रक्षाबंधन के पहले एमपी में शुरू होगी सुगम परिवहन बसें , मुख्यमंत्री बोले- रक्षाबंधन पर बहनें कर सकेंगी बसों में सफर

भोपाल। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने कहा है कि प्रदेश में रक्षाबंधन से पहले मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत बसों का संचालन शुरू करने की तैयारी की जा रही है। सरकार का प्रयास है कि रक्षाबंधन के अवसर पर बहनों को राज्य परिवहन की बसों में यात्रा की सुविधा मिल सके।
विधानसभा परिसर में मीडिया से चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार चरणबद्ध तरीके से इस योजना को लागू कर रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस वर्ष रक्षाबंधन पर बहनें अपने भाइयों के घर राज्य परिवहन की बसों से सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा कर सकेंगी।
आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों को मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के कई आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में आज भी लोगों को आवागमन के लिए लोडिंग वाहनों का सहारा लेना पड़ता है। पर्याप्त सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था नहीं होने से ग्रामीणों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। सुगम परिवहन सेवा शुरू होने के बाद इन क्षेत्रों में यात्रा अधिक सुरक्षित, नियमित और सुविधाजनक हो सकेगी।
बेहतर सड़कें और बेहतर परिवहन
डॉ. यादव ने कहा कि राज्य परिवहन व्यवस्था आम नागरिकों के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सरकार एक ओर आधुनिक सड़क नेटवर्क विकसित कर रही है, वहीं दूसरी ओर बेहतर सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने के लिए भी प्रतिबद्ध है। उनका कहना था कि सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के बाद अब बेहतर परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करना भी सरकार की प्राथमिकता है।
कांग्रेस पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने राज्य परिवहन व्यवस्था के मुद्दे पर कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में राज्य परिवहन सेवाओं के बंद होने की प्रक्रिया कांग्रेस शासनकाल में शुरू हुई थी। अब सरकार का लक्ष्य सार्वजनिक परिवहन को फिर से मजबूत करना और लोगों तक उसकी पहुंच बढ़ाना है।
दूसरे राज्यों से भी जुड़ेगा नेटवर्क
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की योजना केवल प्रदेश के भीतर बस सेवाएं बढ़ाने तक सीमित नहीं है। प्रयास किया जा रहा है कि मध्य प्रदेश का बस नेटवर्क पड़ोसी राज्यों से भी बेहतर ढंग से जोड़ा जाए, ताकि यात्रियों को अधिक सुगम और सुलभ परिवहन सुविधा मिल सके।
सरकार का मानना है कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा शुरू होने से ग्रामीण, आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों के लाखों लोगों को सुरक्षित एवं नियमित यातायात का विकल्प मिलेगा, जिससे सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।





