MP : यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री पहुंचे मुख्यमंत्री, बोले -कांग्रेस ने यहां लोगों को मरने के लिए छोड़ा, हमारी सरकार पीड़ितों के साथ 

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज राजधानी के जेपी नगर स्थित यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री परिसर का निरीक्षण करने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने गैस राहत से जुड़े अफसरों से भी चर्चा की। सीएम डॉ. यादव ने कहा, पहली बार कोई मुख्यमंत्री फैक्ट्री में आया। पिछले साल जहरीला कचरा हटाया। वहीं, आने वाले समय में कोर्ट के मार्गदर्शन में इस स्थान पर मेमोरियल समेत क्या-क्या कर सकते हैं, इसके सुझाव लेंगे। सभी पक्षों को विश्वास में लेकर इस जगह को बेहतर बनाएंगे। कांग्रेस ने यहां पर लोगों को सिर्फ मरने के लिए छोड़ा था।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि फैक्ट्री के मालिक वारेन एंडरसन को यहां से भगाने के लिए कांग्रेस के लोगों ने ही बड़ी मदद की थी। राहुल गांधी को माफी मांगना चाहिए। उनकी ही जवाबदार दादी और पिता के शासनकाल में यह कलंक, कलंक बना रहा। मनमोहन सिंह की सरकार के दौरान भी यहां के लिए कुछ नहीं किया गया। हम बंद पड़ी फैक्ट्रियों से रोजगार ढूंढ रहे हैं। एक के बाद एक नए काम कर रहे हैं। भोपाल को मेट्रोपॉलियन सिटी बना रहे हैं। जहां रुकावटें हैं, उन्हें हटा रहे हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया से चर्चा में कहा, 2-3 दिसंबर 1984 की रात में यह कलंक कांग्रेस के शासनकाल में लगा था। यहां मौत का तांडव हुआ था। यहां के जहरीले कचरे को कांग्रेस ने 25 साल तक पटककर रखा था। लोगों के लिए इस स्थान को भुतहा बना दिया था। हमारी सरकार ने कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए कचरे का खात्मा किया। सरकार गैस पी?ितों के साथ है। कांग्रेस ने इन्हें लावारिश छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि पहली बार कोई मुख्यमंत्री फैक्ट्री में आया है।
गैस पीडि़त संगठन भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव से मुलाकात करना चाह रहे थे, लेकिन मुलाकात नहीं हो पाई। संगठन की रचना ढिंगरा ने बताया कि 2-3 मुद्दों पर बात करना चाह रहे थे कई महिलाओं को एक हजार रुपए प्रतिमाह पेंशन नहीं मिल रही है। साथ ही गैस पीडि़तों के पुनर्वास, स्वास्थ्य को लेकर बनी राज्य स्तरीय समिति की बैठक पिछले 11 साल से नहीं हुई है। इस संबंध में मुख्यमंत्री से बात करना चाह रहे थे, लेकिन उनसे मुलाकात नहीं हो पाई।
पुलिस ने भी मांगी है जमीन
निरीक्षण के दौरान फैक्ट्री की करीब 85 एकड़ जमीन के उपयोग के संबंध में चर्चा हुई। शुक्रवार को भोपाल जिला प्रशासन, गैस राहत के अफसर जमीन से जुड़ी फाइलों को खंगालते रहे। पुलिस विभाग ने भी डीआरपी लाइन के लिए जमीन मांगी है।
पिछले साल पीथमपुर पहुंचा था 337 टन जहरीला कचरा
यूका फैक्ट्री का 337 मीट्रिक टन जहरीला कचरा 40 साल बाद पिछले साल जनवरी में हटा था। 12 कंटेनर के जरिए हाई सिक्योरिटी के बीच कचरा पीथमपुर ले जाया गया था। यहां लंबे विरोध प्रदर्शन के बाद यह कचरा जलाया गया था, लेकिन फैक्ट्री में अब भी हजारों टन कचरा दफन होने की बात गैस पीडि़त संगठन कर रहे हैं। जिसकी वजह से 42 बस्तियों का भूजल प्रदूषित हुआ है।

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