Shaurya Yatra : राजा हिरदेशाह लोधी ने 1857 की क्रांति से पहले आजादी के लिए 1842 में फूंका था क्रांति का बिगुल
राजा हिरदेशाह के संघर्ष और शौर्य को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा: यादव

भोपाल। 1857 की क्रांति से पहले आजादी के लिए 1842 में क्रांति का बिगुल फूंकने वाले राजा हिरदेशाह की पुण्य तिथि पर आज भोपाल में शौर्य यात्रा का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को ये पता चला कि आजादी के लिए क्रांति का पहला बिगुल 1857 में नहीं, अपितु 1842 में फूंका गया था और इसके सूत्रधार थे राजा हिरदेशाह। शौर्य यात्रा में हजारों लोगों ने उस महानायक की गाथा सुनी।

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कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, जनजातीय कार्य मंत्री कुंवर विजय शाह, सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते, सांसद दर्शन सिंह चौधरी तथा राजा हिरदेशाह लोधी और गोंड राजा नरवर शाह के वंशज के अलावा प्रदेश के पर्यटन संस्कृति मंत्री धर्मेंद्र लोधी, पूर्व मंत्री जालम सिँह पटेल और कई विधायक व जनप्रतिनिधि यहाँ मौजूद रहे।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को नई ऊर्जा दे रहा है। आज राजा हिरदेशाह लोधी की 168वीं पुण्यतिथि पर शौर्य यात्रा के माध्यम से हम, भूले-बिसरे उन नायकों को समाज के सामने ला रहे हैं, जिन्होंने अंग्रेजी साम्राज्यवाद के खिलाफ सबसे पहले संगठित विद्रोह किया। राजा हिरदेशाह को नर्मदा टाइगर के नाम से भी जाना जाता है। वे 1842 की क्रांति के महानायक थे, जिनकी शौर्य गाथा आज भी बुंदेला, लोधी और जनजातीय समाज के नाटकों, लोक गीतों और लाखों-लाख हृदय में जीवित है। उनका जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायी और आदर्श है। समाज के महापुरुषों के संघर्ष को भी याद करने की आवश्यकता है। जो संघर्षों से लड़ना जानता है, समाज उसका अभिनंदन करता है। राज्य शासन राजा हिरदेशाह के संघर्ष और देश की आजादी में उनके योगदान पर शोध कराएगी। इतिहास के गौरवशाली पृष्ठ पुन: खुलने चाहिए। राजा हिरदेशाह के जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को शैक्षणिक पाठ्यक्रम में भी शामिल किया जाएगा। नर्मदा के किनारे हीरापुर में राजा हिरदेशाह के नाम से एक तीर्थ स्थल का निर्माण किया जाएगा।
नर्मदा टाइगर राजा हिरदेशाह पुस्तक का किया विमोचन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 1842 की क्रांति के नायक नर्मदा टाइगर राजा हिरदेशाह पुस्तक का विमोचन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का राजा हिरदेशाह पर शोध और उनके संघर्ष को पाठ्यक्रम में शामिल करने की घोषणा के लिए समाज के प्रतिनिधियों द्वारा अभिवादन किया गया।
नर्मदा के तट से आजादी की क्रांति का पहला बिगुल फूंका गया था

पूज्य दादा गुरु ने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन में पहली क्रांति नर्मदा के तट पर 1842 में शुरू हुई थी, यह तथ्य हम सबको गौरवान्वित करने वाला है। राजा हिरदेशाह ने इसका नेतृत्व किया और अपना बलिदान दिया। इस आयोजन में जहां धैर्य है वहीं धर्म भी है। शौर्य दिवस के अवसर पर हमें सनातन धर्म के मार्ग पर चलते हुए अखंड भारत के निर्माण में योगदान का संकल्प लेना है। राजा हिरदेशाह ने बुंदेलों, जनजातियों और सकल समाज को एकजुट कर राष्ट्र के लिए लड़ने को तैयार किया था। नर्मदा के तट से आजादी की क्रांति का पहला बिगुल फूंका गया था। प्रदेश में रानी अवंतीबाई, वीरांगना दुर्गावती जैसी वीरांगनाओं ने अपने राज्य की रक्षा के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर दिया था।

