ईटानगर। एजीएमयूटी कैडर की 2003 बैच की आईएएस अधिकारी और पश्चिम कामेंग की पूर्व उपायुक्त पद्मा जायसवाल को केंद्र सरकार ने सेवा से हटा दिया है।
उन्हें 2008 में थोड़े समय के लिए निलंबित किया गया था, लेकिन बाद में बहाल कर दिया गया। जांच हाल ही में पूरी हुई। केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) और संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) से परामर्श किया गया था, जिसमें यूपीएससी ने बर्खास्तगी की सिफारिश की थी।
सीबीआई ने उनके खिलाफ आरोप पत्र दायर कर उन पर सार्वजनिक धन के दुरुपयोग, अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करने और 2007-2008 के दौरान पश्चिम कामेंग जिले की उप आयुक्त के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान सरकारी धन को डायवर्ट करने का आरोप लगाया है।
यह किसी सेवारत आईएएस अधिकारी पर लगाया गया एक दुर्लभ गंभीर दंड है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA), जो एजीएमयूटी अधिकारियों के लिए कैडर-नियंत्रण प्राधिकरण है, ने लंबी अनुशासनात्मक जांच के बाद उनकी बर्खास्तगी की सिफारिश की थी। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) की सिफारिश पर भारत के राष्ट्रपति की अंतिम स्वीकृति के साथ यह आदेश इस सप्ताह के प्रारंभ में जारी किया गया था।
गृह मंत्रालय ने अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियमों के नियम 8 के तहत कार्रवाई शुरू की। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (सीएटी) ने पहले क्षेत्राधिकार के आधार पर इसे रद्द कर दिया था, लेकिन दिल्ली उच्च न्यायालय ने अप्रैल 2026 में केंद्र के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कार्यवाही को बहाल कर दिया।सेवा से हटाए जाने से उनका वर्तमान आईएएस कार्यकाल समाप्त हो जाता है, लेकिन इससे भविष्य में सरकारी नौकरी पाने पर स्वतः ही रोक नहीं लगती।
IAS अधिकारी पद्मा जायसवाल को सेवा से हटाया गया
