MP : प्रमोशन पाने एससी से एसटी बन गए IAS वर्मा:सांसद, चयन को कोर्ट ने गलत ठहराया था…

भोपाल। अजाक्स के प्रांताध्यक्ष और मध्य प्रदेश के कृषि विभाग में डिप्टी सेक्रेटरी IAS संतोष वर्मा का मामला जल्द शांत होता नहीं दिख रहा है। अब रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा ने वर्मा के प्रमोशन पर सवाल उठाए हैं। सांसद ने केंद्रीय कार्मिक लोक शिकायत एवं पेंशन राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर जांच कराने की मांग भी की है।
सांसद ने चयन की जांच कराने की मांग की
28 नवंबर 2025 को लिखे पत्र में सांसद मिश्रा ने तीन बड़ी मांगें की हैं-
विवादित टिप्पणी के लिए IAS संतोष वर्मा के खिलाफ भारतीय प्रशासनिक सेवा (आचरण) नियम, 1968 के अंतर्गत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
अनुसूचित जाति के स्थान पर अनुसूचित जनजाति के माध्यम से हुए चयन की जांच कराई जाए।
अदालत द्वारा पूर्व में दोषी ठहराए जाने और चयन प्रक्रिया में आई खामियों को ध्यान में रखते हुए वर्मा की पदोन्नति की समीक्षा कराई जाए।
कहा- पद और वेतन लाभ से वंचित किया जाए
सांसद ने चौंकाने वाला दावा किया है कि संतोष वर्मा का चयन भारतीय प्रशासनिक सेवा में जिन प्रक्रियाओं से हुआ, वे नियमों के विपरीत थीं। वर्मा को अनुसूचित जाति की जगह अनुसूचित जनजाति वर्ग में चयनित किया गया। उनके चयन और प्रमाणीकरण को वर्ष 2021 में अदालत ने भी गलत ठहराया था। न्यायालय के आदेशानुसार वर्मा को पद और वेतन लाभ से वंचित किया जाना चाहिए था।
मिश्रा ने पत्र में यह भी लिखा है कि वर्मा का नाम पूर्व में अदालत की अवमानना, अमर्यादित भाषा और सरकारी कार्य में बाधा जैसे मामलों में भी आया था। जिनके चलते उन्हें कारावास की सजा तक भुगतनी पड़ी थी।
समानता के सिद्धांत का उल्लंघन बताया
सांसद मिश्रा ने पत्र में यह भी लिखा है कि IAS संतोष वर्मा का बयान न सिर्फ वर्ग विशेष के प्रति अपमानजनक है, बल्कि संविधान प्रदत्त समानता के सिद्धांत का उल्लंघन भी करता है। वर्मा ऐसे समय में विवादित और विभाजनकारी बयान दे रहे हैं, जब केंद्र सरकार जातीय कल्याण, सामाजिक समरसता और संवैधानिक मूल्यों पर आधारित योजनाओं को आगे बढ़ा रही है। इस तरह की टिप्पणी सरकार के सकारात्मक अभियानों को बदनाम करती है।सांसद ने इसे “संवेदनशीलता और प्रशासनिक नैतिकता के खिलाफ” बताया।

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