Indore मामले पर हाईकोर्ट की खरी खरी.. सरकार नए IAS को भेज देती है, शहर को चरागाह समझते हैं और अपना हिस्सा लेने आते हैं…

इंदौर। भागीरथपुरा दूषित पानी कांड को लेकर हाई कोर्ट ने गंभीर टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि इस घटना से दुनियाभर में इंदौर की छवि को नुकसान पहुंचा है। देश का सबसे स्वच्छ शहर दूषित पानी की वजह से चर्चा का विषय बन गया। स्वच्छ पानी नागरिकों का मौलिक अधिकार है। दुखद है कि पूरे शहर में दूषित पानी वितरित हो रहा है। ऐसी घटना की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए सख्त कदम उठाए जाए। कोर्ट ने मुख्य सचिव से कहा है कि वे 15 जनवरी को होने वाली सुनवाई में वर्चुअली उपस्थित होकर बताएं कि पूरे राज्य में पानी में मिलावट को रोकने के लिए राज्य स्तर पर क्या कार्रवाई की जा रही है ताकि दूसरी जगहों पर ऐसी घटनाएं न हों। कोर्ट ने पीने के साफ पानी की सप्लाई तुरंत शुरू करने, दूषित स्रोतों को बंद करने और हेल्थ कैंप और मेडिकल स्क्रीनिंग और मुफ्त इलाज सुनिश्चित करने के आदेश भी दिए हैं।

कोर्ट ने दिए ये आदेश
प्रभावित क्षेत्रों में सरकारी खर्च पर टैंकरों/पैक पानी के ज़रिए सुरक्षित पीने के पानी की तुरंत सप्लाई की जाए
दूषित स्रोतों (खास पाइपलाइन, ओवरहेड टैंक, बोरवेल, नदियां) का इस्तेमाल रोक जाए।
प्रभावितों के लिए हेल्थ कैंप और मेडिकल स्क्रीनिंग आयोजित किए जाएं।
पीड़ितों को अस्पताल में निश्शुल्क उपचार उपलब्ध करवाया जाए।
निगम अलग-अलग क्षेत्रों में एनएबीएल से मान्यता प्राप्त लैबोरेटरी से जांच करवाए।

पाइप लाइन बदलना/मरम्मत करना (विशेषकर जहां सीवर लाइनें और पानी की लाइनें समानांतर चलती हैं)।
ऑनलाइन पानी की क्वालिटी की निगरानी के लिए व्यवस्था बनाएं।
क्लोरीनेशन और कीटाणुशोधन प्रोटोकाल का पालन सुनिश्चित करें।
इंदौर के लिए दीर्घ अवधि पानी सुरक्षा योजना तैयार की जाए।
पीने के पानी के लिए नई पाइपलाइन के टेंडर जारी करने से संबंधित फाइलें और 2017-2018 में लिए गए सैंपल के संबंध में प्रदूषण बोर्ड की रिपोर्ट पेश करें।

हाई कोर्ट में कुछ यूं चली सुनवाई
कोर्ट- भागीरथपुरा कांड में कितनी मौत हुई है।
सरकारी वकील – आठ मौत हुई है। शेष मौत कॉर्डियक व अन्य वजह से हुई है। हमने तीन जनवरी को एक कमेटी बनाई है जो सात दिन में रिपोर्ट देगी। इसके बाद आंकड़े अपडेट करेंगे।
कोर्ट – मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 17 मौत हुई है। यह भी प्रकाशित हुआ है कि कई लोग तो पानी पीने के कुछ घंटे बाद ही मर गए। यह गंभीर मामला है।
सरकारी वकील – हमने पांच जनवरी तक की रिपोर्ट पेश की है।
कोर्ट – देश के सबसे स्वच्छ शहर में ऐसा हो रहा दुखद है। देश ही नहीं विदेश तक इंदौर की छवि खराब हुई है। हमें लगता है मुख्य सचिव को इस बारे में उपस्थित होकर जवाब देना चाहिए। पूरे शहर में गंदा पानी वितरित हो रहा है। अब यह मुद्दा एक शहर का नहीं पूरे प्रदेश का है।

