MP : गोयनका केस से खुद अलग हुए जस्टिस पारदीवाला, सुप्रीम कोर्ट में थी सुनवाई, अब नई बेंच करेगी…

भोपाल। सुप्रीम कोर्ट में चल रहे खनन कारोबारी महेंद्र गोयनका के चर्चित मामले में एक बड़ा मोड़ आया है। इस केस की सुनवाई कर रहे जस्टिस जेबी पारदीवाला ने खुद को मामले से अलग कर लिया है। अब नई बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी।
यह पूरा विवाद कंपनी के पैसों की हेराफेरी, चेक बाउंस और दिवालिया प्रक्रिया (IBC) से जुड़ा है। कानूनी जानकारों के मुताबिक, इस केस में मुख्य सवाल यह है कि अगर कोई कंपनी दिवालिया हो जाती है, तो क्या उसके डायरेक्टरों पर चेक बाउंस का आपराधिक केस चलाया जा सकता है? महेंद्र गोयनका की ओर से दायर याचिका में इसी तरह की कानूनी राहत की मांग की गई थी।
संजय पाठक के परिवार की कंपनी के मैनेजमेंट में थे
रायपुर के रहने वाले महेंद्र गोयनका रियल एस्टेट्र माइनिंग कारोबारी हैं। एमपी के विजयराघवगढ़ से बीजेपी विधायक संजय पाठक के परिवार की कंपनी यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजमेंट में अहम पोस्ट पर थे। गोयनका पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी साइन और जाली डॉक्यूमेंट्स के जरिए पाठक परिवार की कंपनी पर कब्जा जमाने की कोशिश की।
अब चीफ जस्टिस तय करेंगे नए जज

खनन से जुड़ा है मामला

दरअसल, सुनवाई के बीच कोर्ट ने पूछा, हूइज मि. गोयनका (गोयनका कौन हैं)। गोयनका के वकीलों ने बताया, यह वह बड़ा गोयनका ग्रुप नहीं है, जो आप समझ रहे हैं। ये दूसरे गोयनका हैं। कोर्ट ने कहा, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। तभी जस्टिस पारदीवाला बोले, मैं अब इस केस को नहीं सुनूंगा। यह कानूनी विवाद मप्र के खनन कारोबारी और विधायक संजय पाठक और रायपुर के खनन कारोबारी महेंद्र गोयनका के बीच ‘निर्मला मिनरल्स’ कंपनी और बहुमूल्य लौह-अयस्क खदानों के मालिकाना हक से जुड़ा है। सितंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने मप्र हाई कोर्ट के उस अंतरिम आदेश पर रोक लगा दी थी, जो गोयनका के पक्ष में था। तब से सुप्रीम कोर्ट इस मामले में स्टे ऑर्डर समेत अन्य अंतरिम अर्जियों पर सुनवाई कर रहा है। कई महीनों से दोनों पक्षों के वकीलों में बहस चल रही है।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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