जीवन एक बार मिलता है, हमें इसे महान कार्यों के लिए समर्पित करना चाहिए
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- जीवन एक बार मिलता है और हमें इसे महान कार्यों के लिए समर्पित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजा हिरदे शाह, जिन्हें नर्मदा पुत्र और नर्मदा टाइगर के रूप में जाना जाता था, उनसे अंग्रेज भी खौफ खाते थे। ऐसे महापुरुषों को याद करना जरूरी है, जिनकी वजह से हम गर्व से सिर उठाकर चलते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजा हिरदे शाह ने बुंदेला-गोंड समाज को एकजुट कर अपनी अलग पहचान बनाई और अंग्रेजों को कड़ी चुनौती दी। इतिहासकारों को इस विषय पर पुनर्विचार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राजा हिरदे शाह के जीवन पर शोध कराया जाएगा। उनके संघर्षमय जीवन को शिक्षा विभाग के माध्यम से पाठ्यक्रम में शामिल करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।डॉ. यादव ने उमा भारती और प्रह्लाद पटेल के संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज को संघर्षों से घबराना नहीं चाहिए।

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धन और पद की चाह नहीं है, लेकिन जीवन में किसी भी प्रकार का कलंक स्वीकार नहीं है -पटेल
प्रह्लाद पटेल ने कहा कि आज सबसे बड़ा सवाल अभिभावकों के सामने यह है कि क्या वे अपने बच्चों पर भरोसा कायम कर पाए हैं और क्या उन्हें यह विश्वास है कि उनके बच्चे हर चुनौती का सामना कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि समाज के लिए यह बेहद अहम प्रश्न है।
उन्होंने नशे के मुद्दे पर कहा कि जीवन में वही बात करनी चाहिए, जिसे स्वयं जिया हो। उन्होंने कहा कि वे अपने जीवन में जितना किया है, उससे ज्यादा कभी नहीं बोलते।
प्रह्लाद पटेल ने कहा कि उन्होंने जीवन में संकल्प लिया है कि संकल्प और संस्कार के साथ जीना और मरना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें धन और पद की चाह नहीं है, लेकिन जीवन में किसी भी प्रकार का कलंक स्वीकार नहीं है।

सवाल यह नहीं कि 1857 की क्रांति बड़ी थी या 1842 की

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प्रहलाद पटेल ने कहा – आज सवाल यह नहीं है कि 1857 की क्रांति बड़ी थी या 1842 की। राजा हिरदेशाह के द्वारा 1842 में आरंभ की गई बुंदेली क्रांति से 1942 भारत छोड़ो आंदोलन तक का कालखंड भारत के ऐतिहासिक आंदोलन में सबसे महत्वपूर्ण 100 वर्ष हैं। राजा हिरदेशाह ने 1842 से 1858 तक लगातार ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष जारी रखा। आज राजा मेहरबान सिंह को भी याद करने का अवसर है, जिन्होंने कभी कोई लड़ाई नहीं हारी। यह आयोजन ऐसे वीरों के बलिदान को याद करने के लिए है। उनके परिवारों का सम्मान करने का दिन है। लोधी समाज सामर्थ्यवान हैं, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए दुश्मनों से लोहा लिया, प्रश्न यह है कि वो पिछड़े कैसे हो गए। समाज के युवाओं को साहसी, सामर्थ्यवान, शिक्षित और संस्कारवान बनने की आवश्यकता है। आज हम सभी राजा हिरदेशाह लोधी के बलिदान को नमन कर रहे हैं।

