Mohan Cabinet Meeting : 46.80 लाख लोगों को जमीन की रजिस्ट्री कराकर देगी सरकार, छात्रों को अब सिली-सिलाई ड्रेस मिलेगी

भोपाल। मोहन सरकार ने प्रदेश के 46.80 लाख लोगों को स्वामित्व योजना में पट्टे पर दी गई जमीन की रजिस्ट्री कराकर दस्तावेज देने का फैसला किया है। इस पर सरकार को 3800 करोड़ रुपए का खर्च उठाना पड़ेगा। इस कार्रवाई के बाद रजिस्ट्रीकृत दस्तावेज मिलने से ऐसे परिवार जमीन पर लोन लेने और अन्य सुविधाएं लेने का काम कर सकेंगे।
देश में इस तरह की सुविधा देने वाला एमपी पहला राज्य होगा, जो आबादी की जमीन पर बसे लोगों को रजिस्टर्ड दस्तावेज देने का भी काम करने जा रहा है।
मध्य प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं:
स्वामित्व योजना के तहत संपत्ति अधिकार
केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना के अंतर्गत ड्रोन और सैटेलाइट इमेजिंग के माध्यम से आबादी क्षेत्र की भूमि का सर्वेक्षण किया गया।
प्रदेश के सभी 55 जिलों में लगभग 48.32 लाख निजी संपत्तियों और 19 लाख शासकीय संपत्तियों की पहचान की गई।
राज्य सरकार ने इन संपत्तियों के मालिकों को विधिवत रजिस्ट्री दस्तावेज उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।
रजिस्ट्री के लिए लगने वाला पंजीयन शुल्क और पंचायत उपकर सरकार स्वयं वहन करेगी, जिससे लोगों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं उठाना पड़ेगा।
कक्षा 1 से 8वीं तक के विद्यार्थियों को तैयार ड्रेस
अब तक विद्यार्थियों के खातों में ड्रेस खरीदने के लिए डीबीटी के माध्यम से 600 रुपये भेजे जाते थे।
शिकायतों और व्यवस्था की कमियों को देखते हुए सरकार ने नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है।
अब गारमेंट उद्योग के माध्यम से टेंडर प्रक्रिया द्वारा कपड़ा खरीदा जाएगा और विद्यार्थियों को सिलाकर तैयार दो यूनिफॉर्म उपलब्ध कराई जाएंगी।
सरकार इससे पहले साइकिल वितरण की व्यवस्था में भी बदलाव कर चुकी है।
गेहूं खरीदी पर चर्चा
कैबिनेट को बताया गया कि इस वर्ष देश में सबसे अधिक गेहूं खरीदी मध्य प्रदेश ने की है।
बैठक में खरीदी व्यवस्था और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा भी की गई।
समान नागरिक संहिता (UCC) पर विचार-विमर्श
राज्य में यूसीसी को लेकर चल रही प्रक्रिया की भी समीक्षा की गई।
सरकार के अनुसार, विभिन्न वर्गों और हितधारकों से सुझाव प्राप्त करने का कार्य 30 जुलाई तक पूरा कर लिया जाएगा।
इन निर्णयों का उद्देश्य ग्रामीण संपत्ति अधिकारों को मजबूत करना, स्कूली बच्चों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना तथा प्रशासनिक योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाना है।





