Youth MLA Sammelan : हेमंत कटारे बोले-खातों में पैसे डालना महिला सशक्तिकरण नहीं, फ्री बीज स्कीम बंद होनी चाहिए

भोपाल मध्य प्रदेश विधानसभा के उप नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे ने ‘फ्रीबीज’ (मुफ्त की योजनाओं) को लेकर बड़ा बयान दिया है। भोपाल में आयोजित युवा विधायक सम्मेलन में बोलते हुए कटारे ने महिलाओं के खाते में सीधे पैसे डालने वाली योजनाओं का कड़ा विरोध किया। उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि ये योजनाएं ‘विकसित भारत’ के लिए हानिकारक हैं और इन्हें तुरंत प्रभाव से बंद कर देना चाहिए। कटारे ने मंच से अफसरशाही (ब्यूरोक्रेसी) और न्यायपालिका (ज्यूडिशरी) की जवाबदेही तय करने का भी मुद्दा उठाया।
नाराजगी के डर से सच बोलने से घबराएं नहीं
कटारे ने जनप्रतिनिधियों की मौजूदा स्थिति पर तंज कसते हुए कहा, “आज कल जनप्रतिनिधि बहुत कमजोर हो गए हैं। हम कुछ भी बोलने से पहले डरते हैं कि ऐसा बोला तो लोग नाराज हो जाएंगे, वैसा बोला तो महिलाएं नाराज हो जाएंगी, लेकिन अगर हम इस नाराजगी से ही घबराते रहेंगे, तो देश की सेवा कब करेंगे?” उन्होंने खुले मंच से ऐलान किया कि वे आज यहां और आगे बाहर भी यही कहेंगे कि देश में चल रही सभी फ्रीबीज योजनाएं बंद होनी चाहिए।
महिला सशक्तिकरण के नाम पर चल रही योजनाओं पर सवाल खड़े करते हुए कांग्रेस विधायक ने कहा, “हम बोलते हैं कि महिलाओं को सशक्त बना रहे हैं, लेकिन कैसे? आप उनके खाते में ₹10,000 डालकर कह रहे हैं कि वे सशक्त हो रही हैं? मेरा मानना है कि हर महिला के अंदर काबिलियत है, उसकी काबिलियत का उपयोग करके ही उसे असल में सशक्त बनाया जा सकता है। इसी तरह, अगर युवा को सशक्त बनाना है तो उसे रोजगार दीजिए।”
उन्होंने कहा कि किसी महान पुरुष ने कहा है- ‘आवश्यकता ही आविष्कार की जननी है।’ अगर लोगों की आवश्यकताएं बिना काम किए ही पूरी हो जाएंगी और सीधे पैसा मिलने लगेगा, तो वे काम क्यों करेंगे? ऐसे में उनकी योग्यता और स्किल कैसे निखरेगी?
कैश की जगह शिक्षा और इलाज मुफ्त दे सरकार
कटारे ने सरकारों को सुझाव देते हुए कहा, “अगर आपको पैसा देना ही है, तो शिक्षा पर दीजिए। आप कहिए कि आपके पास पैसा नहीं है, हम आपके बेटे को फ्री एजुकेशन देंगे। आप कहिए कि आप गरीब हैं, तो हम फ्री इलाज की व्यवस्था देंगे। सरकार किसी की भी हो, कैश बांटने वाली फ्रीबीज योजनाएं अच्छी नहीं हैं।”
अफसरों और न्यायपालिका की जवाबदेही हो तय
इस दौरान कटारे ने राजस्थान के विधानसभा अध्यक्ष की एक बात का जिक्र करते हुए ‘आंसर एबिलिटी ऑफ ब्यूरोक्रेट्स’ (अफसरशाही की जवाबदेही) का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा, “हमारे देश में ब्यूरोक्रेसी की कोई जवाबदारी नहीं है। वे एक बार नौकरी में आ जाते हैं तो उनके मन में भाव आ जाता है कि 60-62 साल तक मुझे कोई हिला नहीं सकता। वे जनता से मिलें या ना मिलें, काम करें या ना करें, कोई फर्क नहीं पड़ता। उनकी और ज्यूडिशरी की भी जवाबदेही होनी चाहिए। हमारी (नेताओं की) जवाबदेही तो है; अगर हम सही काम करेंगे तो जीतकर आएंगे, नहीं तो 5 साल बाद हार जाएंगे।”

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