भोपाल। मध्यप्रदेश की मोहन सरकार 13 दिसंबर को 2 साल पूरे करने जा रही है। इस उपलक्ष्य में भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। यहां उनके साथ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा एवं राजेंद्र शुक्ल, प्रदेश भाजपा मीडिया प्रमुख आशीष अग्रवाल, एसीएस नीरज मंडलोई और जनसंपर्क आयुक्त दीपक सक्सेना मौजूद थे।
मुख्यमंत्री ने जहां दो साल की उपलब्धियां गिनाईं, वहीं भविष्य के कुछ लक्ष्य भी रेखांकित किये। उन्होंने अपने कार्यकाल को विकास और सेवा के दो वर्ष कहा, तो अभ्युदय मध्यप्रदेश का नारा दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था सबसे बड़ी समस्या थी। छत्तीसगढ़ से लगे मध्यप्रदेश के कई इलाके नक्सलवाद से प्रभावित रहे, जहां एक साथ 17-17 पुलिसकर्मियों की हत्या तक कर दी गई। यहां तक कि एक मंत्री को घर से निकालकर थाने के पास कुल्हाड़ी से हत्या कर दी गई थी। उस समय समानांतर थाने, समानांतर कोर्ट और समानांतर सत्ता चलने लगी थी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस संबंध में डेडलाइन तय की, तब सभी को लगा कि यह संभव होगा भी या नहीं। लेकिन कई पुलिस अधिकारी स्वयं आगे आए और बालाघाट में ड्यूटी की मांग की, जिससे नक्सलवाद खत्म करने में बड़ी मदद मिली। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि मंडला, बालाघाट और डिंडोरी में नक्सली समस्या खत्म करना प्रदेश के लिए एक बड़ा उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि हमारे जवानों और आम नागरिकों ने इसकी बड़ी कीमत चुकाई है, मैं उन सभी को सलाम करता हूं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अब जरूरत है कि सिस्टम को इतना मजबूत बनाया जाए कि यह समस्या दोबारा सिर न उठा सके।
शिप्रा में ही स्नान हो, इसलिए बनाई 800 करोड़ की योजना
नदी जोड़ो अभियान पर बोलते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इन परियोजनाओं से प्रदेश में सिंचाई का रकबा तेजी से बढ़ रहा है। परस्पर सौहार्द के तहत राजस्थान और मध्यप्रदेश दोनों राज्यों में पार्वती, कालीसिंध और चंबल नदी का पानी पहुंचने से बड़ी राहत मिलेगी। सीएम यादव ने कहा कि उज्जैन की शिप्रा नदी में दो तरह की चुनौतियां थीं। पिछले सिंहस्थ में साधु-संतों ने गंभीर नदी के पानी से स्नान किया था। स्नान तो हुआ और सिंहस्थ संपन्न हुआ, लेकिन शिप्रा नदी का पानी उपलब्ध नहीं था। इस बार जल संसाधन विभाग ने व्यवस्था कर दी है कि सिंहस्थ में शिप्रा नदी के जल से स्नान हो सके। इसके लिए लगभग 800 करोड़ रुपए की योजना बनाई गई है।
मध्यप्रदेश में एक राज्य के अंदर दो नदियों को जोडऩे का अभियान भी शुरू किया गया है। इसके तहत गंभीर और खान नदी को मिलाने के लिए टनल बनाकर नदी से नदी जोडऩे का काम किया गया है। ऊपर खेती होती है और नीचे नदी की धारा बहती है।
भोपाल में जीआईएस सुविधा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भोपाल में पहले जीआईएस सुविधा उपलब्ध नहीं थी, जिसे उनकी सरकार ने लागू किया। इसके अलावा, सागर में खाद का कारखाना चालू होने से यूरिया और अन्य खाद की आपूर्ति में आसानी होगी। उन्होंने बताया कि सरकार ने न केवल व्यवस्थाएं चलाईं, बल्कि दूरदर्शी सोच के साथ ऐसे प्रोजेक्ट भी पूरे किए जो सामान्यत: लंबा समय लेते।
भोपाल गैस त्रासदी के कचरे का निष्पादन हमने किया
मुख्यमंत्री यादव ने इंदौर की हुकुम चंद मिल का जिक्र करते हुए कहा कि 300 से 400 करोड़ के बकाया में उलझी मिल का निराकरण होने के बाद अब 70 से 80 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट यहां लगने वाला है। उन्होंने कहा कि भोपाल गैस त्रासदी के कचरे का निष्पादन करने का काम उनकी सरकार ने किया है।
प्राइवेट से ज्यादा वेतन देंगे, ताकि एक्सपर्ट सरकारी सेवा में आएं
