भोपाल। आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने शराब से मिलने वाले राजस्व के मामले में लापरवाही पर बैतूल और गुना जिले के आबकारी अधिकारी और प्रभारी जिला आबकारी अधिकारी को निलंबित कर दिया है। इन अधिकारियों की लापरवाही से अब तक शराब दुकानों की नीलामी प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है और अभी भी 400 शराब दुकानों की नीलामी किया जाना बाकी है। जहां विभाग को अपने स्तर पर दुकानों के संचालन की व्यवस्था करनी पड़ रही है।
प्रदेश में वर्ष 2026-27 की आबकारी नीति के तहत शराब दुकानों की नीलामी में लापरवाही बरतने पर प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना द्वारा जारी आदेश में राजस्व लक्ष्य की पूर्ति में अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर बैतूल के जिला आबकारी अधिकारी अंशुमान सिंह चिड़ार और अशोकनगर-गुना के प्रभारी जिला आबकारी अधिकारी गुरुप्रसाद केवट को निलंबित किया गया है।
दोनों अधिकारियों पर शराब दुकानों की नीलामी में शासकीय राजस्व हित में तत्परता और प्रभावी कार्रवाई नहीं करने का आरोप है। इसी के चलते मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियम, 1966 के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित किया गया।निलंबन अवधि के दौरान दोनों अधिकारियों का मुख्यालय संभागीय कार्यालय में निर्धारित किया गया है और उन्हें नियमानुसार जीवन-निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।
भोपाल और ग्वालियर में अटैच किए गए निलंबित अफसर
बैतूल के जिला आबकारी अधिकारी का मुख्यालय निलंबन के बाद उपायुक्त आबकारी कार्यालय संभागीय उड़नदस्ता भोपाल और गुना अशोकनगर के प्रभारी जिला आबकारी अधिकारी का मुख्यालय आबकारी उपायुक्त कार्यालय संभागीय उड़नदस्ता ग्वालियर तय किया गया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि राजस्व लक्ष्यों की पूर्ति में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विभागीय कार्यों में तेजी लाने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आगे भी सख्त कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
प्रदेश में अब तक हुई शराब दुकानों की नीलामी
आबकारी विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 6 अप्रैल तक प्रदेश में कुल 3553 शराब दुकानों में से 3153 दुकानों की नीलामी की कार्रवाई हो चुकी है, जबकि 400 दुकानें अभी शेष हैं। 6 अप्रैल को 21 दुकानों की नीलामी से आवंटन की कार्रवाई की गई है।
इन दुकानों का आरक्षित मूल्य 106.95 करोड़ रुपए रहा है और प्राप्त राजस्व 75.55 करोड़ रुपए दर्ज किया गया है। इस वर्ष शराब दुकानों के लिए कॉन्ट्रैक्टरों की संख्या में भी वृद्धि हुई है। पिछले वर्ष जहां 489 कॉन्ट्रैक्टर थे, वहीं इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 919 हो गई है।
