विशेष गहन पुनरीक्षण में विसंगतियों से मतदाताओं में भ्रम और भय, तत्काल स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे राज्य निर्वाचन आयोग : उमंग सिंघार

SIR में प्रणालीगत विसंगतियों को लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्य निर्वाचन आयोग को लिखा पत्र
भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के अंतर्गत प्रारूप मतदाता सूची जारी होने के पश्चात सामने आई व्यापक प्रणालीगत विसंगतियों (System-Generated Discrepancies) और सत्यापन प्रक्रिया में स्पष्टता के अभाव पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने इसको लेकर राज्य निर्वाचन आयोग को एक पत्र लिखा है।
नेता प्रतिपक्ष ने अपने पत्र में कहा* कि SIR के तहत प्रारूप मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद प्रदेश के लगभग सभी जिलों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम तथाकथित विसंगति सूचियों में शामिल कर दिए गए हैं।
इन विसंगतियों में (1) छह से अधिक संतानों का उल्लेख (2) पिता के नाम में असंगति (3) माता-पिता एवं मतदाता की आयु में 15 वर्ष से कम या 50 वर्ष से अधिक का अंतर (4) दादा/नाना एवं मतदाता की आयु में 40 वर्ष से कम का अंतर जैसी प्रविष्टियाँ शामिल हैं।

उमंग सिंघार ने स्पष्ट किया कि ये सभी विसंगतियाँ पूरी तरह डेटा-आधारित और प्रणाली द्वारा स्वतः उत्पन्न संकेत हैं, जिनका उद्देश्य केवल सत्यापन को चिन्हित करना है, न कि मतदाता की पात्रता पर कोई अंतिम निष्कर्ष निकालना। किंतु इन विसंगतियों का पैमाना इतना व्यापक है कि लाखों मतदाता प्रभावित हो रहे हैं, जिससे आम नागरिकों में भय, भ्रम और मानसिक दबाव की स्थिति बन गई है।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार विसंगति मामलों में बूथ लेवल अधिकारी (BLO) की जिम्मेदारी है कि वे विधिवत नोटिस की सेवा, स्थल पर भौतिक सत्यापन और सुनवाई के अवसर के बाद ही कोई कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन जमीनी स्तर से प्राप्त सूचनाएँ बताती हैं कि नोटिस वितरण और सत्यापन की प्रक्रिया बेहद धीमी है, कई BLO और जिला स्तर के अधिकारी प्रक्रिया को लेकर स्वयं स्पष्ट नहीं हैं और अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग तरीके अपनाए जा रहे हैं। इससे कई मामलों में मतदाताओं में नाम विलोपन का भय और अधिक गहरा गया है।

उमंग सिंघार ने कहा कि यह स्थिति सीधे-सीधे नागरिकों के मताधिकार जैसे मौलिक लोकतांत्रिक अधिकार को प्रभावित करती है, इसलिए तत्काल प्रशासनिक हस्तक्षेप अत्यंत आवश्यक है।

*नेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि—*
• सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों, निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) और BLOs को लिखित रूप में स्पष्ट निर्देश दिए जाएँ कि SIR के अंतर्गत प्रणालीगत विसंगतियाँ केवल सत्यापन संकेत हैं, इनके आधार पर स्वतः दस्तावेज मांगना या नाम विलोपित करना उचित नहीं है।
• विसंगति सत्यापन के लिए एक सरल, एकरूप और मानकीकृत प्रक्रिया तय की जाए।
• BLOs और पर्यवेक्षी अधिकारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण और संवेदनशीलता कार्यक्रम आयोजित किए जाएँ।
• आम जनता से पारदर्शी संवाद स्थापित कर यह भरोसा दिलाया जाए कि विधिवत नोटिस, मैदानी सत्यापन और सुनवाई के बिना किसी भी मतदाता का नाम नहीं हटाया जाएगा।
• मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी, मध्यप्रदेश की वेबसाइट और अन्य सार्वजनिक माध्यमों पर विधानसभा क्षेत्रवार नियमित सार्वजनिक बुलेटिन जारी किया जाए, जिसमें नोटिसों की सेवा, सत्यापन की प्रगति और नाम विलोपन या बहाली की स्थिति स्पष्ट रूप से दिखाई जाए।

उमंग सिंघार ने कहा कि जब विसंगतियाँ स्वयं प्रणालीगत और प्रक्रियात्मक हैं, तब प्रशासनिक अस्पष्टता के कारण लाखों वास्तविक और पात्र मतदाताओं का नाम कटने की स्थिति बनना न केवल पीड़ादायक है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए सर्वथा अस्वीकार्य भी है। उन्होंने राज्य निर्वाचन आयोग से आग्रह किया कि इस विषय को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएँ।

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Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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