MP में फिर खुलेंगे RTO चेक पोस्ट, हाईकोर्ट ने सरकार को 30 दिन में खोलने के दिए आदेश, CM के निर्देश पर हुए थे बंद

जबलपुर। मध्यप्रदेश में आरटीओ चेक पोस्ट फिर से खुलेंगे। हाईकोर्ट जस्टिस विशाल मिश्रा की कोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बड़ा फैसला सुनाया है। राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि 30 दिनों के भीतर सभी चेक पोस्ट शुरू करें। भारी वाहनों की जांच और हादसे रोकने के लिए चेक पोस्ट जरूरी हैं।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद परिवहन मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा- हाईकोर्ट के आदेश का अध्ययन करने के बाद विधि विशेषज्ञों की राय लेकर न्यायालय के आदेश के मुताबिक आगे की कार्रवाई कराई जाएगी।
फैसले के खिलाफ ऊपरी कोर्ट का रुख करेंगे
ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष सीएल मुकाती ने कहा कि अभी 30 दिन का समय है। ऊपरी कोर्ट का रुख करेंगे। इस फैसले को चुनौती देंगे। अपनी बात मजबूती से रखेंगे। एसोसिएशन कोर्ट में सौरभ शर्मा से जुड़े मामले का हवाला देंगे। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के चेक पोस्ट खत्म करने को लिखे गए पत्र को भी आधार बनाएंगे।
उन्होंने कहा- पहले ही केंद्र स्तर पर चेक पोस्ट हटाने की दिशा में कदम उठाए जा चुके हैं, ऐसे में इन्हें फिर से शुरू करना तर्कसंगत नहीं है। राज्य सरकार पहले ही आदेश दे चुकी है कि ओवरलोडिंग की जांच टोल प्लाजा पर की जाएगी। ऐसे में अब चेक पोस्ट दोबारा शुरू करने का औचित्य समझ से परे है।
जुलाई 2024 से बंद किए गए थे चेक पोस्ट
राज्य सरकार ने 30 जून 2024 के बाद प्रदेशभर में आरटीओ चेक पोस्ट बंद कर दिए थे। मुख्यमंत्री मोहन यादव के निर्देश पर 1 जुलाई 2024 से लागू किया गया था। इसके बाद परिवहन विभाग ने जांच व्यवस्था समाप्त कर दी थी, जिससे सड़कों पर निगरानी को लेकर सवाल उठने लगे थे।
चेक पोस्ट शुरू करने 2025 में दायर की गई थी याचिका
चेक पोस्ट इसी फैसले के खिलाफ याचिकाकर्ता रजनीश त्रिपाठी ने 2025 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उन्होंने परिवहन विभाग के अपर मुख्य सचिव मनीष सिंह सहित अन्य अधिकारियों को पक्षकार बनाया।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता जुबिन प्रसाद और भानु प्रकाश ने दलील दी कि चेक पोस्ट बंद होने से ओवरलोडिंग और नियमों के उल्लंघन के मामले बढ़े हैं, जिससे सड़क हादसों का खतरा भी बढ़ गया है।
सरकार का पक्ष और कोर्ट की सख्त टिप्पणी
शासन की ओर से अधिवक्ता अंजली मिश्रा ने अदालत में जवाब पेश किया, लेकिन कोर्ट ने इसे संतोषजनक नहीं माना। जस्टिस विशाल मिश्रा ने टिप्पणी की कि विभागीय अधिकारियों का रवैया कोर्ट के आदेशों और दिए गए निर्देशों की अवहेलना के समान है। कोर्ट ने कहा कि आदेश का पालन करना अनिवार्य है। चाहे विभाग अन्य विकल्प क्यों न अपनाए।
आदेश नहीं माना तो अवमानना
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के 30 दिनों के भीतर सभी चेक पोस्ट दोबारा शुरू किए जाएं। अगर इस अवधि में आदेश का पालन नहीं किया गया, तो याचिकाकर्ता अवमानना याचिका दायर कर सकता है।मामले को पुनर्जीवित किया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आदेश की अवहेलना को गंभीरता से लिया जाएगा।