बैसाखी के सहारे आगे बढ़ना सही नहीं -पटेल
प्रह्लाद पटेल ने कहा कि सीढ़ी ऊपर चढ़ने के काम आ सकती है, लेकिन बैसाखी के सहारे आगे बढ़ना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के बावजूद कार्यक्रम में पहुंचकर लोगों ने न केवल उन्हें, बल्कि उनकी जैसी सोच रखने वाले हजारों-लाखों लोगों के दिलों को ठंडक दी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कार्यक्रम का किसी भी तरह से राजनीतिक उपयोग नहीं होना चाहिए और यह संकल्प उनका पहले भी था और आगे भी रहेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि अगली बार जब हम मिलें तो और अधिक ताकत के साथ मिलें, लेकिन वही शालीनता और संयम बनाए रखें।

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हमारे समाज में लड़ने का माद्दा, लेकिन लोग जल्दी ही ताकत का दुरुपयोग करने के आदी हो जाते
प्रह्लाद पटेल ने कहा कि हमारे समाज में लड़ने का माद्दा है, लेकिन लोग जल्दी ही ताकत का दुरुपयोग करने के आदी हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि समाज की बात करनी है तो उसके सामर्थ्य पर चर्चा होनी चाहिए, न कि कमजोरियों पर।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जिन्होंने सत्ताओं के खिलाफ लड़ाई लड़ी, वे ‘क्रिमिनल कास्ट’ कैसे हो गए। उन्होंने कहा कि हमें आज भी अपराधी बताने वाली बातें इतिहास का हिस्सा बनी हुई हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जिन जातियों का इतिहास लड़ाकू रहा है, उनमें आज कास्ट सर्टिफिकेट लेने की होड़ मची हुई है, जो चिंताजनक है।

युवाओं को नशे के खिलाफ जागरूक करना आवश्यक

लोधी-लोधा समाज के प्रदेशाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक श्री जालम सिंह पटेल ने कहा कि लोधी समाज के गौरव राजा हिरदेशाह ने ब्रिटिश शासन के कानूनों का विरोध करते हुए 1842 की क्रांति का नेतृत्व किया। इस संघर्ष में उनके करीब 12 भाई बलिदान हुए। उनकी पूरी संपत्ति राजसात कर ली गई थी। लोधी एक किसान और योद्धाओं का समाज है। श्री जालम सिंह पटेल ने कहा कि लोधी समाज ने नशे के खिलाफ मुहिम शुरू की है। उन्होंने युवाओं को इस मुहिम में सहयोग करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि नि:स्वार्थ भाव से किया गया कार्य सदैव स्थायी और सभी के लिए हितकर रहता है।

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आजादी की तीसरी लड़ाई समानता के लिए होनी चाहिए


पूर्व सीएम उमा भारती ने कहा कि भारतीय संस्कृति में पेड़, पहाड़ और जीव-जंतुओं तक की पूजा की जाती है। इसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं है। देश ने आजादी के लिए लंबा संघर्ष किया है, लेकिन अब आजादी की तीसरी लड़ाई समानता के अधिकार के लिए लड़ी जानी चाहिए। उमा ने कहा- लोधी समाज की संख्या काफी अधिक है और उनकी भागीदारी से सरकारें बनती हैं। यह समाज सरकार बनाने की ताकत रखता है।

उमा ने कहा- अब मैं आजादी की दूसरी लड़ाई के बारे में बताती हूं। मोदी जी ने 2014 में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, तो एक अमेरिकी अखबार के एडिटर ने लिखा ‘अंग्रेज तो चले गए, लेकिन कुछ ‘काले अंग्रेज’ छोड़ गए।’
हम मॉर्डनाइज हो रहे हैं, लेकिन वेस्टर्नाइज नहीं हो रहे। जनसंघ के बाद जब भाजपा बनी, तो इसे पिछड़ी और विरोधी पार्टी कहा जाता था।
पहली बार ऐसा हुआ, जब एक व्यक्ति ने राम मंदिर के लिए अपनी कुर्सी छोड़ दी। दूसरे ने तिरंगे के लिए अपनी कुर्सी छोड़ दी। इसके बाद एक समुदाय ने इस भ्रम को तोड़ दिया कि भाजपा पिछड़ा विरोधी पार्टी है।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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