भोपाल. इंदौर शहर की एक सहकारी संस्था में करोड़ों रुपये के घोटाले का बड़ा मामला सामने आया है। करण गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित, इंदौर के तत्कालीन अध्यक्ष विजय राठी और अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने 3.37 करोड़ रुपये के गबन के आरोप में एफआईआर दर्ज की है।
जांच में सामने आया है कि संस्था की जमीन को सरकारी गाइडलाइन के विपरीत बेहद कम कीमत पर बेचकर न केवल नियमों का उल्लंघन किया गया, बल्कि संस्था और शासन दोनों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया।
जांच के अनुसार, संस्था की भूमि का विक्रय कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार लगभग 3 करोड़ 37 लाख 75 हजार रुपये में होना था। लेकिन तत्कालीन अध्यक्ष विजय राठी ने इसे मात्र 50 लाख रुपये में रामकुंवर बिल्डर्स एंड डेवलपर्स प्रा. लि. को बेच दिया। यह सीधा-सीधा नियमों का उल्लंघन माना गया है।
परिजनों की कंपनी में ट्रांसफर हुई रकम
ईओडब्ल्यू की जांच में यह भी सामने आया है कि जमीन बिक्री से प्राप्त राशि को सीधे संस्था के हित में उपयोग नहीं किया गया। आरोप है कि यह राशि चरणबद्ध तरीके से विजय राठी के परिजनों, खासकर उनकी पत्नी नम्रता राठी से जुड़ी कंपनियों में ट्रांसफर की गई। इसके बाद समय-समय पर नगद निकासी कर राशि का दुरुपयोग किया गया।
संस्था की आम सभा ने 20 मार्च 2005 को यह निर्णय लिया था कि जमीन बेचकर प्राप्त धन से सदस्यों के लिए नई भूमि खरीदी जाएगी। इसी शर्त के साथ 2 मई 2008 को उप-पंजीयक सहकारी संस्था ने अनुमति भी दी थी। लेकिन जांच में पाया गया कि इस शर्त का पालन नहीं किया गया और सदस्यों के हितों को नजरअंदाज किया गया।
ऑडिट में खुला पूरा खेल
वर्ष 2008-09 के ऑडिट में गड़बड़ियों का खुलासा हुआ। रिपोर्ट और अंकेक्षकों के बयान के आधार पर कुल 3,37,75,000 रुपये के गबन की पुष्टि हुई है। जांच में यह भी पाया गया कि रकम के लेन-देन में तेजकरण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. और रामकुंवर बिल्डर्स एंड डेवलपर्स प्रा. लि. जैसी कंपनियों का इस्तेमाल किया गया।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, संस्था की जमीन को निजी कंपनी को बेचना, फिर उसी के जरिए रकम को घुमाकर अंततः गबन करना एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा है। इसमें पदाधिकारियों और संबंधित कंपनियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
इन धाराओं में मामला दर्ज
आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 409 (आपराधिक विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी) और 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत मामला दर्ज किया गया है। ईओडब्ल्यू अब पूरे नेटवर्क और पैसों के ट्रेल की गहराई से जांच कर रही है।
मामले में संस्था, संबंधित कंपनियां और उनके निदेशक, जिनमें विजय राठी, नम्रता राठी, अभय पुराणिक और ज्योति पुराणिक शामिल हैं, को आरोपी बनाया गया है।
MP : इंदौर में 3.37 करोड़ का सहकारी घोटाला, अध्यक्ष समेत पदाधिकारियों पर ईओडब्ल्यू में फिर दर्ज
