Congress: जल संसाधन विभाग में परसेंटेज राज और फिक्स टेंडर मॉडल, डेढ़ वर्ष से टेंडर बंद, सिंचाई परियोजनाएँ ठप, किसानों के नाम पर कमीशन का खेल

भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग ने पत्रकार वार्ता के माध्यम से जल संसाधन विभाग में व्याप्त गंभीर अनियमितताओं, कथित कमीशन तंत्र और टेंडर प्रक्रिया में सुनियोजित पैटर्न को कथित तौर पर उजागर किया है। प्रवक्ताओं ने कहा कि विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार बड़े टेंडरों में पहले से परसेंटेज तय किए जाने की व्यवस्था की जाती है।
प्रश्न यह है कि क्या यही कारण है कि पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से जल संसाधन विभाग में बड़े नए टेंडर नहीं लगे? नौशाद कौन है? वह कोई सरकारी कर्मचारी नहीं है, फिर भी विभागीय निर्णयों में उसकी भूमिका क्यों रहती है? नौशाद का जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट से क्या संबंध है? मोंटेना नमक कंपनी को कमलनाथ सरकार ने ब्लैकलिस्ट किया था, वह अलग-अलग नामों से फिर टेंडर प्रक्रिया में कैसे शामिल हो रही है? क्या यह सही है कि वही गिनी-चुनी कंपनियाँ एल1, एल2, एल3 बनकर टेंडर प्रक्रिया में बार-बार शामिल होती हैं? क्या नौशाद के बेटे की हर टेंडर में जगदीश गुप्ता के साथ साझेदारी है? राजू मोंटाना (मोंटेना कंपनी, हैदराबाद निवासी) का इस पूरे नेटवर्क में क्या रोल है? क्या दुबई में कोई साझा व्यवसाय या आर्थिक लेनदेन संचालित हो रहा है? राजू मोंटेना मध्य प्रदेश शासन में इतना प्रभावशाली क्यों है?
अनेक जिलों खरगोन, अलीराजपुर, झाबुआ, डिंडोरी, बड़वानी, हरदा, रीवा, मंदसौर, सीहोर, मंडला, खंडवा आदि के बड़े सिंचाई एवं लिफ्ट इरिगेशन प्रोजेक्ट्स में निम्न कंपनियाँ लगातार साथ-साथ बोली लगाती दिखाई देती हैं-
LCC Projects Pvt. Ltd.
Mantena Infrasol Pvt. Ltd.
Navayuga Engineering Company Ltd.
Gaja Engineering Pvt. Ltd.
Hoisto Structures and Equipment Pvt. Ltd.
Megha Engineering & Infrastructures Ltd.
Larsen & Toubro Ltd.
Laxmi Civil Engineering Services Pvt. Ltd.
Phaloudi Constructions & Infrastructure Pvt. Ltd.
Vijay Kumar Mishra Construction Pvt. Ltd.
Dineshchandra R Agrawal Infracon Pvt. Ltd.
Dilips Buildcon Ltd.(DBL-VKMCPL JV)

