Ghotala : मुआवजा घोटाले में फंसे IAS अफसरों के साथ पत्नी और बच्चों की संपत्ति की भी जांच शुरू, एक्शन में एसआईटी

नई दिल्ली। नोएडा अथॉरिटी में 117 करोड़ से अधिक के मुआवजा घोटाले में फंसे अफसरों की संपत्तियों की जांच एसआईटी ने शुरू कर दी है। एसआईटी ने प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरणों व जिलों के अधिकारियों से इन अफसरों और उनके परिजनों की संपत्तियों का विवरण तलब किया है। एसआईटी सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर घोटाले की जांच कर रही है। जांच के दायरे में दो आईएएस अफसरों सहित 12 बड़े अधिकारी, उनके पत्नी, बेटे-बेटियां और करीबी रिश्तेदार आ गए हैं। अब तक मुआवजा वितरण में हुए घोटाले तक सीमित रही जांच को एसआईटी ने और व्यापक कर दिया है। पुलिस महानिदेशक, कारागार प्रशासन की अध्यक्षता में गठित एसआईटी ने साफ कर दिया है कि अब सवाल सिर्फ गलत मुआवजे का नहीं, बल्कि आय से अधिक संपत्ति का है।

एसआईटी के एसपी संजीव कुमार बाजपेई ने 2 जनवरी को प्रदेश के सभी विकास प्राधिकरणों, जिलों के अधिकारियों को पत्र भेजकर निर्देश दिया है कि 1 जनवरी 2015 से 31 दिसंबर 2017 के बीच खरीदी गई आवासीय, व्यावसायिक संपत्तियों, भूखंडों, फ्लैट, दुकानों समेत हर तरह के दस्तावेज तत्काल उपलब्ध कराए जाएं। नोएडा अथारिटी में किसानों को मुआवजा देने के नाम पर घोटाला हुआ था। किसानों के नाम पर यह मुआबजे की रकम कई गुना ज्यादा निकाली गयी थी।

लखनऊ विकास प्राधिकरण भी राडार पर, पूर्व सीईओ एलडीए में भी रहे हैं तैनात
एसआईटी का पत्र मिलते ही लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) में हड़कंप मच गया है। फाइलें खंगाली जा रही हैं, पुराने रिकॉर्ड निकाले जा रहे हैं, क्योंकि घोटाले के आरोपी कुछ अधिकारी एलडीए में भी तैनात रह चुके हैं। नोएडा अथॉरिटी में तैनात रहे आईएएस अफसर अटल कुमार राय, जो लखनऊ विकास प्राधिकरण में भी सेवाएं दे चुके हैं, भी जांच के घेरे में हैं। एसआईटी ने उनकी पत्नी, पुत्र और पुत्री के नाम दर्ज संपत्तियों का पूरा ब्योरा मांगा है।

पूर्व सीईओ रमा रमन पर शिकंजा कसना शुरू
नोएडा अथॉरिटी के पूर्व सीईओ रमा रमन के खिलाफ भी आय से अधिक संपत्ति की जांच औपचारिक रूप से शुरू हो चुकी है। एसआईटी ने उनकी और उनके परिवार की संपत्तियों की जानकारी मांगी है। रमा रमन के साथ-साथ उनकी पत्नी, पुत्र और पुत्री के नाम दर्ज हर संपत्ति की जांच की जा रही है।

सीईओ, विधि अधिकारी व अन्य अफसरों और परिजनों की भी संपत्तियां खंगाली जा रहीं
एसआईटी ने तत्कालीन विधि अधिकारी राजेश कुमार, उनकी पत्नी आशा रानी, पुत्री कृतिका राय, पुत्र देवेश राय के नाम संपत्तियों का ब्योरा मांगा है। इसके अलावा वीरेंद्र सिंह नागर, उनकी पत्नी, पुत्र,पुत्रियों , विनोद कुमार पवार (राजनगर, गाजियाबाद), दिनेश कुमार सिंह, उनकी पत्नी कुसुम लता सिंह, पुत्र अभिषेक कुमार, एस. एन. श्रीवास्तव, उनकी पत्नी सुप्रिया, पुत्री सुरभि, मदनलाल मीणा और उनके पूरे परिवार, आलोक कुमार टंडन, उनकी पत्नी रीना, पुत्र अनन्या, पुत्री सौम्या, राजेश प्रकाश, महेंद्र कुमार भंडारी और उनके परिवार, साथ ही तत्कालीन मुख्य विधि सलाहकार विद्या प्रकाश के परिजनों की संपत्तियों की भी बारीकी से जांच हो रही है।

सभी प्राधिकरण और गृह जनपद भी खंगाले जा रहे
एसआईटी ने स्पष्ट किया है कि सिर्फ विकास प्राधिकरण ही नहीं, बल्कि इन अधिकारियों के गृह जनपदों से भी संपत्तियों का पूरा विवरण जुटाया जा रहा है। आदेश में कहा गया है कि सभी पंजीकृत संपत्तियों के प्रमाणित दस्तावेज, रजिस्ट्री, एग्रीमेंट और रिकॉर्ड प्राथमिकता के आधार पर एसआईटी की ई-मेल आईडी पर भेजे जाएं, क्योंकि मामला सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से जुड़ा है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से तेज हुई कार्रवाई
सुप्रीम कोर्ट ने 13 अगस्त 2025 को एसआईटी गठित कर नोएडा मुआवजा घोटाले की जांच का आदेश दिया था। अब एसआईटी ने अपना दायरा बढ़ाकर घोटाले से कमाई गई कथित अवैध संपत्तियों तक जांच पहुंचा दी है। कुछ आरोपी अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, एक का निधन हो चुका है, जबकि कुछ आज भी अहम पदों पर तैनात हैं।

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