MP vidhansabha में मंत्री की टिप्पणी पर हंगामा, नेता प्रतिपक्ष से विजयवर्गीय बोले-औकात में रहो, मंत्री और CM ने मांगी माफी..  

भोपाल। विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के बीच तीखी बहस हुई। चर्चा के दौरान सिंघार ने सरकार और अदाणी के बीच समझौते का मुद्दा उठाया।

जब नेता प्रतिपक्ष अपना संबोधन दे रहे थे और यह कह रहे थे कि अदाणी को बिजली खरीदने के नाम पर अगले 25 साल में 1 लाख से सवा लाख करोड़ रुपए दिए जाएंगे, तब मंत्री विजयवर्गीय ने कहा कि इसका सबूत दें।
इस पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उनके पास सबूत है और वे दिखा देंगे। इसी दौरान दोनों के बीच तनातनी बढ़ गई। बहस शुरू हो गई। बहस के दौरान मंत्री विजयवर्गीय ने नेता प्रतिपक्ष से औकात में रहने को कहा, जिसके बाद सदन में हंगामा और तेज हो गया।

इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से हुई मौतों के मुद्दे पर विधानसभा में जोरदार हंगामा हुआ। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मंत्रियों के इस्तीफे की मांग उठाई। इस पर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि मामला न्यायालय में लंबित है, इसलिए ऐसी चर्चा से न्यायालय की अवमानना की स्थिति बन सकती है।

पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल ने सुझाव दिया कि सदन में बहस के बजाय संबंधित मंत्री से अलग बैठक कर चर्चा करना बेहतर होगा। पूर्व अध्यक्ष सीता शरण शर्मा ने भी कहा कि अदालत में मामला होने से सदन में चर्चा उचित नहीं।
अदाणी का नाम लेने पर मंत्री ने जताई आपत्ति
चर्चा के दौरान सिंघार ने सरकार और अदाणी के बीच समझौते का मुद्दा उठाया। इस पर मंत्री विश्वास सारंग ने आपत्ति जताई और कहा कि जो व्यक्ति सदन में मौजूद नहीं है, उसका नाम नहीं लिया जाना चाहिए। विधानसभा अध्यक्ष ने भी इस परंपरा का पालन करने के निर्देश दिए।

संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष गलत जानकारी दे रहे हैं। इस पर उमंग सिंघार ने कहा कि वह हर बात प्रमाण के साथ करते हैं और जरूरत पड़ने पर प्रमाण दे सकते हैं।
दोनों नेताओं के बीच बहस तेज होने के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक भी खड़े हो गए। सदन में कुछ समय तक हंगामा होता रहा और कार्यवाही प्रभावित हुई।

सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच हंगामे की स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि सत्ता पक्ष के विधायक भी अध्यक्ष की दीर्घा के पास पहुंच गए। हंगामा नहीं रुका तो अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी।

10 मिनट के स्थगन के बाद जब सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर की जगह सभापति अजय बिश्नोई ने कार्यवाही शुरू कराई।
इस पर सत्ता पक्ष के मंत्री, विधायक और विपक्ष के नेताओं ने हंगामा शुरू कर दिया। हंगामा बढ़ने पर सभापति ने सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए फिर से स्थगित कर दी।

सदन की कार्यवाही जब दोबारा शुरू हुई तो कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष को मारने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि एक आदिवासी नेता का अपमान किया गया है और उनकी औकात पर टिप्पणी की गई है। कांग्रेस विधायकों ने कहा कि जब तक संसदीय कार्य मंत्री माफी नहीं मांगेंगे, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। इसके बाद सभापति अजय बिश्नोई ने सदन की कार्यवाही आगे बढ़ाने के बजाय 15 मिनट के लिए फिर से स्थगित कर दी।

विधानसभा अध्यक्ष बोले- दोनों पक्षों को गुस्सा आ गया, यह अच्छा नहीं
40 मिनट के अंतराल के बाद सदन की दोबारा कार्यवाही शुरू हुई तो प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि आज दिन कुछ गरम-गरम सा है।

तोमर ने कहा कि सदन के संचालन के लिए नियम और परंपरा का पालन जरूरी है।
आज दुर्भाग्य से थोड़ी सी असहज स्थिति बन गई है। मध्य प्रदेश विधानसभा की गौरवशाली परंपरा रही है, सदन का गौरव लगातार बढ़ता रहे, इस बात का प्रयत्न सभी पक्षों के सदस्यों को करना चाहिए।
तोमर ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा कहते थे कि सदन में बात करते समय गुस्सा दिखना चाहिए, लेकिन गुस्सा आना नहीं चाहिए। लेकिन आज दोनों पक्षों को गुस्सा आ गया है, यह लोकतंत्र के लिए अच्छा नहीं है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों मजबूत पहिए हैं। सभी से आग्रह करूंगा कि इस विषय का यही पटाक्षेप करें।

