रति कंपनियों की संवेदनशीला के बार में कंपनियों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। परिणामस्वरूप निफ्टी आईटी इंडेक्स फरवरी के महीने में 19.13 प्रतिशत गिरा और अपने निचले स्तर पर पहुंच गया। यह नवंबर 2023 के बाद से इसका सबसे निचला स्तर रहा।
आईटी कंपनियों पर एफआईआई के रुख में क्या बदलाव आया?
भारतीय एआई कंपनियों को लेकर बनी चिंताओं की वजह से इस क्षेत्र में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफपीआई) की बिकवाली तेज हो गई है। फरवरी के पहले सप्ताह में 11,000 करोड़ रुपये मूल्य के आईटी शेयरों की बिक्री की गई है।  इस महीने अब तक,निफ्टी IT इंडेक्स का मार्केट कैप 6.4 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा घट गया है।
भविष्य में किस रणनीति की ओर बढ़ने की जरूरत?
भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सरकार को यह शर्त रखनी चाहिए कि विदेशी कंपनियों को दी जाने वाली बिजली के बदले वे पांच प्रतिशत हाई-बैंडविड्थ मेमोरी चिप्स भारत को दें, ताकि 500 विश्वविद्यालयों के लिए नेशनल रिसर्च क्लाउड बनाया जा सके। देश के युवाओं के लिए नए रास्ते खोलने होंगे, ताकि वे सिर्फ कोडर न रहकर स्वायत्त एआई एजेंटों और रोबोट्स की निगरानी करने वाले एआई सुपरवाइजर व मैनेजर बन सकें।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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