MP : इंटरएक्टिव पैनल सहित विभिन्न खरीदी हुये भ्रष्टाचार की जांच करायी जाये

कांग्रेस के प्रतिनिधि मंडल ने स्कूल शिक्षा विभाग में हुये भ्रष्टाचार की जांच आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय से कराये जाने की मांग
भोपाल। प्रदेश कांग्रेस के सचिव राजकुमार सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस के पांच सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल ने आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय को एक ज्ञापन सौंपकर लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के माध्यम से स्कूल शिक्षा विभाग में इंटरएक्टिव पैनल सहित विभिन्न खरीद प्रक्रियाओं में कार्टेल आधारित, योजनाबद्ध एवं संगठित भ्रष्टाचार के संबंध में जांच कराकर आवश्यक कार्यवाही करने की मांग की है। प्रतिनिधि मंडल में श्री सिंह के साथ कांग्रेस नेता जितेन्द्र मिश्रा, संतोष सिंह परिहार, प्रशांत गुरूदेव और राहुल बबेले उपस्थित थे।

प्रतिनिधि मंडल द्वारा ज्ञापन के माध्यम से लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) के अंतर्गत स्कूल शिक्षा विभाग में की गई खरीद प्रक्रियाओं में हुई गंभीर अनियमितताओं जिसमें कार्टेल आधारित टेंडर प्रक्रिया, पूर्व निर्धारित कंपनियों को टेंडर अवार्ड, कम दरों की अनदेखी, कंपनियों के मूल्यांकन में पक्षपात, अन्य राज्यों से महंगी खरीदी, खरीदी में विसंगतियां,  योजनाबद्ध तरीके से लूट आदि निम्न बिंदुओं के माध्यम से हुये संगठित भ्रष्टाचार की ओर आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय का ध्यान आकृष्ट कराया गया है।

कांग्रेस के प्रतिनिधि मंडल ने स्कूल शिक्षा विभाग में हुये भ्रष्टाचार की परतों को उखेडते हुये बताया कि क्च्प् द्वारा जारी इंटरएक्टिव पैनल सप्लाई टेंडरों में ऐसी शर्तें रखी गईं, जिनसे खुली प्रतिस्पर्धा समाप्त हो गई और सीमित, पूर्व-निर्धारित कंपनियों को ही लाभ पहुँचा गया है, वहीं पूर्व-निर्धारित कंपनियों को टेंडर अवार्ड के तहत उपलब्ध दस्तावेज़ों से स्पष्ट होता है कि टेंडर प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी तथा चयन पहले से तय कंपनियों के पक्ष में किया, वहीं कम दरों की जानबूझकर अनदेखी कर बाज़ार एवं पोर्टल पर कम दरों पर उपलब्ध सामग्री को नजरअंदाज कर अधिक दरों पर खरीद की गई, जिससे शासन को आर्थिक क्षति पहुंचायी गई है।
प्रतिनिधि मंडल ने मामले को उजागर करते हुये कंपनियों के मूल्यांकन में पक्षपात का आरोप लगाते हुये बताया कि LG एवं Samsung जैसी कंपनियों को योग्य घोषित किया गया, जबकि ACER को अयोग्य ठहराया गया जो न तो नियमसम्मत थे और न ही तार्किककृस्पष्ट उद्देश्य प्रतिस्पर्धा को खत्म करना था।

कांग्रेस नेताओं ने आयुक्त को बताया कि प्रक्रिया में अन्य राज्यों से महंगी खरीदी की गई है। वहीं असम जैसे राज्यों में वही इंटरएक्टिव पैनल कम कीमत, बेहतर वारंटी एवं स्पष्ट स्पेसिफिकेशन के साथ खरीदे गए, जिससे मध्य प्रदेश में की गई महंगी खरीद पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं। जिला स्तर बनाम राज्य स्तर की विसंगति पर सवाल उठाते हुये कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जिला स्तर पर जहाँ इंटरएक्टिव पैनल 90,000 से 1,00,000 रूपये प्रति यूनिट में खरीदे गए, वहीं राज्य स्तर पर सामूहिक खरीद में वही उपकरण 1,14,000 रूपये प्रति यूनिट तक खरीदे गए, जो न्याय संगत नहीं है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वहीं एल-1 आधारित पारदर्शी प्रणाली को समाप्त कर नया “कार्टेल मॉडल” लागू कर 60-40, 50-30-20, 50-50 जैसे मॉडल अपनाए गए, जिनमें पहले से 2-3 कंपनियों का चयन कर लिया गया है और बाद में आपस में बाँट कर कार्य दिया जाता है, जो न्यायोचित नहीं है। भविष्य की योजनाबद्ध लूट की और इंगित करते हुये कहा कि उपलब्ध सूचनाओं एवं दस्तावेज़ों के अनुसार आगामी समय में 800 से 1000 करोड़ रूपये तक के कार्यों की बुकिंग पहले ही कर ली गई है, जो अत्यंत गंभीर विषय है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मध्य प्रदेश की जनता के धन के दुरुपयोग को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जायेगा। इसलिए उपरोक्त तथ्यों के आधार पर आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय से कांग्रेस की मांग है कि लोक शिक्षण संचालनालय से संबंधित सभी टेंडरों, विशेषकर इंटरएक्टिव पैनल खरीद की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जाँच कराई जाए। संबंधित मंत्री, ओएसडी, लोक शिक्षण संचालनालय के अधिकारी, टेंडर समिति के सदस्य, निजी दलाल एवं कंपनियों के कार्टेल की भूमिका की जाँच हो। वहीं सभी खरीद प्रक्रियाओं को पुनः एल-1 आधारित खुली प्रतिस्पर्धा प्रणाली के अंतर्गत लाया जाए। साथ ही दोषी पाए जाने वाल अधिकारियों, कर्मचारियों पर कड़ी कानूनी कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। कार्यवाहीं नहीं होने पर कांग्रेस बड़ा कदम उठाने पर विवश होगी।

Exit mobile version