याचिकाकर्ता – माय लॉड पूरे शहर में दूषित पानी वितरित हो रहा है। भागीरथपुरा में लाइन बदलने के लिए पांच माह पहले टेंडर हुए थे। अब तक कुछ नहीं हुआ। भागीरथपुरा में आज भी जो पानी वितरित किया जा रहा है वह दूषित है। पीड़ितों को मेडिकल सुविधा नहीं मिल रही है। हाई कोर्ट के रिटायर जज की अध्यक्षता में कमेटी बनाकर मामले की जांच करवाई जाना चाहिए ताकि मौत की वास्तविक संख्या सामने आ सके।
एक अन्य याचिकाकर्ता – मौतें अधिकारियों की लापरवाही की वजह से हुई हैं। भ्रष्टाचार ने जानें ले लीं।
कोर्ट – हमारा पहला लक्ष्य पीड़ितों को समूचित उपचार उपलब्ध कराना है। अगर जरूरत पड़ी तो दोषियों के खिलाफ आपराधिक सिविल दायित्व भी तय किए जाएंगे।

याचिकाकर्ता – सरकार नए आइएएस को इंदौर भेज देती है। वे इसे चारागाह समझकर आते हैं। अपना हिस्सा लेते हैं और चले जाते हैं। महीनों फाइलें अधिकारियों के पास अटकी रहती है। महापौर भी सही कह रहे हैं कि अधिकारी हमारी नहीं सुनते। पार्षद ने खुद दो साल पहले भागीरथपुरा में दूषित पानी का मुद्दा उठाया था, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
एक दिन में नहीं बिगड़ी स्थिति
याचिकाकर्ता की तरफ से सीनियर एडवोकेट अजय बागडिया ने कहा कि स्थिति एक दिन में नहीं बिगड़ी है। सालों से दूषित पानी की शिकायत हो रही थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही। इंदौर में कभी चूहें नवजात के अंग कुतर जाते हैं। कभी गलत दिशा से आकर ट्रक कई लोगों को कुचल देता है। कभी बायपास पर जाम में लोग घंटों फंसे रहते हैं। अब जहरीला पानी पीने से लोग बीमार हो रहे हैं। 17 मौत हो चुकी है। इंदौर की छवि बिगड़ रही है।

मजदूर की मृत्यु हो जाती है तो ठेकेदार पर दर्ज होता है केस
एडवोकेट मनीष यादव ने कहा कि मकान बनाते वक्त अगर मजदूर की मौत हो जाती है तो ठेकेदार पर केस दर्ज हो जाता है। इस मामले में अब तक किसी अधिकारी के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं हुआ। निलंबन और विभागीय जांच से कुछ नहीं होगा। एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें पार्षद टंकी से गाद निकाल रहे हैं। यह स्थिति पूरे इंदौर में है। टंकियों की जांच करवाई जाना चाहिए।

अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए

सुनवाई के दौरान यह बात भी उठी कि अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। भागीरथपुरा में पानी लाइन डालने का 2.38 करोड़ के काम का नवंबर 2022 में प्रस्ताव स्वीकृत हुआ था यह फाइल अपर आयुक्त के पास रूकी रही। टेंडर नहीं खोले और इसके चलते यह हादसा हुआ। हालत यह है कि महापौर पुष्यमित्र भार्गव को कहना पड़ रहा कि अधिकारी सुनते नहीं हैं।
वर्ष 2017-18 में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 60 सैंपल लिए थे। इनमें से 59 फेल हुए थे। इसके बावजूद निगम ने कोई कार्रवाई नहीं की।
शासन मौतों का सही आंकड़ा नहीं बता रहा है। स्थानीय पार्षद कमल वाघेला खुद 15 मौत बोल चुके हैं।
कोरोना बुलेटिन की तरह दूषित पानी कांड की भी जानकारी जारी की जाए।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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