Editorial
खाद की लाइन में मिली मौत…

संजय सक्सेना
खाद की लाइन में तीन दिन लगी महिला, मौत…। रात-रात भर लाइन में लगना पड़ रहा है खाद के लिए। खाद केंद्रों के पास लोगों को सोना पड़ रहा है…। हंगामे की खबरें तो जैसे आम हो गई हैं। जब प्रदेश में खाद की पर्याप्त आपूर्ति हो रही है, जैसा कि सरकार का दावा है, फिर ये नौबत क्यों आ रही है? और क्यों मुख्यमंत्री को खुद बार-बार आनलाइन बैठक बुलाकर खाद वितरण व्यवस्था दुरस्त करने के लिए कहना पड़ रहा है?
्रताजा खबर बमौरी के बागेरी डबल लॉक खाद वितरण केंद्र पर यूरिया लेने के लिए रात में ही लाइन में लगी एक आदिवासी महिला की मौत की आई है। इस हादसे ने जिले में खाद की पर्याप्त उपलब्धता और वितरण व्यवस्था के सरकारी दावों की पोल खोलकर रख दी। जानकारी के अनुसार कुशेपुर गांव में सहरियाओं के शिकारी के टपरों में रहने वाली भूरी बाई पत्नी गजराज सिंह तीन दिन से खाद लेने के लिए जा रही थी। तबीयत बिगडऩे के बाद महिला को बमोरी स्वास्थ्य केंद्र से जिला अस्पताल लाने के लिए एंबुलेंस तक नहीं मिली। जब जिला अस्पताल में उसे मृत घोषित कर दिया गया तो वहां से वापस गांव जाने के लिए भी शव वाहन नहीं मिला। महिला का पीएम भी नहीं कराया गया है जिससे मौत का सही कारण सामने आ सके।
खाद को लेकर तीन-तीन दिन लाइन में लगने की खबरें तो लंबे समय से कई जिलों से आ रही हैं। खाद विक्रय केंद्रों में रात भर लोगों के सोने के फोटो भी लगातार आ रहे हैं। और दूसरी तरफ खाद की कालाबाजारी की खबरें भी आ रही हैं। आज ही खबर आई है, जिसमें भिंड जिले में खाद संकट के बीच लहार क्षेत्र के डबल डैक खाद गोदाम में बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। सहकारी विपणन संघ की शिकायत पर जांच में पाया गया कि गोदाम से 8 लाख 34 हजार रुपए से अधिक मूल्य की खाद बिना किसी अनुमोदन और बिना वितरण रिकॉर्ड के गायब है। लहार थाना पुलिस ने गबन का प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
ऐसी तमाम खबरों के बीच एक बार फिर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को देर रात कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक ली। उन्होंने कलेक्टरों और पुलिस अधीक्षकों से कहा है कि जिलों में खाद का संकट नहीं होना चाहिए और खाद के लिए लाइन लगने की शिकायत नहीं आनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने फिर से निर्देश दिये कि किसानों को कहीं भी खाद की समस्या ना हो, उचित प्रबंधन करें। वितरण की व्यवस्था सुधारने पर ध्यान दें। खाद लेने के लिए अधिक देर लाइन में लगने की नौबत न आए। ऐसी व्यवस्था बनाएं। किसी किसान को दिक्कत नहीं आनी चाहिए। गांवों से शहरों में या केंद्रों में खाद क्रय करने आए किसान बंधुओं के लिए भी शीतकाल से बचाव के आवश्यक उपाय करें।
आखिर ऐसा क्यों हो रहा है कि मुख्यमंत्री के बार-बार निर्देशों और चेतावनी के बाद भी खाद वितरण की व्यवस्था सही नहीं हो पा रही है। जब प्रदेश में पर्याप्त खाद आ रही है, तो उसका वितरण क्यों नहीं हो पा रहा है? किसान क्यों खाद के लिए लंबी लाइनों में लगेगा? क्यों वितरण केंद्रों के पास रात भर रुकेगा? तीन-तीन दिन कतारों में लगने का शौक है क्या किसानों को? कहीं तो गड़बड़ है। इसमें सुधार क्यों नहीं हो पा रहा है?
सवाल खाद की आपूर्ति का भर नहीं है, मुद्दा यह है कि समय पर किसान को खाद मिल जाए। जब खेतों को खाद की जरूरत है, तब मिले तो ही उसका लाभ मिलेगा, नहीं तो फसल खराब होना तय है। तो फिर कृषि विभाग और सहकारिता विभाग क्या कर रहा है? कलेक्टर की तो पूरे जिले की जिम्मेदारी होती है, पर विभाग के अधिकारी-कर्मचारी क्या करते हैं? उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई क्यों नहीं की जाती? क्यों खाद वितरण केंद्रों और निजी दुकानों की जांच नहीं होती? क्यों यह पता नहीं किया जाता कि खाद आई तो कहां गई? दुकान पर या सहकारी केंद्रों पर? सही दिशा में काम नहीं हो रहा है, ऐसा लग रहा है। मुख्यमंत्री को कृषि और सहकारिता विभाग पर लगाम कसनी होगी, तभी कुछ हो पाएगा, नहीं तो ऐसा ही चलता रहेगा।



