MP: जंगल खत्म करने में भी देश में मप्र नंबर-1, 10 साल में 38,553 हेक्टेयर विकास की भेंट चढ़े, वन भूमि के डायवर्जन में 22% हिस्सा अकेले मप्र का

भोपाल। भारत में सर्वाधिक वन भूमि और वनावरण के लिए विख्यात मप्र की छवि को एक बड़ा झटका लगा है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायर्नमेंट की ओर से जारी हालिया रिपोर्ट (स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायर्नमेंट 2026) के मुताबिक पिछले एक दशक (2014-15 से 2023-24) में भारत में जितनी वन भूमि का डायवर्जन गैर-वानिकी कामों के लिए हुआ है, उसमें सर्वाधिक 22% हिस्सेदारी मप्र की है। बीते एक दशक में मप्र में कुल 38,553 हेक्टेयर जंगल को विकास कार्यों के लिए बलिदान किया गया। इसमें भी 23054 हेक्टेयर वन भूमि का डायवर्जन सिर्फ पिछले 5 साल में हुआ।

देश की बात करें तो एक दशक में कुल 1,73,397 हेक्टेयर वन भूमि का डायवर्जन किया गया है। यह हरियाणा राज्य के कुल वन क्षेत्र (1,61,426 हेक्टेयर) और दिल्ली राज्य (1,48,300 हेक्टेयर) के कुल क्षेत्रफल से भी अधिक है। अकेले वर्ष 2023-24 में लगभग 29,000 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन को मंजूरी दी गई। देश में कुल वन भूमि के डायवर्जन का 49% हिस्सा सिर्फ मप्र, ओडिशा, तेलंगाना और गुजरात का है।

मप्र में वन खत्म होने का असर जैव विविधता पर पड़ रहा है। अब बांधवगढ़, कान्हा, पेंच टाइगर रिजर्व के पास कई बाघ भीतरी जंगल के बजाय बाहरी क्षेत्रों में ‘लैंटाना’ झाड़ियों में रहने लगे हैं और इसका उपयोग मवेशियों के शिकार के लिए कर रहे हैं। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ा है।

मप्र के वन पारिस्थितिक सूखे का सामना कर रहे
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सीएसई के वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि मप्र समेत मध्य भारत के जंगल ‘पारिस्थितिक सूखे’ का सामना कर रहे हैं। इसका अर्थ है कि लंबे समय तक पानी की कमी के कारण ये वन तंत्र अपनी संरचना और कार्यक्षमता खो रहे हैं।

विकास के लिए वनों का डायवर्जन सतत प्रक्रिया
विकास कार्यों के लिए वन भूमि का डायवर्जन सतत प्रक्रिया है। ये निर्णय केंद्रीय पर्यावरण एवं वन विभाग लेता है। देश में सर्वाधिक वन भूमि मप्र में हैं, इसलिए विकास के लिए यहां ज्यादा डायवर्जन होना स्वाभाविक है। – शुभ रंजन सेन, वन बल प्रमुख मध्यप्रदेश

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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