Bhopal : फाइनेंशियल गड़बड़ियों को लेकर भोपाल निगम सेंट्रल वर्कशॉप में छापा, फर्जी बिलिंग से जुड़ा है मामला, चंचलेश सहित कई अफसर नपेंगे…!

भोपाल। नगर निगम में रविवार सुबह 9 बजे लोकायुक्त की टीम ने सेंट्रल वर्क शॉप माता मंदिर के करीब स्थित नगर निगम के ऑफिस में छापा मारा। टीम की छापा मार कार्रवाई अभी भी जारी है। इसमें वर्क शॉप प्रभारी चंचलेश सहित कई अफसरों के नपने की सम्भावना है।

दरअसल, बिना काम कराए फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपए निकालने के मामले में लोकायुक्त पुलिस ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई की थी। इसी कार्रवाई के दौरान टीम को बड़े पैमाने पर सेंट्रल वर्कशॉप नगर निगम में वित्तीय अनीयमितताएं किए जाने के सबूत मिले थे। जिसके आधार पर रविवार को यह कार्रवाई की जा रही है। यहां निगम की गाड़ियों से जुड़े मैकेनिकल काम होते हैं।

निगम के डाटा सेंटर फतेहगढ़ से पुलिस ने शुक्रवार को कार्रवाई करते हुए करीब 10 साल के दस्तावेज और सर्वर डाटा जब्त कर लिया था। अब लोकायुक्त की टीम सेंट्रल वर्क शॉप स्थित ऑफिस से दस्ताजों की जांच कर रही है। साथ ही जिम्मेदार सहित वहां मौजूद कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है।

11 मार्च को अपर आयुक्त के खिलाफ दर्ज की थी एफआईआर

निगम में फर्जी भुगतान की शिकायत नवंबर 2025 में लोकायुक्त को मिली थी। प्रारंभिक जांच में तथ्य सही पाए जाने पर 11 मार्च को आयुक्त गुणवंत सेवतकर के खिलाफ भ्रष्टाचार, आपराधिक षड्यंत्र और कूटरचित दस्ताजों के आधार पर धोखाधड़ी की धाराओं में FIR दर्ज की गई है। इसके बाद कोर्ट से सर्च वारंट लेकर छापेमारी की गई।

सॉफ्टवेयर से फर्जी बिल तैयार कराए

लोकायुक्त एसपी दुर्गेश राठौर के अनुसार, शिकायत में आरोप है कि सॉफ्टवेयर की मदद से फर्जी बिल तैयार कराए गए और बिना काम कराए ही परिचितों व रिश्तेदारों की फर्मों के नाम पर करोड़ों रुपए का भुगतान कराया गया।

गड़बड़ी: बिना काम कराए ई-बिल से भुगतान
आरोप है कि नगर निगम के जलकार्य, सामान्य प्रशासन और केंद्रीय वर्कशॉप जैसे विभागों के नाम पर वाहनों की मरम्मत, पेंटिंग और अन्य काम दिखाए गए। कई मामलों में वास्तव में काम हुआ ही नहीं, लेकिन सिस्टम में ई-बिल तैयार कर दिए गए। कुछ मामलों में जिस विभाग के नाम से बिल बनाए गए, उन्हें ही इसकी जानकारी नहीं थी।

दो दिन पहले डेटा सेंटर से जब्त किए थे रिकार्ड
लोकायुक्त टीम ने शुक्रवार सुबह करीब 10:30 बजे निगम के डाटा सेंटर फतेहगढ़ में छापेमारी की। लोकायुक्त का कहना है कि डिजिटल डाटा और दस्तावेजों की जांच के बाद मामले में अन्य कर्मचारियों और फर्मों की भूमिका भी सामने आ सकती है। जब्त डेटा के एनालाइज केआधार पर आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।

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SAP सॉफ्टवेयर का डाटा जब्त किया
प्रारंभिक जांच में मोटर वर्क शाखा, जल कार्य विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग से जुड़े कुछ कार्यों में गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। जांच टीम ने भुगतान से जुड़े SAP सॉफ्टवेयर का डिजिटल डाटा भी कब्जे में लिया है। अब इसकी जांच कर यह पता लगाया जाएगा कि किन-किन कार्यों के नाम पर भुगतान किया गया और वास्तव में काम हुआ भी था या नहीं।

अपर आयुक्त बोले- कमिश्नर से चर्चा के बाद भुगतान
अपर आयुक्त गुणवंत सेवतकर का कहना है कि लेखा शाखा में बिल सीधे तैयार या पास नहीं किए जाते। बिल संबंधित विभागों से सत्यापन के बाद आते हैं और फंड की उपलब्धता के अनुसार नगर निगम आयुक्त से चर्चा के बाद भुगतान किया जाता है।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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