उन्होंने कहा कि हर बार क्रम बदलता है। कई टेंडरों में मात्र 2 या 3 कंपनियाँ ही भाग लेती दिखाई देती हैं। कुछ मामलों में वही दो कंपनियाँ बार-बार आमने-सामने रहती हैं। क्या टेंडर शर्तें इस प्रकार बनाई गईं कि सीमित कंपनियाँ ही पात्र रहें? क्या पहले से तय होता है कि किसे टेंडर दिया जाएगा और बाकी केवल औपचारिकता निभाते हैं?
फर्जी बिलिंग और गुणवत्ता से समझौते के आरोप
उन्होंने आगे कहा कांग्रेस के संज्ञान में गंभीर शिकायतें आई हैं कि साइट पर सामग्री पहुँचे बिना भुगतान निकाल लिए गए। डीआई पाइप के स्थान पर एचडीपीई पाइप बिछाए जाने की शिकायतें हैं। एल1 घोषित होने के बाद भुगतान में कथित 2 प्रतिशत की अनिवार्य कटौती की जाती है। यह केवल वित्तीय भ्रष्टाचार नहीं बल्कि तकनीकी धोखाधड़ी भी है।
कृषि वर्ष की घोषणा, पर जमीन पर सन्नाटा
प्रवक्ताओं ने कहा प्रदेश सरकार ने बजट में सिंचाई रकबा बढ़ाने का दावा किया
कृषि वर्ष घोषित किया। हजारों करोड़ के आवंटन की घोषणा की, किन्तु वास्तविकता यह है कि डेढ़ वर्ष से टेंडर प्रक्रिया लगभग ठप है। जब टेंडर ही नहीं लगेंगे तो परियोजनाएँ कैसे बनेंगी? जब परियोजनाएँ नहीं बनेंगी तो किसानों तक पानी कैसे पहुँचेगा? क्या यह किसानों और करदाताओं के साथ छल नहीं है?
2023-24 के टेंडरों से जुड़े स्तावेज सार्वजनिक किए
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता राहुल राज ने आज पत्रकार वार्ता में वर्ष 2023-24 के टेंडरों से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज सार्वजनिक किए। उन्होंने आरोप लगाया कि डेढ़ वर्ष से टेंडर प्रक्रिया पर लगी रोक से पहले भी चुनिंदा कंपनियों के बीच सुनियोजित नेक्सस बनाकर टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया गया। दस्तावेज दर्शाते हैं कि 2023-24 के टेंडरों में गिनी-चुनी कंपनियों ने आपसी तालमेल से एल1, एल2, एल3 बनकर प्रतिस्पर्धा का केवल दिखावा किया। कई परियोजनाओं में वही कंपनियां अलग-अलग भूमिकाओं में एक-दूसरे के समर्थन में टेंडर डालती रहीं, जिससे वास्तविक प्रतिस्पर्धा समाप्त हो गई। दस्तावेज संकेत देते हैं कि कुछ आपस में जुड़ी कंपनियां अलग-अलग नामों से बार-बार टेंडर प्रक्रिया में शामिल हुईं। आखिर मनीष गुप्ता और  जगदीश पर सरकार इतनी मेहरबान क्यों है?
गिनी-चुनी कंपनियों का वर्चस्व
कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि क्या पूरे भारतवर्ष में केवल 11-12 कंपनियां ही बची हैं जिन्हें टेंडर मिलना है? क्या मध्य प्रदेश में अन्य कंपनियां टेंडर नहीं डाल सकतीं? आखिर बाकी योग्य ठेकेदार इस प्रतिस्पर्धा से गायब क्यों हैं? प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना के तहत युवाओं को ठेकेदार बनाकर रोजगार देने की बात कही गई थी, वे युवा कहां हैं? उन्हें अवसर क्यों नहीं मिल रहे? क्या टेंडर प्रक्रिया कुछ चुनिंदा कंपनियों के लिए ही आरक्षित है?
संदिग्ध परिसरों की जांच की मांग
राहुल राज ने कहा कि जिन दस्तावेजों से नेक्सस का संकेत मिलता है, उनकी कडिय़ा गुजराती कालोनी स्थित एक निजी परिसर और अरेरा कॉलोनी स्थित एक बड़ी कंपनी के कार्यालय से जुड़ती प्रतीत होती हैं, जहां कथित रूप से टेंडर की साठगांठ तय होती रही। इन परिसरों की स्वतंत्र फोरेंसिक जांच कराई जानी चाहिए ताकि पूरी मनी ट्रेल सामने आ सके।
डेढ़ वर्ष से टेंडर पर रोक लगाने से पहले ही 2023-24 में संगठित साठगांठ का तंत्र सक्रिय था। आज हमने उसके दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। सवाल यह है कि क्या मध्य प्रदेश में प्रतिस्पर्धा समाप्त कर दी गई है? क्या केवल गिनी-चुनी कंपनियों के लिए ही टेंडर प्रक्रिया संचालित हो रही है? यदि सरकार पारदर्शी है तो स्वतंत्र जांच कराए और सच्चाई सामने लाए।
कांग्रेस की मांग है कि 2023-24 के सभी टेंडरों की स्वतंत्र एवं उच्चस्तरीय जांच की जाए। सार्वजनिक किए गए दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच हो। संदिग्ध परिसरों की जांच कर मनी ट्रेल उजागर की जाए, टेंडर प्रक्रिया में वास्तविक प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित की जाए, युवाओं को समान अवसर दिया जाए, दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्तियों पर कठोर कार्रवाई की जाए, यह केवल टेंडर का प्रश्न नहीं, बल्कि पारदर्शिता, युवाओं के रोजगार और किसानों के भविष्य का प्रश्न है।

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