Ankita हत्याकांड: वनंतरा रिजॉर्ट पहुंचे लोगों का प्रदर्शन, पुलिस से हुई नोकझोंक, दोषियों को फांसी की मांग, कौन है वीआईपी जिसका जिक्र वीडिओ में..?

गढ़वाल। उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में है. करीब तीन साल पहले ऋषिकेश के पास वंतारा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या के बाद जमकर बवाल हुआ था. हाल ही में सामने आए उर्मिला सनावर के एक वीडियो ने इस मामले को फिर से चर्चा में ला दिया है. वीडियो में कथित तौर पर एक ‘वीआईपी’ के नाम का जिक्र और भारतीय जनता पार्टी के कई नेताओं पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं.
इधर, अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग को लेकर मूल निवास भू कानून संघर्ष समिति के नेतृत्व में लोगों ने वनंतरा रिजॉर्ट के बाहर प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रदर्शन कर रहे लोगों और पुलिस में नोकझोंक भी हुई। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने अंकिता हत्याकांड में शामिल लोगों को फांसी देने की मांग की।गंगा भोगपुर तल्ला में मूल निवास भू कानून संघर्ष समिति के आह्वान पर प्रदर्शन होने की सूचना पर पौड़ी गढ़वाल जिला प्रशासन की ओर से मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर बैरिकेटिंग लगाए गए थे। कार्यक्रम के दौरान आक्रोशित भीड़ और पुलिस बल के बीच वनंतरा रिसॉर्ट की ओर जाने को लेकर जद्दोजहद की स्थिति भी बनी रही।
इसी दौरान मूल निवास भू कानून संघर्ष समिति के संयोजक लुशुन टोडरिया और पुलिस बल में नोकझाेंक हुई। टोडरिया ने कहा कि जब तक अंकिता भंडारी को न्याय नहीं मिलेगा तब तक आंदोलन जारी रहेगा। इस हत्याकांड में शामिल लोगों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए. पुलिस के दबाव जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। संस्थापक संयोजक मोहित डिमरी ने कहा कि अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष अब निर्णायक चरण में है।
30 दिसंबर को देहरादून में एक सर्वदलीय बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों को आमंत्रित किया जाएगा। हिमांशु रावत ने कहा कि भाजपा सरकार शुरू से ही वीआईपी को बचाने का प्रयास कर रही है। पूर्व विधायक ओम गोपाल रावत ने कहा कि इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के जज की निगरानी में होनी चाहिए।
उर्मिला सनावर के वीडियो के सामने आने के बाद उत्तराखंड की राजनीति में उबाल आ गया है. वीडियो में कथित तौर पर कुछ ‘वीआईपी’ नामों का उल्लेख किया गया है, जिसे लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर हो गया है. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि शुरू से ही इस मामले में प्रभावशाली लोगों को बचाने की कोशिश की गई और अब जब कुछ बातें सामने आ रही हैं, तो उन्हें दबाने का प्रयास हो रहा है.
पूर्व सीएम ने उठाए सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने फेसबुक लाइव के जरिए इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया. उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी मामले ने देवभूमि उत्तराखंड की छवि को गहरा नुकसान पहुंचाया है. उनका कहना है कि अगर इस राज्य की अस्मिता और बेटियों की सुरक्षा को बचाना है, तो सच के साथ खड़ा होना पड़ेगा. हरीश रावत ने धामी सरकार से मांग की कि कैबिनेट की बैठक बुलाकर इस मामले की पुनः जांच (री-इन्वेस्टिगेशन) का प्रस्ताव पारित किया जाए और जांच सीबीआई को सौंपी जाए.





