Bhopal : अमृत-2 के तहत 35 एजेंसियों को नोटिस, 13 ब्लैकलिस्ट किये

भोपाल। इंदौर में दूषित जल से हुई मौतों के बाद सरकार जलापूर्ति और सीवरेज परियोजनाओं पर खास सतर्कता बरत रही है। सोमवार को राजधानी में सभी संभागों में अमृत 2 के तहत चल रही जलापूर्ति और सीवरेज योजनाओं में हो रही देरी पर समीक्षा की गई। निर्माण एजेंसियों ने योजना की डीपीआर में लगने वाले समय की शिकायत की।
वहीं, जिलों के विभागीय अधिकारियों ने कहा कि निकायों में बजट की कमी से योजना में अंशदान समय पर नहीं मिलता। समीक्षा के बाद एसीएस संजय दुबे ने योजनाओं में देरी पर 35 एजेंसियों को नोटिस, 13 को ब्लैकलिस्ट और 6 को अगले आदेश तक टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने से रोकने के निर्देश दिए ।
कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में नगरीय विकास एवं आवास के अफसरों के अलावा निर्माण एजेंसियां और प्रोजेक्ट डेवलपमेंट एंड मैनेजमेंट एजेंसियां जुटीं। संभागवार चर्चा में कई निर्माण एजेंसियों ने कहा कि डीपीआर को सहमति मिलने में कई महीने लग जाते हैं, प्रोजेक्ट लेट हो जाता है।
कई बार भुगतान की समस्या भी आती है। संभाग के अधिकारियों ने कहा कि निकायों में बजट की कमी से वे अंशदान समय पर नहीं दे पाते हैं, जबकि राज्य व केंद्र का बजट तो समय पर आ जाता है। एसीएस ने धीमी चल रहीं योजनाओं में मार्च तक प्रगति लाने के निर्देश दिए।
भोपाल, इंदौर व ग्वालियर निगमों की समीक्षा अलग से होगी
सोमवार को हुई बैठक में संभागवार समीक्षा हुई पर बड़ी योजनों वाले भोपाल, इंदौर और ग्वालियर निगमों की समीक्षा अलग से होगी। सरकार के लिए भी दोनों महानगरों पर विशेष फोकस है। अभी 10 करोड़ से बड़े कामों की समीक्षा हुई है, पर जल्द 10 करोड़ से छोटी योजनाओं की भी समीक्षा होगी।
एसीएस संजय दुबे ने निर्माण एजेंसियों को निर्देश दिए कि पानी के अलावा सीवरेज लाइन बिछाते समय ही कनेक्शन देते जाएं, तभी कामों का भुगतान होगा। इसी के साथ इंजीनियर निरीक्षण के साथ ही जियो टैगिंग करके फोटो भी अपलोड करेंगे। दुबे ने कहा कि पहले लोकल ऑडिट करा लें फिर भुगतान के लिए विभाग में बिल भेजें क्योंकि बाद में ऑडिट होने से बार बार संशोधन होता है।
डीपीआर की प्रक्रिया छोटी हो: डीपीआर की लम्बी प्रक्रिया पर भी निर्माण एजेंसियों ने शिकायत की। अभी कंसलटेंट डीपीआर बनाकर प्रोजेक्ट डेवलपमेंट एजेंसी को देते हैं, फिर विभाग में जाती है, जहाँ से ये मैनिट भेजते हैं, फिर विभाग को वापस भेजते हैं।
कई बार 6 महीने से भी ज्यादा लग जाते हैं। आयुक्त संकेत भोंडवे ने कहा कि डीपीआर में गड़बड़ी पर सख्त कार्रवाई होगी। वहीं, उन्होंने डीपीआर की सहमति के लिए दो से तीन चरण की प्रक्रिया बनाने के निर्देश भी दिए। कुल 136 परियोजनाओं की समीक्षा हुई।

Sanjay Saxena

BSc. बायोलॉजी और समाजशास्त्र से एमए, 1985 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय , मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के दैनिक अखबारों में रिपोर्टर और संपादक के रूप में कार्य कर रहे हैं। आरटीआई, पर्यावरण, आर्थिक सामाजिक, स्वास्थ्य, योग, जैसे विषयों पर लेखन। राजनीतिक समाचार और राजनीतिक विश्लेषण , समीक्षा, चुनाव विश्लेषण, पॉलिटिकल कंसल्टेंसी में विशेषज्ञता। समाज सेवा में रुचि। लोकहित की महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना और उस जानकारी को समाचार के रूप प्रस्तुत करना। वर्तमान में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से जुड़े। राजनीतिक सूचनाओं में रुचि और संदर्भ रखने के सतत प्रयास।

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