MP सरकार ने फिर लिया 3,600 करोड़ का कर्ज, 18 और 30 साल में चुकाएगी राशि

भोपाल। मध्यप्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में एक बार फिर बाजार से 3,600 करोड़ रुपये का नया कर्ज लिया है। यह राशि दो अलग-अलग अवधियों के लिए सरकारी प्रतिभूतियां (State Development Loans) जारी कर जुटाई गई है। इस नई उधारी के बाद चालू वित्त वर्ष में राज्य सरकार का कुल नया कर्ज 17,400 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
18 और 30 साल की अवधि के लिए जुटाई राशि
वित्त विभाग की अधिसूचना के अनुसार सरकार ने दो किश्तों में ऋण लिया है।
1,600 करोड़ रुपये का ऋण 18 वर्ष की अवधि के लिए।
2,000 करोड़ रुपये का ऋण 30 वर्ष की अवधि के लिए, जिसकी परिपक्वता वर्ष 2056 में होगी।
दोनों ऋणों पर 7.90% वार्षिक ब्याज देय होगा। ब्याज का भुगतान प्रत्येक वर्ष 15 अप्रैल और 15 अक्टूबर को किया जाएगा।
ई-कुबेर प्लेटफॉर्म पर हुई नीलामी
यह ऋण भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ई-कुबेर (e-Kuber) प्लेटफॉर्म के जरिए सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी के माध्यम से जुटाया गया। नीलामी में संस्थागत निवेशकों के साथ गैर-प्रतिस्पर्धी श्रेणी के पात्र निवेशकों को भी भाग लेने का अवसर दिया गया।
प्रदेश पर कुल कितना कर्ज?
राज्य सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च 2026 तक मध्यप्रदेश पर 4,88,714.17 करोड़ रुपये का कुल ऋण था। इसके बाद चालू वित्त वर्ष में लगातार बाजार से उधारी ली गई है। ताजा 3,600 करोड़ रुपये जोड़ने के बाद प्रदेश की कुल देनदारी करीब 5.05 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गई है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक कुल ऋण में सबसे बड़ा हिस्सा 3,33,278.21 करोड़ रुपये के मार्केट लोन का है। इसके अलावा केंद्र सरकार, वित्तीय संस्थानों, राष्ट्रीय लघु बचत निधि (NSSF) और अन्य स्रोतों से लिए गए ऋण भी इसमें शामिल हैं।
किन परियोजनाओं पर खर्च होगी राशि?
राज्य सरकार का कहना है कि नई उधारी से प्राप्त धनराशि का उपयोग विभिन्न विकास परियोजनाओं में किया जाएगा। इनमें प्रमुख रूप से—सिंचाई परियोजनाएं, कृषि क्षेत्र, ऊर्जा परियोजनाएं, सड़क एवं परिवहन अवसंरचना, पेयजल योजनाएं, संचार सुविधाएं, सहकारी संस्थाओं का विकास अन्य आधारभूत संरचना परियोजनाएं शामिल हैं।
सरकार का पक्ष
सरकार का कहना है कि विकास परियोजनाओं के लिए पूंजीगत निवेश बढ़ाने के उद्देश्य से बाजार से ऋण लिया जाता है। साथ ही सरकार का दावा है कि राज्य की परिसंपत्तियों (Assets) का मूल्य उसकी कुल देनदारियों से अधिक है, इसलिए राज्य की वित्तीय स्थिति संतुलित बनी हुई है।



