Congress: कैंडिडेट लिस्ट देख क्यों भड़क गए राहुल गांधी? खरगे को देर रात बुलानी पड़ी बड़ी बैठक

नई दिल्ली। केरल विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने अपनी दूसरी सूची जारी कर दी है, जिसमें 37 उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं। इसके साथ ही पार्टी अब तक कुल 140 सीटों में से 92 पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी है। इस पूरी चयन प्रक्रिया में कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव के.सी. वेणुगोपाल की स्पष्ट छाप दिखाई दे रही है। पर्दे के पीछे की खबरों की मानें तो टिकटों के बंटवारे को लेकर दिल्ली में भारी कूटनीतिक हलचल रही, जिसमें आधी रात के बाद तक चली बैठकों ने अंतिम सूची का स्वरूप तय किया।
इंडिया टुडे ने अपनी एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से लिखा है, बुधवार रात कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर एक असामान्य बैठक हुई। यह बैठक रात 10:30 बजे शुरू होकर तड़के 2:30 बजे तक चली। इस बैठक के कारणों के बारे में जानने की कोशिश की गई तो पता चला कि राहुल गांधी कांग्रेस की लिस्ट से संतुष्ट नहीं थे। इसके बाद देर रात बैठक बुलाई गई।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी केरल इकाई यूनिट द्वारा दिए गए शुरुआती नामों से असंतुष्ट थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि टिकटों का वितरण केवल राज्य इकाई की सिफारिशों के आधार पर नहीं, बल्कि जातिगत समीकरण, चुनावी प्रदर्शन और जमीनी फीडबैक के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने केंद्रीय चुनाव समिति (CEC) के सामने एक अधिक व्यवस्थित और डेटा आधारित प्रस्तुति की मांग की थी।
केसी वेणुगोपाल कैंप का दबदबा
टिकट वितरण के आंतरिक विश्लेषण से पता चलता है कि पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल का पलड़ा भारी रहा है। पार्टी के भीतर चर्चा है कि घोषित उम्मीदवारों में से लगभग 60 प्रतिशत वेणुगोपाल के करीबी माने जाते हैं। पहली सूची में 55 उम्मीदवारों के नाम थे। इसमें वेणुगोपाल कैंप के 17, रमेश चेन्नीथला खेमे के 9 और वी.डी. सतीशन के 5 समर्थकों को जगह मिली।
शशि थरूर की भूमिका?
वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने इस पूरी प्रक्रिया में एक अलग रुख अपनाया। खबरों के अनुसार, उन्होंने अपने समर्थकों के लिए पैरवी करने के बजाय खुद को इस प्रक्रिया से दूर रखा। पार्टी के 22 मौजूदा विधायकों में से 19 को फिर से मैदान में उतारा गया है, जो निरंतरता और अनुभव के प्रति भरोसे को दर्शाता है।
कांग्रेस की सोशल इंजीनियरिंग
केरल की जटिल जनसांख्यिकी को देखते हुए कांग्रेस ने सोशल इंजीनियरिंग का सहारा लिया है। 92 उम्मीदवारों में से ईसाई 22 हैं। उनमें से 10 उम्मीदवार सिरो-मालाबार समुदाय से आते हैं। नायर समुदाय से 21 कैंडिडेट हैं। यह केरल का प्रभावशाली उच्च जाति समुदाय है। एझावा से 20 को मौका मिला है। यह पिछड़ा वर्ग का एक बड़ा वोट बैंक है। 12 मुस्लिमों को भी कांग्रेस ने उतारा है। इसके अलावा तीन ब्राह्मणों को भी टिकट दिया है। पार्टी ने युवा नेतृत्व को प्राथमिकता दी है, जिसमें 92 में से 52 उम्मीदवार 50 वर्ष से कम आयु के हैं।
सांसदों की मांग खारिज
के. सुधाकरन, अडूर प्रकाश और शफी परम्बिल जैसे कांग्रेस के दिग्गज सांसद विधानसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक थे। हालांकि, आलाकमान ने स्पष्ट शब्दों में उन्हें रोक दिया। राहुल गांधी ने तर्क दिया कि यदि सांसदों को चुनाव लड़ने की अनुमति दी गई, तो इससे कई लोकसभा सीटों पर उप-चुनाव की स्थिति बनेगी। साथ ही इससे मतदाताओं के बीच मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है। हालांकि, पार्टी के भीतर यह संकेत भी दिए गए हैं कि यदि कांग्रेस को बहुमत मिलता है तो मुख्यमंत्री के चयन के समय सांसदों के नामों पर विचार किया जा सकता है।
महिला प्रतिनिधित्व पर उभरा असंतोष
इतनी कवायद के बावजूद, पार्टी को ‘लैंगिक असंतुलन’ के आरोपों का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस प्रवक्ता शमा मोहम्मद ने सार्वजनिक रूप से निराशा व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया (X) पर राहुल गांधी से हस्तक्षेप की अपील करते हुए कहा कि 92 में से केवल 9 महिलाओं को टिकट देना पार्टी की उदासीनता को दर्शाता है।





