भोपाल। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को देश का आम बजट पेश करने वाली हैं, लेकिन इससे पहले राज्यों की उम्मीदों और मांगों का दौर तेज हो गया है। लगभग साढ़े चार लाख करोड़ रुपए के कर्ज के बोझ तले दबी मध्य प्रदेश सरकार ने एक बार फिर केंद्र सरकार के सामने अपनी वित्तीय जरूरतों की एक लंबी सूची रखी है।
इसमें सबसे प्रमुख मांग 2028 में उज्जैन में होने वाले विश्व प्रसिद्ध सिंहस्थ के लिए 20,000 करोड़ रुपए का विशेष पैकेज है। इसके साथ ही राज्य ने अपनी कर्ज लेने की सीमा बढ़ाने और जल जीवन मिशन जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के हजारों करोड़ के बकाया को चुकाने की गुहार भी लगाई है।
राज्य के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर राज्य की जरूरतों का एक विस्तृत ड्राफ्ट सौंपा। यह ड्राफ्ट न केवल राज्य की वित्तीय चुनौतियों को दर्शाता है, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए उसकी विकास योजनाओं की रूपरेखा भी प्रस्तुत करता है।
16वें वित्त आयोग से बंधी उम्मीदें
मध्य प्रदेश की वित्तीय उम्मीदें काफी हद तक 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों पर टिकी हुई हैं। वर्तमान में केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी 7.85% है, जिससे प्रदेश को लगभग 1 लाख 11 हजार करोड़ रुपए मिलते हैं। राज्य सरकार ने अपनी बढ़ती जरूरतों और भौगोलिक विस्तार का हवाला देते हुए इस हिस्सेदारी में 10% बढ़ोतरी की मांग की है। अगर केंद्र इस मांग को स्वीकार करता है तो मध्य प्रदेश को केंद्रीय करों से लगभग 1.22 लाख करोड़ रुपए मिल सकते हैं।
सिंहस्थ की तैयारी: 20 हजार करोड़ की दरकार
2028 में उज्जैन में होने वाला सिंहस्थ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और राज्य के लिए एक बड़ी जिम्मेदारी भी है। इसकी तैयारियों के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र से 20,000 करोड़ रुपए के विशेष पैकेज की मांग की है।
वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा के मुताबिक राज्य सरकार ने उज्जैन और उसके आसपास के क्षेत्रों में सड़कों, घाटों, पुल-पुलिया, अस्पतालों और यात्रियों के लिए ठहरने के स्थलों का निर्माण कार्य पहले ही शुरू कर दिया है। वर्तमान में 20,000 करोड़ रुपए से अधिक के बुनियादी ढांचे के काम स्वीकृत किए जा चुके हैं और वे प्रगति पर हैं।सरकार का तर्क है कि सिंहस्थ में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु आएंगे। उन्हें विश्व स्तरीय सुविधाएं प्रदान करना आवश्यक है।
कर्ज का बढ़ता बोझ और सीमा बढ़ाने की गुहार
मध्य प्रदेश की वित्तीय स्थिति कर्ज के बढ़ते बोझ से जूझ रही है। 1 अप्रैल 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक, यानी केवल 9 महीनों में मोहन सरकार 53,100 करोड़ रुपए का कर्ज ले चुकी है। राज्य पर कुल कर्ज का आंकड़ा साढ़े चार लाख करोड़ रुपए को पार कर चुका है। इस स्थिति के बावजूद सरकार ने केंद्र से कर्ज लेने की सीमा बढ़ाने की मांग की है।
इसके पीछे एक तकनीकी कारण भी है। वित्त मंत्री देवड़ा ने बताया कि 15वें वित्त आयोग की गणना के आधार पर मध्य प्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) 16 लाख 94 हजार करोड़ रुपए है, लेकिन केंद्र सरकार कर्ज की सीमा की गणना के लिए GSDP का आकलन 15 लाख 44 हजार करोड़ रुपए पर कर रही है।
इस अंतर के कारण राज्य अपनी क्षमता के अनुसार कर्ज नहीं ले पा रहा है। बढ़ते कर्ज पर विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने पहले भी स्पष्ट किया था कि यह पैसा पूंजीगत व्यय, यानी सड़कों, बांधों और अन्य बुनियादी ढांचों के निर्माण पर खर्च हो रहा है। उन्होंने इसे “कर्ज नहीं, बल्कि भविष्य के लिए निवेश” बताया था।
केंद्र से योजनाओं का बकाया चुकाने का भी आग्रह
जल जीवन मिशन: इस योजना में केंद्र और राज्य 50-50% की हिस्सेदारी पर काम करते हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र को बताया है कि उसने अपने हिस्से का पैसा खर्च कर दिया है और केंद्र से राशि मिलने की उम्मीद में अपने खजाने से भी अतिरिक्त भुगतान किया है। 2024-25 में केंद्र के हिस्से के 4,370 करोड़ और 2025-26 में 3,750 करोड़ रुपए केंद्र पर बकाया हैं। कुल मिलाकर केंद्र को 8,120 करोड़ रुपए की राशि का भुगतान करना है।
आदिवासी छात्रों की स्कॉलरशिप: इसी तरह जनजातीय छात्र-छात्राओं को दी जाने वाली पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप स्कीम में भी केंद्र पर 2018-19 से लेकर 2024-25 तक 564 करोड़ रुपए बकाया हैं। राज्य सरकार यह स्कॉलरशिप छात्रों को अपने खजाने से दे चुकी है। अब केंद्र से इस राशि के भुगतान का इंतजार कर रही है।
भविष्य की योजनाएं: ग्रीन एनर्जी और स्किल डेवलपमेंट
वित्त मंत्री देवड़ा ने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कौशल विकास, ग्रीन एनर्जी, सोलर एनर्जी, ईवी चार्जिंग स्टेशन और अपशिष्ट प्रबंधन जैसे पर्यावरण-अनुकूल प्रोजेक्ट्स के लिए विशेष प्रोत्साहन (स्पेशल इंसेंटिव) की मांग की है। इसके अलावा कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) को बढ़ावा देने के लिए वाइबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) देने का भी आग्रह किया है, ताकि निजी क्षेत्र को इन परियोजनाओं से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
नई वित्तीय रणनीति: रोलिंग बजट की तैयारी
मप्र सरकार इस बार एक नई वित्तीय रणनीति पर काम कर रही है। 2025-26 का बजट जीरो-बेस्ड बजट होगा, जिसमें हर योजना की नए सिरे से समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही आगामी दो वर्षों के लिए रोलिंग बजट का अनुमान भी तैयार किया जा रहा है।
इसके लिए सभी विभागों से न केवल इस वित्तीय वर्ष, बल्कि आने वाले दो सालों की जरूरतों का भी वित्तीय प्लान मांगा गया है, ताकि संसाधनों का बेहतर प्रबंधन किया जा सके। अब सभी की निगाहें 1 फरवरी को पेश होने वाले आम बजट पर टिकी हैं। यह देखने के लिए कि केंद्र सरकार मध्य प्रदेश की इन महत्वपूर्ण मांगों पर कितनी मेहरबान होती है।