मंत्री विजयवर्गीय बोले- अपने व्यवहार से अप्रसन्न, उमंग को प्यार करता हूं
संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मुझे करीब 37 साल का राजनीतिक अनुभव है। आज मैं खुद अपने व्यवहार से प्रसन्न नहीं हूं।जो जवाबदार पद पर बैठते हैं, चाहे विधानसभा अध्यक्ष हों, चाहे मुख्यमंत्री हों, चाहे नेता प्रतिपक्ष हों, अगर वे संसदीय मर्यादाओं का पालन नहीं करेंगे तो बाकी सदस्य कैसे करेंगे।आज पता नहीं कैसे हो गया, नेता प्रतिपक्ष ने मेरी ओर हाथों से इशारा किया, उमंग की बॉडी लैंग्वेज थोड़ा सा अलग थी, मैं उमंग को प्यार करता हूं। मैं अपने व्यवहार से दुखी हूं।
इस पर हेमंत कटारे ने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री को खेद व्यक्त करना चाहिए। कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने कहा कि अब कोई आगे ऐसा ना करे, इस बात का ध्यान रखने की व्यवस्था की जानी चाहिए।
डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री ने दुख व्यक्त किया है, यह पर्याप्त है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस पर कहा कि संसदीय कार्य मंत्री ने पर्याप्त बातें कह दी हैं, लेकिन अगर कुछ ऐसा है तो वह अपनी ओर से सबसे माफी मांग लेते हैं।

सीएम ने कहा- मैं माफी मांगता हूं
सीएम मोहन यादव ने मामले का पटाक्षेप करने का प्रयास करते हुए विजयवर्गीय के वक्तव्य पर कहा- जाने- अनजाने में कोई शब्द निकले हैं तो उसके लिए मैं माफी मांगता हूं।इस पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा मुख्यमंत्री ने जो भाव दिखाया, मैं उसका सम्मान करता हूं। मैं भी चार बार का विधायक हूं, संसदीय शब्दावली का ध्यान रखने की कोशिश करता हूं। मैं कभी अहम में नहीं आता। अगर मेरी ओर से कुछ हुआ है तो मैं भी खेद व्यक्त करता हूं। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष ने पक्ष और विपक्ष दोनों का आभार प्रकट किया और नेता प्रतिपक्ष को राज्यपाल के अभिभाषण पर वक्तव्य देने के लिए कहा।

उमंग सिंघार ने जारी किया बयान

माननीय कैलाश विजयवर्गीय जी, मैं अपनी औकात में हूँ,

मेरी औकात मध्यप्रदेश की 7.5 करोड़ जनता के सवालों को आपकी अहंकारी सत्ता के सामने मुखरता से रखने की है। मेरी इसी औकात ने आपको इतना बौना बना दिया कि आपके अंदर का असली चेहरा बाहर आ गया, मेरी इसी औकात ने आपको भगीरथपुरा पर बहस करने पर मजबूर किया।
ये अपशब्द केवल उमंग सिंघार या किसी एक नेता प्रतिपक्ष के लिए नहीं थे, यह मध्यप्रदेश की 7.5 करोड़ जनता का अपमान है।
जनता को कीड़े-मकोड़े समझने की मानसिकता रखने वाले मंत्री विजयवर्गीय ने असल में अपने अहंकार का परिचय दिया है।
35 परिवार उजड़ गए, लोग बेघर हो गए — और सवाल पूछने पर “औकात में रहो” कहा जाता है?
सत्ता का मद इतना चढ़ गया है कि जनप्रतिनिधि खुद को जनता से ऊपर समझने लगे हैं।
याद रखिए मंत्री जी, लोकतंत्र में असली ताकत जनता है, कुर्सी नहीं।
जिस जनता को आप औकात याद दिलाने की कोशिश कर रहे हैं, वही जनता चुनाव के दिन असली औकात दिखाती है।
मध्यप्रदेश अपमान बर्दाश्त नहीं करेगा।
अहंकार और असंवेदनशीलता से चलने वाली निकम्मी सरकार को जनता लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देना जानती है।
जय मध्यप्रदेश !

Exit mobile version