सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर राहत शिविरों की स्थितियों पर जस्टिस गीता मित्तल समिति से रिपोर्ट मांगी

नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति से मणिपुर में जातीय हिंसा से विस्थापित हुए लोगों के लिए बनाए गए 14 राहत शिविरों में सुविधाओं की कमियों के मुद्दे पर एक रिपोर्ट सौंपने को कहा।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) सूर्यकांत, जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच मणिपुर हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मणिपुर के चुराचांदपुर में 14 राहत शिविरों की रहने की स्थितियों की जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया गया।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने बेंच को बताया कि हाईकोर्ट ने जनहित याचिका में दखल देने से इनकार कर दिया, क्योंकि यह मामला पहले ही सुप्रीम कोर्ट के पास है।

वकील ने आगे कहा कि जस्टिस गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली 3-सदस्यीय समिति विभिन्न पहलुओं पर जांच कर रही है और कोर्ट को रिपोर्ट सौंप रही है, लेकिन यह रिपोर्ट नई दिल्ली में दी जा रही है और समिति के लिए जमीनी हकीकत तक “आसान पहुंच नहीं है”।

वकील ने आगे कहा कि याचिकाकर्ता सिर्फ सीमित राहत के लिए संपर्क कर रहे थे कि “हाईकोर्ट, समिति के निर्देशों के दायरे में यह जांच कर सकता है कि रहने की स्थितियां निर्देशों के अनुसार हैं या नहीं।”

मणिपुर राज्य की ओर से पेश ASG ऐश्वर्या भट्टी ने बताया कि समिति को पहले ही ज्ञापन सौंप दिए गए और समिति इस पहलू पर विचार कर रही है।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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