CGST की घूसखोर डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी की मुश्किलें बढ़ेंगी, कई और अफसरों पर भी CBI की नजर

नई दिल्ली। सीबीआई ने झांसी में केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (सीजीएसटी) में घूसखोरी के मामले में गिरफ्तार डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी (आईआरएस अधिकारी) की मुश्किलें और बढ़ेंगी। भंडारी के साथ ही दो अधीक्षकों अनिल कुमार तिवारी व अजय कुमार शर्मा के घर से बरामद संपत्तियों के दस्तावेजों के आधार पर आगे की छानबीन शुरू की है। सूत्रों का कहना है कि दिल्ली व ग्वालियर में जुटाई गई कुछ बेनामी संपत्तियों को लेकर भी पड़ताल शुरू की गई है। आरोपी अधिकारियों ने नकद में वसूली गई रकम को प्रापर्टी डीलरों व अपने कुछ करीबियों के माध्यम से ठिकाने लगाया था। आरोपी अधिकारियों की कुल संपत्ति का ब्योरा भी जुटाने का प्रयास हो रहा है। शुरुआती छानबीन व पूछताछ में सीजीएसटी के कई अन्य अधिकारियों के नाम भी सामने आए हैं, जिनकी भूमिका को लेकर भी पड़ताल शुरू की गई है।
सीबीआइ को मामले में नामजद आरोपी जय अंबे प्लाईवुड के मालिक लोकेश तोलानी व जय दुर्गा प्लाईवुड के मालिक तेजपाल मंगतानी की भी तलाश है। सीबीआइ ने मामले में 30 दिसंबर को प्रभा भंडारी समेत सात आरोपियों के विरुद्ध नामजद मुकदमा दर्ज किया था। सीबीआई लखनऊ की एंटी करप्शन ब्रांच ने डेढ़ करोड़ रुपये घूसखोरी के इस बड़े मामले में प्रभा भंडारी समेत कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। सीबीआइ ने आरोपियों को 70 लाख रुपये घूस लेते पकड़ा था।
सीबीआइ की जांच में सामने आया था कि 18 दिसंबर को जय दुर्गा हार्डवेयर व जय अंबे प्लाईवुड के ठिकानों पर सीजीएसटी की टीमों ने छापेमारी की थी और इसके बाद कर चोरी में छूट देने के बदले मोटी रकम वसूलने की डील शुरू हुई थी। अधिकारियों ने फर्म संचालकों व उनके वकील नरेश कुमार गुप्ता को अपने घर बुलाकर भी लेनदेन की डील की थी। पूर्व में कुछ अन्य फर्मों के ठिकानों पर की गई छापेमारी को लेकर भी भीतरखाने छानबीन की जा रही है। सीबीआई ने आरोपियों के झांसी, ग्वालियर व दिल्ली स्थित ठिकानों पर छोपमारी के दौरान 90 लाख रुपये नगद, संपत्तियों के कई दस्तावेज, जेवर व चांदी की ईटें बरामद की थीं।





