ईरान-अमेरिका जंग से दहला मिडिल ईस्ट, दुबई से 3.5 करोड़ देकर भाग रहे अरबपति, सऊदी अरब बना रास्ता

दुबई/रियाद: अमेरिका और इजरायल की जंग के कारण पूरा मिडिल ईस्ट हिला हुआ है. ईरान लगातार सऊदी अरब और UAE में मिसाइल मार रहा है. ये दोनों ऐसे देश हैं, जहां मिडिल ईस्ट के सबसे आधुनिक शहर हैं. लेकिन हमलों के कारण सबकुछ ठप हो गया है. दुबई,अबू धाबी जैसे एयरपोर्ट्स पर हजारों लोग फंसे हैं. लेकिन इन शहरों में अमीर भरे पड़े हैं और अब वह इस जंग के माहौल से हर हाल में निकलना चाहते हैं. यही कारण है कि दुबई और अबू धाबी एयरपोर्ट पर प्राइवेट जेट्स की मांग अचानक बढ़ गई है. हालात ऐसे हैं कि प्राइवेट जेट की कीमतें रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गई हैं.
न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, खाड़ी से बाहर निकलने के लिए कई लोग 3.5 लाख डॉलर (करीब 3.2 करोड़ रुपये) तक खर्च करने को तैयार हैं. कुछ लोग 10 घंटे की लंबी ड्राइव कर सऊदी अरब पहुंच रहे हैं ताकि वहां से यूरोप या अमेरिका के लिए उड़ान पकड़ सकें. प्राइवेट जेट ब्रोकरेज कंपनी विमाना प्राइवेट के सीईओ अमीर नरन ने कहा, ‘अभी क्षेत्र से बाहर निकलने के लिए सऊदी अरब ही असली विकल्प है.’
सऊदी बना मिडिल ईस्ट छोड़ने का रास्ता
रियाद का किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट इस समय प्रमुख निकास केंद्र बन गया है. दुबई, अबू धाबी, कतर और बहरीन से लोग कारों के काफिलों में रियाद पहुंच रहे हैं. निजी सुरक्षा कंपनियां SUV के जरिए लोगों को दुबई से रियाद तक 10 घंटे की यात्रा करा रही हैं. सऊदी अरब में कई देशों के नागरिकों को आगमन पर वीजा मिल रहा है, जिससे यह रास्ता और आसान हो गया है. ओमान के रास्ते भी अब सुरक्षित नहीं माने जा रहे, क्योंकि वहां भी हमले की खबरें हैं.
अब तक रियाद बड़े पैमाने पर सीधे हमले नहीं हुए हैं. माना जा रहा है कि सऊदी नेतृत्व ने अपनी जमीन या हवाई क्षेत्र को ईरान पर हमले के लिए इस्तेमाल न होने देने का वादा किया है, जिससे वह फिलहाल निशाने से बचा हुआ है. हालांकि सोमवार को खबर आई कि सऊदी अरामको के एक ऑयल प्लांट पर जोरदार हमला हुआ था.
ईरान का युद्ध दुबई के लिए झटका क्यों?
दुबई, जो खुद को सुरक्षित और लग्जरी हब के रूप में पेश करता रहा है, अब सुरक्षा के बड़े सवालों से जूझ रहा है. हालिया हमलों में जेबेल अली पोर्ट, बुर्ज अल अरब, दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट और पाम जुमैरा जैसे बड़े इलाकों को नुकसान पहुंचा. यूएई के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 137 मिसाइलें और 209 ड्रोन दागे गए, जिनमें से अधिकतर को एयर डिफेंस सिस्टम ने रोक लिया. लेकिन कुछ हमलों से आग, अफरा-तफरी और उड़ानों के निलंबन जैसी स्थिति बनी. दुबई में अमेरिकी सैन्य अड्डा नहीं है, इसके बावजूद उसे जवाबी हमलों का सामना करना पड़ा. इससे निवेशकों, पर्यटकों और कारोबारियों के बीच चिंता बढ़ गई है.