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्वास्थ्य क्षेत्र में बढ़ती डॉक्टरों की कमी को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि, तेज गति से मेडिकल कॉलेज खुल रहे हैं तो हमको उसके हिसाब से मैनपॉवर भी चाहिए। हेल्थ सेक्टर में एक्सपर्ट नहीं मिलने की चुनौती तो है, लेकिन हमने तय किया है कि हम प्राइवेट सेक्टर से ज्यादा वेतन देकर एक्सपर्ट डॉक्टरों को सरकारी सेवाओं में आगे लाएंगे।
सर्वाधिक निवेश वाला तीसरा राज्य
डा. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में औद्योगिक वातावरण बनाने के लिए हमने नये प्रयोग किये। भोपाल में पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर की इन्वेस्टर्स मीट आयोजित की। इसके अलावा ग्वालियर, जबलपुर, सागर, नर्मदापुरम जैसे शहरों में भी निवेशक सम्मेलन आयोजित किए। एमओयू साइन करने के साथ जमीनों का आवंटन भी कर दिया। कुल 8.57 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव तो धरातल पर आ गए हैं। मप्र सर्वाधिक निवेश वाला तीसरा राज्य बन गया है।
पहली बार दो साल की समीक्षा और तीन साल का लक्ष्य
डा. मोहन यादव ने कहा कि उन्होंने विभागीय समीक्षाओं में भी नवाचार लागू किया है। प्रदेश में पहली बार ऐसा हुआ कि दो साल की समीक्षा हमने की है। साथ ही आगे के तीन सालों के लिए हमने लक्ष्य निर्धारित किए हैं। इससे 5 साल का लघु चित्र सामने आ जाता है।
शिक्षा-स्वास्थ्य का नया दौर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में नया दौर शुरू हुआ है। हमारा लक्ष्य हर जिले में एक मेडिकल कालेज खोलने का है। लोगों से कहा गया है कि वे कालेज खोलें दस साल तक के लिए हम जिला अस्पताल उन्हें दे देंगे, जहां वे प्रेक्टिकल कर सकेंगे। कालेजों में शोध, अनुसंधान के साथ ही रोजगार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कैम्पस में ही आईटी पार्क खोले जा रहे हैं।
मेट्रोपालिटन शहरों का विकास
डा. यादव ने कहा कि उन्होंने भोपाल और इंदौर-उज्जैन के लिए मेट्रोपालिटन क्षेत्र विकसित करने की योजना बनाई है। शहर का विकास शहर के अंदर ही क्यों हो, बाहर भी होना चाहिए। इन दोनों योजनाओं से एक दर्जन से अधिक शहरों का विकास होगा। जमीनों के नामांतरण की ई नामांतरण योजना लागू कर दी गई है। अभी तक एक करोड़ मामलों का निष्पादन हो चुका है।
कृषि और दुग्ध उत्पादन का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ ही फसलों की प्रोसेसिंग भी यहीं पर हो, किसानों को उचित दाम मिलें, इसके लिए सरकार काम कर रही है। गोशालाओं का आकार बढ़ाया है, सडक़ों पर गोमाताओं की संख्या कम हुई है, पूरी तरह खत्म करने का लक्ष्य है। दुग्ध उत्पादन 9 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है।
डिप्टी सीएम बोले- विकास और विरासत दोनों पर ध्यान
कॉन्फ्रेंस की शुरुआत में डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार का दो साल का कार्यकाल पूरा हो गया है। मुख्यमंत्री दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ मध्यप्रदेश को विकास के रास्ते पर ले जा रहे हैं। इन दो वर्षों में विकास और विरासत दोनों पर विशेष ध्यान दिया गया है।
अच्छे शासन, पारदर्शिता और त्वरित निर्णयों के दो साल: खंडेलवाल
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि विकास और सेवा के ये दो वर्ष अच्छे शासन, पारदर्शिता और त्वरित निर्णयों के लिए जाने जाते हैं। त्वरित कार्यवाही से भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के विभिन्न जिलों में कैबिनेट बैठकें आयोजित करके क्षेत्रीय विकास को प्राथमिकता दी है।
कार्यक्रम में डा. मोहन यादव का अभ्युदय मध्यप्रदेश, विकास और सेवा के दो वर्ष’, नई राहें नए अवसर एवं जिलों की विकास यात्रा पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।
मध्यप्रदेश की मोहन सरकार के दो साल..
कानून की सरकार…. न समानांतर थाने और न समानांतर अदालत: मोहन यादव
